PDA के बच्चों को एजुकेशन से वंचित करने के लिए 26 हजार से ज्यादा स्कूल बंद किए गए: अखिलेश यादव

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CENTRAL NEWS DESK: समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने उत्तर प्रदेश की भाजपा सरकार पर सरकारी प्राथमिक विद्यालय बंद करने का गंभीर आरोप लगाया है। उन्होंने दावा किया कि वर्ष 2017 में भाजपा सरकार बनने के बाद से प्रदेश में 26 हजार से अधिक सरकारी प्राथमिक विद्यालय बंद कर दिए गए, जिससे पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक (पीडीए) समुदाय के बच्चों की पढ़ाई सबसे अधिक प्रभावित हुई है।

रविवार को लखनऊ स्थित समाजवादी पार्टी मुख्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता में अखिलेश यादव ने कहा कि उनकी पार्टी विधानसभा के मानसून सत्र में इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाएगी। उन्होंने कहा कि स्कूल बंद होने, एजुकेशन सिस्टम, शिक्षक भर्ती, पेपर लीक, लॉ सिस्टम और भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों पर सरकार को घेरा जाएगा।

‘2017 के बाद 26 हजार से ज्यादा स्कूल बंद’

अखिलेश यादव ने दावा किया कि मार्च 2017 तक उत्तर प्रदेश में 1,13,938 सरकारी प्राथमिक विद्यालय थे। भाजपा सरकार बनने के बाद इनमें से 26 हजार से अधिक विद्यालय बंद कर दिए गए। उन्होंने बताया कि सबसे ज्यादा स्कूल लखीमपुर खीरी में बंद हुए, जहां 758 विद्यालय, सीतापुर में 650, प्रयागराज में 638 और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गृह जनपद गोरखपुर में करीब 500 विद्यालय बंद किए गए।

‘पीडीए समाज के बच्चों की पढ़ाई पर सबसे ज्यादा असर’

सपा प्रमुख ने कहा कि सरकारी प्राथमिक विद्यालयों में पढ़ने वाले अधिकांश विद्यार्थी अन्य पिछड़ा वर्ग, अनुसूचित जाति और अल्पसंख्यक समुदाय से आते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार नहीं चाहती कि पीडीए समाज के बच्चों को अच्छी शिक्षा मिले। उनका दावा है कि वर्ष 2017 में सरकारी प्राथमिक विद्यालयों में करीब 1.17 करोड़ विद्यार्थी नामांकित थे, जबकि वर्ष 2026 में यह संख्या घटकर करीब 89 लाख रह गई। इनमें लगभग 25 लाख विद्यार्थी अन्य पिछड़ा वर्ग, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति वर्ग से हैं।

’81 हजार शिक्षक पद खाली’

अखिलेश यादव ने कहा कि वर्ष 2017 में सरकारी प्राथमिक विद्यालयों में करीब 4 लाख शिक्षक कार्यरत थे, लेकिन अब उनकी संख्या घटकर करीब 3.40 लाख रह गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश में करीब 81 हजार शिक्षकों के पद रिक्त हैं, लेकिन सरकार नई भर्ती नहीं कर रही। उन्होंने कहा कि सरकार स्थायी सरकारी नौकरियां देने से बच रही है, क्योंकि नियमित भर्ती होने पर बजट का प्रावधान करना पड़ेगा और आरक्षण व्यवस्था का पालन भी करना होगा।

‘छात्राओं की पढ़ाई भी प्रभावित’

सपा अध्यक्ष ने दावा किया कि विद्यालय बंद होने का सबसे अधिक असर छात्राओं की शिक्षा पर पड़ा है। उनके अनुसार, मार्च 2017 में सरकारी प्राथमिक विद्यालयों में 61.57 लाख छात्राएं पढ़ रही थीं, जबकि अब यह संख्या घटकर करीब 45 लाख रह गई है।

‘हजारों स्कूलों में मूलभूत सुविधाओं की कमी’

अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि प्रदेश के हजारों सरकारी विद्यालय अब भी बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं। उनके अनुसार, करीब 7 हजार विद्यालयों में बिजली नहीं है, 2,300 से अधिक स्कूलों में छात्राओं के लिए शौचालय नहीं हैं, 576 विद्यालयों में पेयजल की सुविधा नहीं है और लगभग 23 हजार विद्यालयों में कंप्यूटर शिक्षा की व्यवस्था नहीं है। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी विधानसभा के मानसून सत्र में स्कूल बंद होने, घटते नामांकन, शिक्षकों के रिक्त पद और विद्यालयों में बुनियादी सुविधाओं की कमी का मुद्दा मजबूती से उठाएगी।

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