होर्मुज स्ट्रेट पर बढ़ा तनाव: अमेरिका ने जहाजों को चेताया, भारत ने भारतीय नाविकों की मौत पर जताई कड़ी नाराजगी
CENTRAL NEWS DESK: मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच होर्मुज स्ट्रेट को लेकर अमेरिका और भारत के बीच हाई-लेवल डिप्लोमैटिक बातचीत हुई है। अमेरिकी सेक्रेटरी ऑफ स्टेट मार्को रुबियो और भारतीय एक्सटर्नल अफेयर्स मिनिस्टर एस. जयशंकर ने टेलीफोन पर बातचीत कर रीजनल सिक्योरिटी, मरीन ट्रेड रूट्स और हालिया मिलिट्री डेवलपमेंट्स पर चर्चा की। बातचीत के दौरान रुबियो ने कहा कि होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले सभी कमर्शियल शिप्स को अमेरिकी नेवी और सिक्योरिटी फोर्सेज के निर्देशों का पालन करना होगा। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में सिक्योरिटी रिस्क बढ़ने के कारण मॉनिटरिंग और सर्विलांस को और मजबूत किया गया है।
‘निर्देशों की अनदेखी करने वाले जहाजों पर होगा एक्शन’
मार्को रुबियो ने बातचीत के दौरान स्पष्ट किया कि होर्मुज स्ट्रेट केवल एक समुद्री मार्ग नहीं बल्कि वैश्विक एनर्जी सप्लाई की जीवनरेखा है। दुनिया भर में सप्लाई होने वाले कच्चे तेल और एलएनजी का बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से होकर गुजरता है। ऐसे में यहां किसी भी प्रकार की अस्थिरता या सुरक्षा जोखिम पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर सकता है।
रुबियो ने कहा कि अमेरिका उन सभी कमर्शियल वेसल्स पर कड़ी नजर रख रहा है जो ईरानी ऑयल ट्रांसपोर्ट, प्रतिबंधित कार्गो या अमेरिकी सैंक्शंस के उल्लंघन से जुड़े हो सकते हैं। उन्होंने दो टूक कहा कि यदि कोई जहाज अमेरिकी ब्लॉकेड को तोड़ने या प्रतिबंधित गतिविधियों में शामिल पाया गया तो उसके खिलाफ तत्काल और सख्त एक्शन लिया जाएगा। अमेरिका का मानना है कि वर्तमान परिस्थितियों में मरीन रूट्स की सुरक्षा सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है ताकि वैश्विक व्यापार और एनर्जी सप्लाई प्रभावित न हो।

भारत ने उठाया भारतीय सीफेरर्स की मौत का मुद्दा
बातचीत के दौरान विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने हालिया अमेरिकी नेवल ऑपरेशन में तीन भारतीय सीफेरर्स की मौत का मुद्दा मजबूती से उठाया। उन्होंने इस घटना पर गहरा दुख और नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों पर काम कर रहे निर्दोष नाविकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। जयशंकर ने अमेरिकी पक्ष से कहा कि कमर्शियल शिप्स पर किसी भी प्रकार की सैन्य कार्रवाई बेहद गंभीर मामला है। उन्होंने इस घटना की निष्पक्ष इनक्वायरी कराने और पूरी ट्रांसपेरेंसी के साथ तथ्य सामने लाने की मांग की।
भारत ने स्पष्ट किया कि अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में काम कर रहे नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना सभी देशों की सामूहिक जिम्मेदारी है। ऐसे मामलों में जवाबदेही तय होना आवश्यक है ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाएं दोबारा न हों।
भारत के लिए रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण है होर्मुज स्ट्रेट
होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे व्यस्त और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण मरीन कॉरिडोर्स में गिना जाता है। यह फारस की खाड़ी को अरब सागर और हिंद महासागर से जोड़ता है। दुनिया के कुल समुद्री तेल व्यापार का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से होकर गुजरता है। भारत अपनी कुल ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से आयात करता है। इसलिए इस क्षेत्र में किसी भी प्रकार का तनाव नई दिल्ली के लिए चिंता का विषय बन जाता है। यदि होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की आवाजाही प्रभावित होती है तो इसका सीधा असर भारत की एनर्जी सिक्योरिटी, तेल आयात और घरेलू बाजार पर पड़ सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर क्षेत्र में तनाव और बढ़ता है तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आ सकता है। इसका असर महंगाई, ट्रांसपोर्ट कॉस्ट और वैश्विक सप्लाई चेन पर भी दिखाई देगा।
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव से चिंतित दुनिया
पिछले कुछ समय से मिडिल ईस्ट में सैन्य गतिविधियां बढ़ी हैं। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने पूरे क्षेत्र की स्थिरता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। कई देशों ने अपने कमर्शियल शिप्स के लिए एडवाइजरी जारी की है और समुद्री मार्गों पर अतिरिक्त सुरक्षा इंतजाम किए हैं। अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों का कहना है कि यदि स्थिति और बिगड़ती है तो इसका असर केवल क्षेत्रीय राजनीति तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वैश्विक व्यापार, वित्तीय बाजारों और एनर्जी सेक्टर पर भी दिखाई देगा।
डिप्लोमेसी और डायलॉग पर भारत का जोर
एस. जयशंकर ने बातचीत के दौरान दोहराया कि भारत हमेशा डायलॉग, डिप्लोमेसी और शांतिपूर्ण समाधान का समर्थक रहा है। उन्होंने सभी पक्षों से संयम बरतने और तनाव कम करने की दिशा में काम करने की अपील की। भारत का मानना है कि किसी भी सैन्य टकराव का असर केवल संबंधित देशों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पूरी दुनिया को उसकी कीमत चुकानी पड़ती है। इसलिए सभी पक्षों को जिम्मेदारी और परिपक्वता के साथ कदम उठाने चाहिए।
वैश्विक बाजारों की नजर होर्मुज स्ट्रेट पर
अमेरिका की नई चेतावनी और भारत की कड़ी प्रतिक्रिया के बाद पूरी दुनिया की नजर अब होर्मुज स्ट्रेट पर टिकी हुई है। अंतरराष्ट्रीय बाजार इस क्षेत्र के हर घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं। यदि तनाव और बढ़ता है तो तेल की कीमतों में उछाल, शिपिंग लागत में वृद्धि और वैश्विक व्यापार में बाधा जैसी चुनौतियां सामने आ सकती हैं।
फिलहाल भारत और अमेरिका के बीच हुई यह उच्चस्तरीय बातचीत स्थिति को संभालने और समुद्री सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। हालांकि आने वाले दिनों में मिडिल ईस्ट के हालात किस दिशा में जाते हैं, यह वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था दोनों के लिए बेहद अहम साबित होगा।
Avneesh Mishra is a young and energetic journalist. He keeps a keen eye on sports, politics and foreign affairs. Avneesh has done Post Graduate Diploma in TV Journalism.
