राहुल गांधी के ‘छात्रों की गूंज’ के जवाब में ‘झूठ की गूंज’, वेबसाइट पर 40 दावों का फैक्ट-चेक

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CENTRAL ENWS DESK: राहुल गांधी के ‘छात्रों की गूंज’ अभियान को लेकर सियासी घमासान के बीच एक नई वेबसाइट चर्चा में आ गई है। ‘झूठ की गूंज’ नाम की इस वेबसाइट पर राहुल गांधी के कार्यक्रमों में किए गए दावों की पड़ताल करने का दावा किया जा रहा है। हालांकि, वेबसाइट को किसने बनाया है, इसकी आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।

चार कार्यक्रमों के 40 दावों की पड़ताल का दावा

‘छात्रों की गूंज’ अभियान के तहत राहुल गांधी अब तक चार कार्यक्रम कर चुके हैं। इसके जवाब में बनाई गई वेबसाइट का दावा है कि इन कार्यक्रमों में किए गए करीब 40 दावों की जांच की गई है। वेबसाइट के मुताबिक, इनमें 29 दावे गलत और 11 गुमराह करने वाले पाए गए हैं।

वेबसाइट पर दावा किया गया है कि इसका उद्देश्य राहुल गांधी के बयानों में किए गए दावों को आंकड़ों और उपलब्ध रिपोर्टों के आधार पर जांचना है। हालांकि, इन निष्कर्षों की स्वतंत्र पुष्टि अलग से किया जाना बाकी है।

बीजेपी समर्थकों के बीच वेबसाइट की चर्चा

वेबसाइट सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर इसकी चर्चा तेज हो गई है। इसे बीजेपी समर्थक लोगों का समर्थन मिलने की बात कही जा रही है। हालांकि, बीजेपी ने इस वेबसाइट से किसी भी तरह का संबंध होने से इनकार किया है।

वेबसाइट पर इसके संचालकों या बनाने वाली संस्था का स्पष्ट नाम भी दर्ज नहीं है। सोशल मीडिया पर कुछ यूजर्स इसे ‘राष्ट्रवादी रिसर्चर्स’ और युवा वर्ग से जोड़कर देख रहे हैं, लेकिन इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

रोजगार को लेकर राहुल गांधी के दावे पर उठाए सवाल

‘झूठ की गूंज’ वेबसाइट ने राहुल गांधी के रोजगार से जुड़े एक बयान को भी निशाना बनाया है। वेबसाइट के मुताबिक, राहुल गांधी ने दावा किया था कि नौकरी की तलाश कर रहे 1,000 युवाओं में से करीब 36 लोगों को पक्की नौकरी मिलेगी, जबकि बड़ी संख्या में युवा बेरोजगार या गिग वर्कर बन जाएंगे। वेबसाइट ने इस दावे के जवाब में पीएलएफएस के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा है कि 2025 में 15 से 29 साल की उम्र के हर 100 ग्रेजुएट में से करीब 26 के पास वेतन वाली नौकरी थी।

महिलाओं पर हिंसा के आंकड़े को लेकर भी विवाद

राहुल गांधी के महिलाओं के खिलाफ हिंसा से जुड़े बयान को लेकर भी वेबसाइट ने सवाल उठाए हैं। वेबसाइट का दावा है कि राहुल गांधी ने करीब 29 प्रतिशत महिलाओं के शारीरिक हिंसा का सामना करने की बात कही थी। इसके जवाब में वेबसाइट ने एनएफएचएस के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि पति या साथी द्वारा शारीरिक और यौन हिंसा के मामलों में कमी दर्ज की गई है। वेबसाइट के अनुसार, यह आंकड़ा 2005-06 में 37.2 प्रतिशत से घटकर 2023-24 में 22.3 प्रतिशत हो गया। हालांकि, आंकड़ों की सही व्याख्या और राहुल गांधी के मूल बयान के संदर्भ को समझना जरूरी है, क्योंकि अलग-अलग सर्वे और संकेतक अलग चीजों को माप सकते हैं।

‘छात्रों की गूंज’ बनाम ‘झूठ की गूंज’

राहुल गांधी का ‘छात्रों की गूंज’ अभियान जहां सरकार की नीतियों और युवाओं से जुड़े मुद्दों को लेकर राजनीतिक संदेश देने पर केंद्रित है, वहीं ‘झूठ की गूंज’ वेबसाइट उसी अभियान में किए गए दावों को चुनौती देने की कोशिश कर रही है।

फिलहाल इस वेबसाइट के पीछे कौन लोग हैं, इसे लेकर स्थिति साफ नहीं है। ऐसे में वेबसाइट पर किए गए फैक्ट-चेक को उसके दावों के रूप में ही देखना होगा, जब तक संबंधित आंकड़ों और दावों की स्वतंत्र पुष्टि न हो जाए।

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