एक्सक्लूसिव: दिल्ली के सीजेपी प्रदर्शन में प्रदर्शनकारियों पर चली पेलेट गन? घाव और मेडिकल रिपोर्ट ने उठाए बड़े सवाल
प्रोटेस्टर के हाथ में पेलेट गन से हुए हमले के बाद मिले घाव
CENTRAL NEWS DESK: दिल्ली के जंतर-मंतर पर 20 जुलाई को हुए कॉकरोच जनता पार्टी यानी सीजेपी के संसद मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों पर पेलेट गन के इस्तेमाल के आरोपों ने नया विवाद खड़ा कर दिया है। जम्मू-कश्मीर से जुड़ी पेलेट गन के इस्तेमाल का दावा अब दिल्ली के प्रदर्शन को लेकर भी सामने आया है। एक प्रदर्शनकारी ने दावा किया है कि पुलिस कार्रवाई के दौरान उसके शरीर में पेलेट लगीं। उसके मेडिको-लीगल दस्तावेज में भी पेलेट से चोट लगने का उल्लेख होने की बात सामने आई है।
हालांकि, दिल्ली पुलिस और प्रेस इन्फॉर्मेशन ब्यूरो यानी पीआईबी ने प्रदर्शन के दौरान पेलेट गन के इस्तेमाल के आरोपों को पूरी तरह खारिज किया है।
प्रदर्शनकारी का दावा- पुलिसकर्मी ने बंदूक तानी और पेलेट लगी
25 वर्षीय दिल्ली निवासी प्रदर्शनकारी ने पहचान उजागर न करने की शर्त पर बताया कि वह 20 जुलाई को सीजेपी के चलो संसद मार्च में शामिल होने के लिए जंतर-मंतर पहुंचा था। उसका कहना है कि प्रदर्शन के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प शुरू हो गई। पुलिस की ओर से आंसू गैस के गोले छोड़े जा रहे थे और प्रदर्शनकारी अलग-अलग दिशाओं में भाग रहे थे। प्रदर्शनकारी ने दावा किया कि इसी दौरान उसने एक पुलिसकर्मी को उसकी ओर बंदूक तानते हुए देखा। वह भागने की कोशिश करने लगा, लेकिन उसकी पीठ और दाहिनी कोहनी के आसपास पेलेट लगीं। उसने कहा कि अगर उसने समय रहते पुलिसकर्मी को बंदूक तानते हुए नहीं देखा होता और वहां से भागने की कोशिश नहीं की होती, तो शायद पेलेट उसके चेहरे पर लग सकती थीं।

“पहले लगा आंसू गैस का असर है, फिर पीठ में जलन होने लगी”
प्रदर्शनकारी के अनुसार, घटना के तुरंत बाद उसे तेज दर्द महसूस नहीं हुआ। उसका कहना है कि घटनास्थल पर अफरातफरी और एड्रेनालिन के कारण उसे कुछ देर तक समझ ही नहीं आया कि उसके साथ क्या हुआ है। कुछ मिनट बाद उसे ऐसा महसूस हुआ जैसे गर्म धातु उसके शरीर में घुस गई हो। उसने बताया कि उसकी पीठ में तेज जलन होने लगी और खून निकलता दिखाई दिया। इसके बाद वह खुद सफदरजंग अस्पताल पहुंचा, जहां उसका इलाज किया गया। उसके अनुसार, अस्पताल के मेडिकल रिकॉर्ड में पेलेट से चोट लगने का उल्लेख किया गया है।
कई प्रदर्शनकारियों को पेलेट से चोट लगने का दावा
20 जुलाई की घटना के बाद कई प्रदर्शनकारियों ने पेलेट गन से चोट लगने का दावा किया है। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, 25 वर्षीय शेख इरशाद मंसूरी को चेहरे और शरीर के ऊपरी हिस्से में कई पेलेट लगीं। उनके शरीर से कई पेलेट निकाली गईं, लेकिन एक पेलेट गर्दन में एक महत्वपूर्ण रक्त वाहिका के बेहद करीब फंसी होने की बात सामने आई। एक अन्य 25 वर्षीय इरशाद शेख ने बताया कि पेलेट उनके चेहरे, आंख, गाल, नाक, ठुड्डी, गर्दन, कंधे और सीने तक लगीं। वहीं, द हिंदू की रिपोर्ट के अनुसार, 19 वर्षीय एक प्रदर्शनकारी की दाहिनी आंख की रोशनी जाने का खतरा है। उसके परिवार के अनुसार, डॉक्टरों ने आंख की रोशनी वापस आने की संभावना बेहद कम बताई है।
20 जुलाई को क्या हुआ था?
सीजेपी के प्रदर्शनकारियों ने 20 जुलाई को जंतर-मंतर से संसद की ओर मार्च करने की कोशिश की थी। प्रदर्शन के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव हुआ। पुलिस का कहना है कि प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड तोड़ने और कानून-व्यवस्था बिगाड़ने की कोशिश की। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि पुलिस और आरएएफ ने जरूरत से ज्यादा बल का इस्तेमाल किया। इस दौरान लाठीचार्ज और आंसू गैस के इस्तेमाल की बात सामने आई। अब पेलेट गन के इस्तेमाल के आरोपों ने इस पूरे मामले को और गंभीर बना दिया है।

दिल्ली पुलिस ने पेलेट गन के इस्तेमाल से किया इनकार
दिल्ली पुलिस ने सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे पेलेट गन के इस्तेमाल के दावों को पूरी तरह गलत और भ्रामक बताया है। पुलिस का कहना है कि दिल्ली पुलिस के पास पेलेट गन नहीं हैं और चलो संसद मार्च के दौरान पुलिस बल ने पेलेट गन का इस्तेमाल नहीं किया। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि वे बिना पुष्टि वाली जानकारी को सोशल मीडिया पर साझा न करें। पीआईबी के फैक्ट चेक अकाउंट ने भी पेलेट गन के इस्तेमाल से जुड़े सोशल मीडिया दावों को फेक बताया है और लोगों से केवल आधिकारिक स्रोतों पर भरोसा करने की अपील की है।

हाई कोर्ट ने वीडियो सबूत सुरक्षित रखने का दिया आदेश
20 जुलाई की पुलिस कार्रवाई को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को उस दिन की सभी वीडियो रिकॉर्डिंग और अन्य महत्वपूर्ण सबूत सुरक्षित रखने का निर्देश दिया है। ऐसे में प्रदर्शन के दौरान वास्तव में क्या हुआ था, इसका पता लगाने में वीडियो फुटेज और मेडिकल दस्तावेज महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि मेडिकल रिपोर्ट और उनके शरीर पर मिले घाव पेलेट गन के इस्तेमाल की ओर इशारा करते हैं। वहीं, पुलिस लगातार इन आरोपों को खारिज कर रही है।

क्या होती है पेलेट गन
पेलेट गन को भीड़ नियंत्रण के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले कम घातक हथियारों में गिना जाता है। इसमें एक कारतूस से कई छोटे धातु के पेलेट निकलते हैं। एक सामान्य गोली के विपरीत, पेलेट गन से निकलने वाले छोटे धातु के कण एक बड़े क्षेत्र में फैल सकते हैं। भारत में पेलेट गन का इस्तेमाल मुख्य रूप से जम्मू-कश्मीर में भीड़ नियंत्रण के दौरान किए जाने की बात सामने आती रही है। इनके इस्तेमाल को लेकर मानक संचालन प्रक्रिया में कहा गया है कि इसे अंतिम विकल्प के रूप में इस्तेमाल किया जाना चाहिए। इससे पहले बातचीत, चेतावनी, पानी की बौछार और आंसू गैस जैसे विकल्पों का इस्तेमाल किया जाना चाहिए।

पेलेट गन के इस्तेमाल पर विवाद क्यों
पेलेट गन को कम घातक हथियार माना जाता है, लेकिन इनके इस्तेमाल से आंखों और शरीर के अन्य हिस्सों में गंभीर चोट लग सकती है। जम्मू-कश्मीर में पेलेट गन के इस्तेमाल के कारण आंखों की रोशनी जाने और गंभीर चोटों के कई मामले सामने आ चुके हैं। दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन में पेलेट गन के इस्तेमाल का आरोप इसलिए भी गंभीर है क्योंकि यह राजधानी के सबसे महत्वपूर्ण प्रदर्शन स्थलों में से एक है।
अब सामने हैं दो अलग-अलग दावे
इस पूरे मामले में फिलहाल दो अलग-अलग दावे सामने आ रहे हैं।
प्रदर्शनकारियों का दावा:
उन पर पेलेट गन से फायरिंग की गई और कई लोगों को पेलेट से चोट लगी।
दिल्ली पुलिस और पीआईबी का दावा:
प्रदर्शन के दौरान पेलेट गन का इस्तेमाल नहीं किया गया और इससे जुड़े दावे गलत तथा भ्रामक हैं।
अब मेडिकल रिकॉर्ड, वीडियो फुटेज और अन्य सबूतों की जांच से ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि 20 जुलाई को जंतर-मंतर के पास वास्तव में पेलेट गन का इस्तेमाल हुआ था या नहीं। इस मामले में दिल्ली हाई कोर्ट द्वारा वीडियो सबूत सुरक्षित रखने का आदेश दिए जाने के बाद जांच और भी महत्वपूर्ण हो गई है। फिलहाल, पेलेट गन के इस्तेमाल का दावा एक गंभीर आरोप है, जिसकी अंतिम पुष्टि स्वतंत्र जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही हो सकेगी।
Avneesh Mishra is a young and energetic journalist. He keeps a keen eye on sports, politics and foreign affairs. Avneesh has done Post Graduate Diploma in TV Journalism.
