खाने की थाली बन रही मौत की वजह, खराब फूड से हर साल 15 लाख लोगों की मौत, छोटे बच्चों पर सबसे बड़ा खतरा
CENTRAL NEWS DESK( अवनीश मिश्रा): जिस भोजन को जीवन का आधार माना जाता है, वही अब दुनिया भर में लाखों लोगों की बीमारी और मौत का कारण बनता जा रहा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की नई रिपोर्ट ने फूड सेफ्टी को लेकर बेहद चिंताजनक तस्वीर पेश की है। रिपोर्ट के अनुसार, दूषित और असुरक्षित भोजन के कारण हर साल करोड़ों लोग बीमार पड़ रहे हैं, जबकि लाखों लोगों की जान जा रही है। सबसे अधिक चिंता की बात यह है कि इस संकट का सबसे बड़ा असर पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चों पर पड़ रहा है।
डब्ल्यूएचओ के मुताबिक दुनिया की कुल आबादी में छोटे बच्चों की हिस्सेदारी केवल 9 प्रतिशत है, लेकिन फूड बॉर्न डिजीज यानी भोजन से फैलने वाली बीमारियों के लगभग एक-तिहाई मामले इन्हीं बच्चों से जुड़े हैं। यह स्थिति वैश्विक स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती बन चुकी है।
छोटे बच्चों पर क्यों मंडरा रहा सबसे बड़ा खतरा
विशेषज्ञों का कहना है कि पांच साल से कम उम्र के बच्चों का इम्यून सिस्टम पूरी तरह विकसित नहीं होता है। ऐसे में भोजन में मौजूद बैक्टीरिया, वायरस और परजीवी उनके शरीर पर तेजी से हमला कर देते हैं। यही कारण है कि वयस्कों की तुलना में छोटे बच्चों में फूड बॉर्न डिजीज का खतरा लगभग तीन गुना अधिक पाया गया है।
रिपोर्ट के अनुसार, दूषित भोजन के कारण होने वाली अधिकांश बीमारियां डायरिया से जुड़ी होती हैं। डायरिया बच्चों के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकता है क्योंकि इससे शरीर में पानी और आवश्यक पोषक तत्वों की भारी कमी हो जाती है। समय पर इलाज न मिलने की स्थिति में यह जानलेवा भी बन सकता है।

वर्ष 2021 में 86 करोड़ से अधिक लोग हुए बीमार
डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट के आंकड़े स्थिति की गंभीरता को स्पष्ट करते हैं। वर्ष 2021 में खराब भोजन के कारण दुनिया भर में लगभग 86.6 करोड़ लोग बीमार पड़े। इनमें से करीब 15 लाख लोगों की मौत हो गई।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि इन मौतों और बीमारियों का बड़ा हिस्सा रोका जा सकता था। यदि लोगों को स्वच्छ पानी उपलब्ध कराया जाए, भोजन को सही तरीके से पकाया और सुरक्षित तरीके से संग्रहित किया जाए तथा साफ-सफाई के नियमों का पालन किया जाए, तो इस समस्या को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।
सिर्फ बैक्टीरिया ही नहीं, केमिकल भी बन रहे जानलेवा
आमतौर पर लोग मानते हैं कि खराब भोजन का मतलब केवल बैक्टीरिया या वायरस से संक्रमित खाना होता है। लेकिन डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट ने एक और गंभीर खतरे की ओर ध्यान आकर्षित किया है। रिपोर्ट के अनुसार, भोजन में मौजूद कई रासायनिक तत्व भी स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक साबित हो रहे हैं। विशेष रूप से सीसा और मिथाइलमरकरी जैसे केमिकल बच्चों के विकसित हो रहे मस्तिष्क को गंभीर नुकसान पहुंचा सकते हैं।
विशेषज्ञों के मुताबिक इन रसायनों के संपर्क में आने से बच्चों की सीखने की क्षमता प्रभावित हो सकती है। इसके अलावा मानसिक विकास में बाधा, व्यवहार संबंधी समस्याएं और तंत्रिका तंत्र से जुड़ी कई गंभीर परेशानियां भी पैदा हो सकती हैं।
केमिकल प्रदूषण बना मौतों का सबसे बड़ा कारण
रिपोर्ट में एक चौंकाने वाला खुलासा यह भी हुआ है कि भोजन से फैलने वाली बीमारियों के अधिकतर मामले भले ही बैक्टीरिया, वायरस और परजीवियों के कारण होते हों, लेकिन मौतों के लिए सबसे अधिक जिम्मेदार केमिकल प्रदूषण है। वर्ष 2021 में फूड बॉर्न डिजीज से हुई कुल मौतों में लगभग 73 प्रतिशत हिस्सेदारी रासायनिक प्रदूषण की रही। इनमें अकार्बनिक आर्सेनिक और सीसा सबसे खतरनाक साबित हुए।
डब्ल्यूएचओ के अनुसार, भोजन में मौजूद अकार्बनिक आर्सेनिक लगभग 42 प्रतिशत मौतों के लिए जिम्मेदार पाया गया, जबकि करीब 31 प्रतिशत मौतों का संबंध सीसे के संपर्क से था।
हार्ट डिजीज, स्ट्रोक और कैंसर का भी बढ़ रहा खतरा
विशेषज्ञों का कहना है कि अकार्बनिक आर्सेनिक और सीसा केवल तत्काल बीमारी का कारण नहीं बनते, बल्कि लंबे समय में कई गंभीर बीमारियों का जोखिम भी बढ़ा देते हैं। इनके लगातार संपर्क में रहने से हार्ट डिजीज, स्ट्रोक, कैंसर और किडनी से जुड़ी समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है। यही वजह है कि स्वास्थ्य एजेंसियां अब खाद्य सुरक्षा के साथ-साथ रासायनिक प्रदूषण की निगरानी पर भी विशेष जोर दे रही हैं।
डब्ल्यूएचओ ने दी वैश्विक चेतावनी
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने स्पष्ट कहा है कि फूड सेफ्टी केवल स्वास्थ्य का मुद्दा नहीं है, बल्कि यह हर परिवार और हर व्यक्ति के दैनिक जीवन से जुड़ा विषय है। संगठन के अनुसार, दूषित भोजन दशकों से सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए चुनौती बना हुआ है, लेकिन नए आंकड़े बताते हैं कि इसका प्रभाव पहले की तुलना में कहीं अधिक व्यापक है। इसका असर न केवल लोगों के स्वास्थ्य पर पड़ रहा है बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था भी इससे प्रभावित हो रही है।
अफ्रीका और दक्षिण-पूर्व एशिया सबसे अधिक प्रभावित
रिपोर्ट में क्षेत्रीय असमानताओं की तस्वीर भी सामने आई है। वर्ष 2000 के बाद से फूड बॉर्न डिजीज का कुल बोझ कुछ कम जरूर हुआ है, लेकिन दुनिया के कुछ हिस्से अब भी गंभीर संकट का सामना कर रहे हैं। अफ्रीका और दक्षिण-पूर्व एशिया वर्तमान में सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्रों में शामिल हैं। दुनिया भर में दर्ज लगभग 75 प्रतिशत फूड बॉर्न डिजीज और करीब 60 प्रतिशत मौतें इन्हीं क्षेत्रों में सामने आई हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि इन क्षेत्रों में स्वच्छ पानी, बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं और खाद्य सुरक्षा मानकों की कमी इस समस्या को और गंभीर बना रही है।
वैश्विक अर्थव्यवस्था को 310 अरब डॉलर का नुकसान
दूषित भोजन का असर केवल स्वास्थ्य तक सीमित नहीं है। इसका आर्थिक प्रभाव भी बेहद व्यापक है। डब्ल्यूएचओ के अनुसार, वर्ष 2021 में फूड बॉर्न बीमारियों के कारण दुनिया को लगभग 310 अरब अमेरिकी डॉलर की उत्पादकता हानि का सामना करना पड़ा। बीमारी की वजह से लाखों लोग काम नहीं कर सके, जिससे उद्योगों, व्यवसायों और राष्ट्रीय अर्थव्यवस्थाओं पर भारी दबाव पड़ा। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि खाद्य सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया जाए तो न केवल लोगों की जान बचाई जा सकती है, बल्कि आर्थिक नुकसान को भी काफी हद तक कम किया जा सकता है।
जलवायु परिवर्तन बढ़ा सकता है संकट
डब्ल्यूएचओ ने भविष्य को लेकर भी चिंता जताई है। संगठन का कहना है कि जलवायु परिवर्तन, पर्यावरण प्रदूषण और एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस जैसी उभरती चुनौतियां आने वाले वर्षों में फूड सेफ्टी के संकट को और बढ़ा सकती हैं। बढ़ता तापमान बैक्टीरिया और अन्य रोगजनकों के तेजी से फैलने में मदद कर सकता है। वहीं एंटीबायोटिक दवाओं के प्रति बढ़ता प्रतिरोध संक्रमण के इलाज को और मुश्किल बना सकता है।
194 देशों में किया गया अध्ययन
रिपोर्ट तैयार करने के लिए वर्ष 2000 से 2021 के बीच 194 देशों के आंकड़ों का विश्लेषण किया गया। इस दौरान 42 प्रमुख खाद्य खतरों का अध्ययन किया गया, जिनमें बैक्टीरिया, वायरस, परजीवी और विभिन्न रासायनिक प्रदूषक शामिल थे। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि देशों के पास बेहतर निगरानी व्यवस्था और सटीक आंकड़े उपलब्ध हों तो वे खाद्य सुरक्षा से जुड़े प्रमुख खतरों की पहचान कर समय रहते प्रभावी कदम उठा सकते हैं।
सुरक्षित भोजन ही बचाव का सबसे बड़ा हथियार
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि फूड बॉर्न डिजीज से बचाव के लिए कुछ सामान्य सावधानियां बेहद प्रभावी साबित हो सकती हैं। भोजन बनाने से पहले और बाद में हाथों की सफाई, स्वच्छ पानी का उपयोग, भोजन को उचित तापमान पर पकाना, कच्चे और पके भोजन को अलग रखना तथा सुरक्षित भंडारण व्यवस्था अपनाना आवश्यक है। विशेषज्ञों के अनुसार, खाद्य सुरक्षा केवल सरकारों या स्वास्थ्य संस्थाओं की जिम्मेदारी नहीं है। इसमें किसानों, खाद्य उद्योग, दुकानदारों और उपभोक्ताओं सभी की महत्वपूर्ण भूमिका है।
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