यूपी 69000 शिक्षक भर्ती: सुप्रीम कोर्ट में ‘दोहरे आरक्षण’ पर बहस तेज, सामान्य वर्ग के शिक्षकों ने रखीं दलीलें

0
images (68)

CENTRAL NEWS DESK: उत्तर प्रदेश की 69 हजार सहायक शिक्षक भर्ती का मामला एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट में चर्चा का केंद्र बना हुआ है। मंगलवार को शीर्ष अदालत में नौकरी कर रहे सामान्य वर्ग के शिक्षकों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता ने पक्ष रखते हुए कहा कि आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों को भर्ती प्रक्रिया में दोहरा लाभ मिला है। वहीं, इस मुद्दे पर आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों ने भी अपनी दलीलें अदालत के समक्ष रखी हैं।

सामान्य वर्ग की क्या है दलील?

सामान्य वर्ग के शिक्षकों की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता शोभा गुप्ता ने इलाहाबाद हाई कोर्ट की खंडपीठ के फैसले का विरोध किया। उन्होंने कहा कि उनके मुवक्किलों का चयन नियमों के तहत हुआ था और हाई कोर्ट का आदेश लागू होने से बड़ी संख्या में कार्यरत शिक्षकों की नौकरी प्रभावित हो सकती है।

उन्होंने अदालत में यह तर्क रखा कि आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों को शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) में आयु सीमा, आवेदन शुल्क और न्यूनतम अंक जैसे मानकों में छूट मिली। इसके बाद सहायक शिक्षक भर्ती की मेरिट तैयार करने में भी उन्हें आरक्षण का लाभ दिया गया। सामान्य वर्ग की ओर से इसे ‘दोहरे लाभ’ का मामला बताया गया।

किस आदेश को चुनौती दी गई है?

सुप्रीम कोर्ट में यह मामला इलाहाबाद हाई कोर्ट की खंडपीठ के 13 अगस्त 2024 के फैसले के खिलाफ दाखिल याचिकाओं पर चल रहा है। हाई कोर्ट ने 69 हजार शिक्षक भर्ती की चयन सूची रद्द करते हुए राज्य सरकार को बेसिक शिक्षा नियमावली, 1981 और आरक्षण नियमावली, 1994 के अनुसार नई मेरिट सूची तैयार करने का निर्देश दिया था। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने प्रारंभिक सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट के आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी थी। इसी वजह से फिलहाल चयनित शिक्षक अपने पदों पर कार्यरत हैं।

नौकरी पर मंडरा सकता है खतरा

सामान्य वर्ग के शिक्षकों की ओर से अदालत में यह भी कहा गया कि यदि हाई कोर्ट का आदेश लागू होता है, तो बड़ी संख्या में कार्यरत शिक्षकों की नौकरी पर असर पड़ सकता है। दूसरी ओर, आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों ने भी मामले में हस्तक्षेप याचिकाएं दाखिल की हैं और उनका कहना है कि भर्ती प्रक्रिया में आरक्षण नियमों का सही पालन होना चाहिए।

बुधवार को भी जारी रहेगी सुनवाई

मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में भर्ती की मेरिट और आरक्षण नियमों को लेकर विस्तार से बहस हुई। न्यायमूर्ति एसवीएन भट्टी और न्यायमूर्ति एनवी अंजारिया की पीठ ने पक्षों की दलीलें सुनीं।

मामले की सुनवाई बुधवार को भी जारी रहेगी। अब सभी की नजरें सुप्रीम कोर्ट के अंतिम फैसले पर टिकी हैं, क्योंकि इसका असर हजारों शिक्षकों और अभ्यर्थियों के भविष्य पर पड़ सकता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You may have missed