युवा वोट बैंक पर टिकी सियासी नजर, स्टूडेंट प्रोटेस्ट के बाद तेज हुई नई चुनावी रणनीति

0
images (9)

CENTRAL NEWS DESK: देश में हाल के छात्र आंदोलनों और जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन के बाद राजनीति का फोकस तेजी से युवाओं की ओर बढ़ता दिखाई दे रहा है। पेपर लीक, रोजगार और शिक्षा जैसे मुद्दों पर युवाओं की बढ़ती सक्रियता ने सत्ताधारी दल और विपक्ष दोनों को नई रणनीति बनाने पर मजबूर कर दिया है। अब सभी प्रमुख राजनीतिक दल 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव समेत आने वाले चुनावों को देखते हुए युवा मतदाताओं को साधने में जुट गए हैं।

विपक्ष ने युवाओं के मुद्दों पर बढ़ाया जोर

विपक्षी दल छात्र आंदोलनों को जनसमर्थन में बदलने की कोशिश कर रहे हैं। कांग्रेस युवाओं और छात्रों के मुद्दों को लेकर लगातार कार्यक्रम आयोजित कर रही है। पार्टी का कहना है कि रोजगार, शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े सवालों को लगातार उठाया जाएगा। इसी कड़ी में प्रयागराज में भी बड़ा कार्यक्रम प्रस्तावित है।

वहीं समाजवादी पार्टी ने हाल ही में अपनी पीडीए-2 ऑडिट रिपोर्ट जारी कर प्रदेश में बीते वर्षों के पेपर लीक मामलों को प्रमुखता से उठाया है। पार्टी से जुड़े छात्र और युवा संगठनों ने भी छात्र आंदोलनों में सक्रिय भागीदारी दर्ज कराई है।

सत्ता पक्ष भी बदलेगा संवाद का तरीका

भारतीय जनता पार्टी भी युवाओं के बीच अपनी पकड़ मजबूत बनाए रखने के लिए नई रणनीति तैयार कर रही है। पार्टी का मानना है कि पहली बार मतदान करने वाले युवाओं तक सरकार की योजनाओं, नई शिक्षा नीति, स्टार्टअप, रोजगार और कौशल विकास जैसे विषयों की जानकारी प्रभावी ढंग से पहुंचाई जानी चाहिए। इसके लिए संवाद कार्यक्रमों का स्वरूप बदला जाएगा।

राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के सहयोगी राष्ट्रीय लोकदल ने भी “युवा संवाद चौपाल” आयोजित करने की घोषणा की है, जहां शिक्षा, कौशल विकास और रोजगार जैसे विषयों पर युवाओं से सीधे संवाद किया जाएगा।

युवा मतदाता बनेंगे चुनावी समीकरण की कुंजी

राजनीतिक दलों की बढ़ती सक्रियता के पीछे देश का बड़ा युवा मतदाता वर्ग भी अहम वजह है। देश में करीब 96.88 करोड़ मतदाताओं में लगभग 19.74 करोड़ मतदाता 20 से 29 वर्ष आयु वर्ग के हैं। वहीं पहली बार मतदान करने वाले 18 से 19 वर्ष के मतदाताओं की संख्या करीब 1.85 करोड़ है।

उत्तर प्रदेश में भी 18 से 19 वर्ष आयु वर्ग के लाखों नए मतदाता आगामी विधानसभा चुनाव में पहली बार अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। ऐसे में राजनीतिक दल युवाओं के मुद्दों को चुनावी एजेंडे के केंद्र में रखकर अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं।

युवाओं के मुद्दे तय कर सकते हैं चुनावी दिशा

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि शिक्षा, रोजगार, प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता और अवसरों से जुड़े मुद्दे आने वाले समय में चुनावी बहस के प्रमुख विषय बन सकते हैं। यही कारण है कि सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ही युवाओं के बीच अपनी स्वीकार्यता बढ़ाने के लिए लगातार नई रणनीतियों पर काम कर रहे हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You may have missed