रात 12 से सुबह 6 बजे तक इंस्टाग्राम-फेसबुक पर लगेगा ‘डिजिटल कर्फ्यू’! बच्चों के लिए मेटा का बड़ा ट्रायल, जानें क्या बदलेगा
CENTRAL NEWS DESK: आज बच्चों से लेकर बड़ों तक बड़ी संख्या में लोग इंस्टाग्राम और फेसबुक पर घंटों समय बिताते हैं। खासकर टीनएजर्स के बीच देर रात तक सोशल मीडिया इस्तेमाल करना आम हो गया है। इसका असर उनकी नींद और रोजमर्रा की दिनचर्या पर पड़ रहा है। इसी समस्या को देखते हुए मेटा अब अपने प्लेटफॉर्म पर ‘डिजिटल बेडटाइम’ का ट्रायल कर रहा है। इस पहल का मकसद बच्चों और टीनएजर्स को रात में सोशल मीडिया से दूर रखना और उनके स्क्रीन टाइम को कम करना है।
रात 12 बजे से सुबह 6 बजे तक क्या होगा?
मेटा के प्रस्तावित बदलावों के तहत रात 12 बजे से सुबह 6 बजे के बीच इंस्टाग्राम और फेसबुक के इस्तेमाल को सीमित किया जा सकता है। इसके अलावा रात के समय और स्कूल के घंटों के दौरान नोटिफिकेशन भी कम किए जाएंगे। यानी टीनएजर्स को बार-बार फोन देखने या सोशल मीडिया पर वापस आने के लिए मिलने वाले अलर्ट को कम करने की कोशिश होगी।
हालांकि, इसे अभी एक ट्रायल के तौर पर देखा जा रहा है और सभी यूजर्स के लिए यह व्यवस्था लागू होने की बात नहीं है।
बच्चों के पोस्ट पर लाइक और रिएक्शन भी होंगे गायब
मेटा बच्चों और टीनएजर्स के सोशल मीडिया अनुभव में एक और बड़ा बदलाव करने की तैयारी में है। नाबालिग यूजर्स के पोस्ट पर लाइक और रिएक्शन की संख्या छिपाने का विकल्प लाया जाएगा। इसका मकसद बच्चों पर सोशल मीडिया लोकप्रियता का दबाव कम करना है। यानी किस पोस्ट को कितने लाइक मिले या किसे कितने रिएक्शन मिले, इस तरह की तुलना को कम करने की कोशिश की जाएगी।
कॉस्मेटिक सर्जरी वाले फिल्टर पर भी रोक
मेटा नाबालिग यूजर्स के लिए कुछ कॉस्मेटिक सर्जरी से जुड़े फिल्टर पर भी रोक लगाने की तैयारी कर रहा है। ऐसे फिल्टर बच्चों और टीनएजर्स में उनके चेहरे और शरीर को लेकर अवास्तविक उम्मीदें पैदा कर सकते हैं। इसलिए कंपनी बच्चों के लिए ऐसे कंटेंट और फीचर्स को सीमित करने की दिशा में काम कर रही है।
मजबूत होंगे एज चेक और पेरेंटल कंट्रोल
मेटा अपने प्लेटफॉर्म पर एज-अश्योरेंस सिस्टम को भी मजबूत करेगा। इसके साथ ही माता-पिता के लिए उपलब्ध पेरेंटल कंट्रोल को बेहतर बनाने की योजना है। इससे अभिभावकों को बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल पर ज्यादा नियंत्रण और जानकारी मिल सकेगी। मेटा अपने इनफिनिट-स्क्रॉल अनुभव में भी रुकावट डालने की कोशिश करेगा, ताकि यूजर लगातार बिना रुके कंटेंट स्क्रॉल न करता रहे।
टीनएजर्स को मिलेगा नॉन-पर्सनलाइज्ड फीड का विकल्प
मेटा टीनएजर्स के लिए नॉन-पर्सनलाइज्ड फीड का विकल्प भी देने की तैयारी कर रहा है। फिलहाल सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर यूजर को उसकी पसंद और पिछली गतिविधियों के आधार पर कंटेंट दिखाया जाता है। इसका मकसद यूजर को ज्यादा देर तक प्लेटफॉर्म पर बनाए रखना भी होता है। नए विकल्प में टीनएजर्स को ऐसा फीड मिल सकता है जो उनके व्यवहार के आधार पर लगातार पर्सनलाइज्ड नहीं होगा।
जिस चीज से एंगेजमेंट बढ़ता था, उस पर लगाम
सोशल मीडिया कंपनियों का कारोबार काफी हद तक यूजर एंगेजमेंट पर निर्भर करता है। जितना ज्यादा समय लोग प्लेटफॉर्म पर बिताते हैं, उतने ज्यादा विज्ञापन दिखाए जा सकते हैं। ऐसे में रात में नोटिफिकेशन कम करना, इनफिनिट-स्क्रॉल को रोकना और नॉन-पर्सनलाइज्ड फीड का विकल्प देना मेटा की पुरानी रणनीति से अलग दिशा को दिखाता है। अब कंपनी का दावा है कि बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा को ज्यादा महत्व देने की कोशिश की जा रही है।
मेटा पर अरबों डॉलर का दबाव
बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा से जुड़े कानूनी विवादों के बीच मेटा पर अरबों डॉलर का भुगतान करने का दबाव भी है। रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनी से शुरुआत में करीब 12.7 अरब डॉलर के भुगतान की उम्मीद है और कुल रकम कुछ परिस्थितियों में 17.1 अरब डॉलर तक पहुंच सकती है।
भारतीय मुद्रा में यह रकम करीब 1.6 लाख करोड़ रुपये के आसपास बैठती है। मेटा के लिए यह रकम बड़ी जरूर है, लेकिन कंपनी के कारोबार के मुकाबले इसे अलग संदर्भ में देखा जा रहा है। कंपनी ने 2025 में करीब 201 अरब डॉलर के राजस्व की जानकारी दी थी।
29 अमेरिकी राज्यों ने मेटा पर लगाए थे गंभीर आरोप
मेटा के खिलाफ बच्चों और टीनएजर्स की सुरक्षा से जुड़ा मामला 2023 में उस समय बड़ा हो गया था, जब अमेरिका के 29 राज्यों के अटॉर्नी जनरल ने संघीय अदालत में कंपनी के खिलाफ मुकदमा दायर किया। आरोप था कि फेसबुक और इंस्टाग्राम को इस तरह डिजाइन किया गया कि बच्चे और टीनएजर्स इन प्लेटफॉर्म पर ज्यादा से ज्यादा समय बिताते रहें।
राज्यों ने यह भी आरोप लगाया कि मेटा को अपने प्लेटफॉर्म से बच्चों और युवाओं को होने वाले संभावित मानसिक और शारीरिक नुकसान की जानकारी थी, लेकिन कंपनी ने माता-पिता और आम लोगों को इन खतरों के बारे में पर्याप्त जानकारी नहीं दी। इसके अलावा 13 साल से कम उम्र के बच्चों से माता-पिता की उचित सहमति के बिना जानकारी जुटाने को लेकर भी कंपनी पर आरोप लगाए गए।
पूर्व सिक्योरिटी इंजीनियर की गवाही से बढ़ी मुश्किल
मेटा के पूर्व सिक्योरिटी इंजीनियर आर्टुरो बेजार की गवाही ने भी कंपनी के लिए मुश्किलें बढ़ाईं। बेजार ने अदालत में युवाओं को सोशल मीडिया पर होने वाले नुकसानदायक अनुभवों को लेकर अपनी चिंताओं का जिक्र किया। उन्होंने आरोप लगाया कि कंपनी के अंदर सुरक्षा के मुकाबले एंगेजमेंट और ग्रोथ को ज्यादा प्राथमिकता दी जाती थी। उनकी गवाही ने इस सवाल को और बड़ा कर दिया कि सोशल मीडिया कंपनियां बच्चों की सुरक्षा और अपने कारोबार के बीच संतुलन कैसे बनाती हैं।
क्या सच में बदलेगा बच्चों का सोशल मीडिया इस्तेमाल
मेटा के नए बदलाव अगर बड़े स्तर पर लागू होते हैं तो बच्चों और टीनएजर्स के सोशल मीडिया इस्तेमाल का तरीका बदल सकता है। रात में सोशल मीडिया की पहुंच सीमित करना, नोटिफिकेशन कम करना, लाइक की संख्या छिपाना, पेरेंटल कंट्रोल मजबूत करना और नॉन-पर्सनलाइज्ड फीड देना ये सभी कदम बच्चों को लगातार सोशल मीडिया पर सक्रिय रखने वाली आदत को कम करने की कोशिश हैं।
Avneesh Mishra is a young and energetic journalist. He keeps a keen eye on sports, politics and foreign affairs. Avneesh has done Post Graduate Diploma in TV Journalism.
