India-Russia Trade: डिजिटल करेंसी से बदलेगा भारत-रूस व्यापार का तरीका, क्रॉस-बॉर्डर पेमेंट को लेकर बड़ी तैयारी

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CENTRAL NEWS DESK: भारत और रूस के बीच बढ़ते व्यापार को आसान बनाने के लिए डिजिटल करेंसी के इस्तेमाल की संभावनाओं पर काम शुरू हो गया है। दोनों देश सीमा-पार भुगतान यानी क्रॉस-बॉर्डर पेमेंट्स के लिए डिजिटल करेंसी आधारित सिस्टम विकसित करने के तरीकों पर चर्चा कर रहे हैं। इससे दोनों देशों के बीच व्यापारिक लेनदेन तेज और आसान होने की उम्मीद है।

RBI और रूस का सेंट्रल बैंक कर रहे काम

रूस के सबसे बड़े बैंक स्बरबैंक के सीईओ हरमन ग्रेफ ने बताया कि रूस का सेंट्रल बैंक और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) डिजिटल करेंसी के जरिए भुगतान की व्यवस्था पर काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि अभी यह पहल शुरुआती चरण में है, लेकिन आने वाले समय में दोनों देशों के बीच विभिन्न प्रकार के लेनदेन में डिजिटल करेंसी की बड़ी भूमिका हो सकती है।

ग्रेफ के मुताबिक, डिजिटल करेंसी की मांग आने वाले समय में बढ़ने की संभावना है। भारत और रूस दोनों अपने-अपने डिजिटल करेंसी सिस्टम विकसित कर चुके हैं और अब इनके इस्तेमाल को अंतरराष्ट्रीय व्यापार से जोड़ने की संभावनाएं तलाश रहे हैं।

डिजिटल रूबल और डिजिटल रुपया

रूस ने अपनी सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी (CBDC) डिजिटल रूबल को प्रमुख बैंकों के जरिए लॉन्च किया है। वहीं भारत ने भी 2022 में डिजिटल रुपये का पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया था। धीरे-धीरे इसका इस्तेमाल अलग-अलग क्षेत्रों और सरकारी कार्यक्रमों में बढ़ाया जा रहा है।

अब दोनों देशों के सामने चुनौती इन घरेलू डिजिटल करेंसी सिस्टम को सीमा-पार भुगतान के लिए प्रभावी तरीके से जोड़ने की है।

BRICS भी बना रहा क्रॉस-बॉर्डर पेमेंट का सिस्टम

भारत-रूस की यह पहल BRICS के व्यापक वित्तीय एजेंडे से भी जुड़ी हुई है। BRICS देश स्थानीय मुद्राओं में व्यापार और ऐसे भुगतान सिस्टम विकसित करने पर चर्चा कर रहे हैं, जिससे सीमा-पार लेनदेन अधिक तेज, कम खर्चीला, सुरक्षित और पारदर्शी बनाया जा सके।

BRICS पेमेंट टास्क फोर्स ने अलग-अलग देशों के पेमेंट और मैसेजिंग सिस्टम के बीच इंटरऑपरेबिलिटी की संभावनाओं का भी अध्ययन किया है। हालांकि, समूह का मानना है कि सभी देशों के लिए एक ही भुगतान व्यवस्था लागू करना जरूरी नहीं है। राष्ट्रीय प्राथमिकताओं को ध्यान में रखते हुए व्यावहारिक समाधान तलाशने पर जोर दिया जा रहा है।

रुपये के जमावड़े की समस्या हुई कम

भारत-रूस व्यापार में भुगतान से जुड़ी एक बड़ी समस्या 2022 के बाद सामने आई थी। रूस से भारत के तेल आयात में तेजी आने के कारण रूसी कंपनियों के भारतीय बैंकों में मौजूद वोस्ट्रो खातों में बड़ी मात्रा में रुपये जमा होने लगे थे।

हरमन ग्रेफ ने कहा कि अब यह समस्या बड़ी चुनौती नहीं है। कंपनियों ने जमा रुपये के इस्तेमाल के तरीके खोज लिए हैं। कुछ अतिरिक्त राशि को भारतीय सरकारी प्रतिभूतियों में निवेश किए जाने की बात भी सामने आई है।

60 अरब डॉलर का व्यापार, लेकिन बड़ा असंतुलन

भारत और रूस के बीच द्विपक्षीय व्यापार वित्त वर्ष 2025-26 में करीब 60 अरब डॉलर तक पहुंच गया। इसमें भारत की ओर से रूस से होने वाले आयात में कच्चे तेल की बड़ी हिस्सेदारी रही है।

दोनों देश दशक के अंत तक द्विपक्षीय व्यापार को 100 अरब डॉलर तक ले जाने का लक्ष्य रखते हैं। हालांकि, व्यापार का संतुलन रूस के पक्ष में काफी अधिक है। ग्रेफ ने कहा कि रूस को भारतीय उत्पादों के लिए अपने बाजार में ज्यादा अवसर उपलब्ध कराने की जरूरत है।

ऐसे में डिजिटल करेंसी और नए क्रॉस-बॉर्डर पेमेंट सिस्टम को सिर्फ भुगतान की सुविधा के तौर पर नहीं, बल्कि भारत-रूस व्यापार को और विस्तार देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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