बिना नेटवर्क भी नहीं रुकी बातचीत, NEET प्रदर्शन में ‘गूंज’ ऐप बना चर्चा का विषय

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CENTRAL NEWS DESK: नीट छात्र आंदोलन के दौरान इंटरनेट और मोबाइल नेटवर्क बाधित होने की आशंका के बीच एक मोबाइल ऐप ‘गूंज’ अचानक चर्चा का विषय बन गया। दावा किया जा रहा है कि प्रदर्शन के दौरान इस ऐप को 65 हजार से अधिक बार डाउनलोड किया गया, क्योंकि यह बिना इंटरनेट और बिना मोबाइल नेटवर्क के भी सीमित दूरी तक संदेश भेजने की सुविधा देता है।

जानकारी के अनुसार, गूंज ऐप मेश नेटवर्किंग तकनीक पर आधारित है। इसमें यदि आसपास मौजूद कई लोगों के मोबाइल में यह ऐप इंस्टॉल हो, तो फोन ब्लूटूथ और वाई-फाई डायरेक्ट के जरिए आपस में जुड़कर एक नेटवर्क बना लेते हैं। इस व्यवस्था में संदेश एक फोन से दूसरे फोन तक पहुंचते हुए आगे बढ़ता है। ऐसे में इंटरनेट उपलब्ध न होने पर भी सीमित दूरी तक संचार संभव हो जाता है।

प्रदर्शनकारियों ने क्यों किया डाउनलोड

इंटरनेट सेवाएं बाधित होने की आशंका के बीच कई प्रदर्शनकारियों ने ऑफलाइन संचार बनाए रखने के लिए इस तरह के ऐप डाउनलोड किए। सोशल मीडिया पर भी ऑफलाइन मैप, ऑफलाइन चैट और आपातकालीन संचार से जुड़ी गाइड तेजी से साझा की गईं।

65 हजार डाउनलोड के दावे की पुष्टि नहीं

हालांकि, 65 हजार इंस्टॉल का दावा सोशल मीडिया और विभिन्न रिपोर्टों में सामने आया है, लेकिन इसकी अब तक कोई आधिकारिक सरकारी पुष्टि नहीं हुई है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे ऐप इंटरनेट का पूर्ण विकल्प नहीं हैं। इनकी रेंज सीमित होती है और ये तभी काम करते हैं, जब आसपास मौजूद अन्य लोगों के मोबाइल में भी वही ऐप इंस्टॉल हो।

तकनीक को लेकर नई बहस

नीट छात्र आंदोलन ने केवल सड़क पर ही नहीं, बल्कि तकनीक की दुनिया में भी नई बहस छेड़ दी है। अब यह सवाल उठ रहा है कि यदि इंटरनेट सेवाएं बंद हो जाएं, तो लोग एक-दूसरे से जुड़े रहने के लिए किन वैकल्पिक तकनीकों का इस्तेमाल कर सकते हैं।

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