हिमालय से उतरी ‘मौत की लहर’! नेपाल में 165 की मौत, 1000+ लापता, 177 भारतीय भी शामिल

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ड्रोन से ली गई तस्वीर में नेपाल के त्रिशूली में फ्लैश फ्लड के बाद मलबे और कीचड़ से ढकी संपत्तियां दिखाई दे रही हैं। फोटो: रॉयटर्स

CENTRAL NEWS DESK: नेपाल और चीन की सीमा से लगे हिमालयी इलाके में बुधवार को अचानक आई फ्लैश फ्लड ने देखते ही देखते भारी तबाही मचा दी। पहाड़ों से पानी, बर्फ, चट्टान और मलबे का तेज बहाव घाटियों की तरफ आया और रास्ते में आने वाले घरों, सड़कों, पुलों, गाड़ियों और बिजली परियोजनाओं को अपनी चपेट में ले लिया। नेपाल पुलिस के मुताबिक, बुधवार देर रात तक 165 शव बरामद किए जा चुके थे। वहीं नेपाल में 826 लोगों के लापता होने की जानकारी सामने आई है। इनमें करीब 600 विदेशी नागरिक बताए जा रहे हैं। चीन के तिब्बत क्षेत्र में भी 558 लोगों के लापता होने की खबर है। दोनों तरफ के आंकड़ों को मिलाकर लापता लोगों की संख्या 1000 से ज्यादा हो जाती है।

लापता लोगों में 177 भारतीय, सैकड़ों विदेशी भी गायब

इस प्राकृतिक आपदा ने भारत समेत कई देशों की चिंता बढ़ा दी है। नेपाल में लापता लोगों की सूची में 177 भारतीय नागरिक बताए जा रहे हैं। इसके अलावा अमेरिका के 63, ऑस्ट्रेलिया के 34, ब्रिटेन के 33 और कनाडा के 25 नागरिकों के भी लापता होने की जानकारी सामने आई है। यह इलाका टूरिस्ट, ट्रेकर्स और तीर्थयात्रियों के बीच काफी लोकप्रिय है। बड़ी संख्या में लोग हिमालयी रास्तों से होते हुए तिब्बत स्थित कैलाश मानसरोवर की यात्रा भी करते हैं। यही वजह है कि आपदा के समय इलाके में बड़ी संख्या में विदेशी मौजूद थे।

फ्लैश फ्लड के बाद नेपाल में हाईवे का क्षतिग्रस्त हिस्सा।

पानी की एक दीवार ने मिटा दिए गांव और बाजार

फ्लैश फ्लड का सबसे ज्यादा असर नेपाल के रसुवा जिले और चीन-नेपाल सीमा के आसपास देखने को मिला। भोटेकोशी और आसपास की नदी घाटियों में पानी का बहाव अचानक बेहद तेज हो गया। पानी के साथ आया मलबा इतना भारी था कि कई जगह घर दब गए, वाहन बह गए और सड़कें टूट गईं। सीमा के पास मौजूद बाजार और जरूरी बुनियादी ढांचे को भी भारी नुकसान पहुंचा है। बिजली परियोजनाओं को नुकसान होने से कई इलाकों में बिजली सप्लाई भी प्रभावित हुई। अंतरराष्ट्रीय रेड क्रॉस के अधिकारी डेविड फिशर ने हालात की गंभीरता बताते हुए कहा कि पूरे गांव और बाजार क्षेत्र तक तबाह हो गए हैं।

पहले भूकंप को माना गया वजह, फिर बदल गई पूरी तस्वीर

फ्लैश फ्लड के बाद शुरुआती रिपोर्टों में 4.4 तीव्रता के भूकंप का जिक्र किया गया था। माना गया कि भूकंप के कारण ग्लेशियर का हिस्सा टूट गया और उसके बाद पानी व मलबे का सैलाब आया। लेकिन बाद में अमेरिकी भूगर्भीय सर्वेक्षण यानी यूएसजीएस ने इस बारे में अहम जानकारी दी। यूएसजीएस के अनुसार, जिस 4.4 तीव्रता की घटना को शुरुआत में भूकंप समझा गया था, वह वास्तव में ग्लेशियर की बर्फ और चट्टानों के टूटकर गिरने से पैदा हुआ भूकंपीय झटका था। यानी इलाके में सामान्य अर्थों वाला भूकंप नहीं आया था।

फ्लैश फ्लड से बचे लोगों के हेलिकॉप्टर रेस्क्यू के बाद नेपाली सैनिक। इमेज: नेपाल आर्मी

ग्लेशियर और चट्टानों के टूटने से आया सैलाब?

नेपाल के राष्ट्रीय आपदा प्राधिकरण की शुरुआती जांच में प्लैनेट लैब्स की सैटेलाइट तस्वीरों का भी अध्ययन किया गया। शुरुआती अध्ययन के मुताबिक, बर्फ और चट्टान के बड़े हिस्से के भूस्खलन ने ल्हेंडे नदी में मलबे से भरी बाढ़ को जन्म दिया। यह जगह रसुवागढ़ी के नेपाल-चीन सीमा क्रॉसिंग से करीब 20 किलोमीटर उत्तर-पूर्व में बताई गई है। विशेषज्ञों के मुताबिक हिमालय की खड़ी ढलानें और बेहद ऊबड़-खाबड़ भूगोल ऐसी घटनाओं को और खतरनाक बना देते हैं। पहाड़ से अचानक बर्फ और चट्टान नीचे गिरने पर नदी में पानी और मलबे का स्तर कुछ ही समय में खतरनाक रूप से बढ़ सकता है।

वीडियो में दिखी तबाही की खौफनाक तस्वीर

सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में लोगों को अचानक आई पानी की विशाल लहर से बचने के लिए भागते देखा गया। कई जगह पानी का बहाव इतना तेज था कि भारी ट्रक तक पलट गए। घर, पेड़ और वाहन कीचड़ में दब गए या पानी के साथ बह गए। आपदा से बचने वाले लोगों ने बताया कि उन्हें अचानक तेज आवाज सुनाई दी और कुछ ही क्षणों में पानी और मलबा उनकी तरफ तेजी से बढ़ता दिखाई दिया।

एक स्थानीय मजदूर ने बताया कि वह पानी के तेज बहाव में बह गया था। उसकी जान एक पेड़ पकड़ने की वजह से बची। एक अन्य 68 वर्षीय व्यक्ति ने बताया कि उन्होंने अपनी पत्नी को बचाने की कोशिश की, लेकिन तेज बहाव में वह उनसे अलग हो गईं और अब तक उनका पता नहीं चल पाया है।

एक टूर कंपनी के 47 लोग भी लापता

आपदा के बाद टूर कंपनियों ने भी अपने ग्रुप में शामिल लोगों को लेकर चिंता जताई है। हिमालयन ग्लेशियर नाम की टूर कंपनी के मुताबिक, उसके एक ग्रुप के 47 लोग लापता हैं। इनमें 15 ऑस्ट्रेलियाई, 10 कनाडाई, 9 नेपाली, 8 अमेरिकी, 2 ब्रिटिश, 2 सिंगापुरी और एक रूसी-अमेरिकी दोहरी नागरिकता वाला व्यक्ति शामिल है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि आपदा के वक्त प्रभावित इलाके में विदेशी टूरिस्टों की मौजूदगी कितनी ज्यादा थी।

हेलिकॉप्टर से रेस्क्यू, स्निफर डॉग्स भी लगाए गए

नेपाल सरकार ने बड़े स्तर पर सर्च और रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया है। हेलिकॉप्टरों के जरिए प्रभावित इलाकों में फंसे लोगों को निकालने और राहत सामग्री पहुंचाने की कोशिश की जा रही है। नेपाल सेना और सुरक्षा बलों की टीमें मलबे में दबे लोगों की तलाश कर रही हैं। लापता लोगों की खोज के लिए स्निफर डॉग्स की मदद भी ली जा रही है।

कई इलाकों में सड़कें और पुल टूटने के कारण जमीन के रास्ते राहत दलों का पहुंचना मुश्किल हो गया है। ऐसे में हवाई रेस्क्यू ऑपरेशन बेहद अहम हो गया है।

तिब्बत में भी 558 लोग लापता

नेपाल के अलावा सीमा पार चीन के तिब्बत क्षेत्र में भी फ्लैश फ्लड और मलबे ने भारी नुकसान पहुंचाया है। चीनी सरकारी मीडिया के मुताबिक, तिब्बत की तरफ 558 लोग लापता हैं। इनमें कम से कम 260 विदेशी नागरिक शामिल बताए गए हैं।

चीन ने करीब 800 आपातकालीन कर्मचारियों और 150 वाहनों को राहत अभियान में लगाया है। स्निफर डॉग्स और स्पीडबोट्स की मदद भी ली जा रही है। चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने अधिकारियों को लापता लोगों की तलाश और बचाव के लिए हर संभव प्रयास करने के निर्देश दिए हैं।

यूएन और अमेरिका भी मदद के लिए आगे आए

नेपाल की इस आपदा के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी मदद पहुंचाई जा रही है। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने कहा कि यूएन की टीमें और सहयोगी संगठन नेपाल में प्रभावित लोगों की मदद के लिए राहत सामग्री और कर्मचारियों को जुटा रहे हैं। अमेरिका ने भी नेपाल के लिए 5 लाख डॉलर की आपातकालीन सहायता देने की घोषणा की है। भारत की ओर से भी नेपाल को हर संभव मानवीय और राहत सहायता देने का भरोसा दिया गया है।

अभी टला नहीं है खतरा

हिमालयी इलाके में ऐसी आपदा के बाद खतरा तुरंत खत्म नहीं होता। पहाड़ों पर मौजूद अस्थिर बर्फ, चट्टान और मलबा आगे भी खिसक सकता है। नदियों में अचानक पानी बढ़ने की आशंका भी बनी रहती है। इसी वजह से प्रशासन ने नदी किनारे और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने और जरूरत पड़ने पर सुरक्षित जगहों पर जाने की सलाह दी है। फिलहाल सबसे बड़ी चुनौती 1000 से ज्यादा लापता लोगों की तलाश करना है। जैसे-जैसे रेस्क्यू टीमें दुर्गम इलाकों तक पहुंचेंगी, मृतकों और लापता लोगों का अंतिम आंकड़ा और स्पष्ट होने की उम्मीद है।

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