लद्दाख की तर्ज पर पश्चिमी यूपी में हाई कोर्ट बेंच की मांग, वकीलों ने सीएम योगी के सामने रखा नियम का हवाला
CENTRAL NEWS DESK: पश्चिमी उत्तर प्रदेश में उच्च न्यायालय की पीठ की मांग एक बार फिर तेज हो गई है। मेरठ में वकीलों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात कर पश्चिमी यूपी में हाई कोर्ट बेंच की स्थापना की मांग उठाई। वकीलों ने इस दौरान हाल ही में लद्दाख में जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख हाई कोर्ट की पीठ के लिए बनाए गए प्रावधान का हवाला देते हुए यूपी में भी इसी तरह की पहल का सुझाव दिया।
मुख्यमंत्री योगी से मुलाकात की कोशिश, प्रशासन ने रोका
मेरठ में भाजपा के सम्मेलन के दौरान पश्चिमी यूपी के वकीलों ने हाई कोर्ट बेंच की मांग को लेकर प्रदर्शन किया। केंद्रीय संघर्ष समिति के बैनर तले वकील मुख्यमंत्री से अपनी बात रखना चाहते थे। रिपोर्ट के मुताबिक, प्रशासन ने पहले प्रतिनिधिमंडल को रोक दिया। बाद में प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सामने अपनी मांग रखी।
वकीलों का कहना था कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश की बड़ी आबादी और लंबित मुकदमों को देखते हुए यहां हाई कोर्ट की पीठ की आवश्यकता लंबे समय से महसूस की जा रही है।
योगी ने कहा- बेंच का गठन उनके अधिकार क्षेत्र में नहीं
वकीलों के प्रतिनिधिमंडल के मुताबिक, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हाई कोर्ट बेंच के गठन को अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर का विषय बताया।
इसके बाद वकीलों ने लद्दाख का उदाहरण देते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार विधानसभा के जरिए प्रस्ताव पारित कर केंद्र सरकार और संबंधित संवैधानिक संस्थाओं के समक्ष अपनी मांग रख सकती है। वकीलों ने मुख्यमंत्री को इस संबंध में नियम लिखकर देने की बात भी कही। रिपोर्ट के अनुसार, मुख्यमंत्री ने उनसे नियम लिखकर देने को कहा।
क्या है राज्य पुनर्गठन अधिनियम, 1956?
वकीलों ने अपनी दलील में राज्य पुनर्गठन अधिनियम, 1956 का हवाला दिया। यह अधिनियम 31 अगस्त 1956 को बनाया गया था और इसका उद्देश्य राज्यों के पुनर्गठन तथा उससे जुड़े विषयों के लिए कानूनी व्यवस्था करना था।
हालांकि, यहां एक महत्वपूर्ण कानूनी अंतर समझना जरूरी है। राज्य पुनर्गठन अधिनियम, 1956 को सीधे ऐसा सामान्य प्रावधान मानना कि राज्य सरकार अपने स्तर पर नया हाई कोर्ट या उसकी पीठ बना सकती है, सही नहीं होगा। संविधान के अनुच्छेद 214 में प्रत्येक राज्य के लिए हाई कोर्ट का प्रावधान है। हाई कोर्ट की संवैधानिक संरचना और अधिकार क्षेत्र से जुड़े विषयों के लिए संविधान तथा संबंधित केंद्रीय कानूनों की भूमिका महत्वपूर्ण है।
इसलिए पश्चिमी यूपी में पीठ की स्थापना के लिए वकीलों द्वारा दिए गए राज्य पुनर्गठन अधिनियम के हवाले को उनकी कानूनी दलील के रूप में देखा जाना चाहिए, न कि पहले से स्थापित कानूनी प्रक्रिया के रूप में।
लद्दाख में वास्तव में क्या हुआ?
लद्दाख का मामला पश्चिमी यूपी की मांग से कुछ अलग है। अगस्त 2026 में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने ‘केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख में जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख हाई कोर्ट की पीठ की बैठक संबंधी विनियमन, 2026’ जारी किया।
यह विनियमन संविधान के अनुच्छेद 240 और जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम, 2019 की धारा 58(2) के तहत बनाया गया। इसके तहत जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख हाई कोर्ट के न्यायाधीश और डिवीजन कोर्ट लद्दाख में भी बैठ सकते हैं।
लद्दाख प्रशासन के अनुसार, यह विनियमन 27 अगस्त 2026 को अधिसूचित हुआ और 5 सितंबर 2026 से प्रभावी हो गया।
लद्दाख और पश्चिमी यूपी के मामले में बड़ा अंतर
लद्दाख में नया स्वतंत्र हाई कोर्ट नहीं बनाया गया है। वहां पहले से मौजूद जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख हाई कोर्ट की पीठ को लद्दाख में बैठने की व्यवस्था की गई है। विनियमन में यह भी स्पष्ट है कि हाई कोर्ट की मुख्य पीठ अपने मौजूदा स्थान पर ही रहेगी, जबकि न्यायाधीश और डिवीजन कोर्ट लद्दाख में निर्धारित स्थान पर बैठ सकते हैं।
यही वजह है कि पश्चिमी यूपी के वकील लद्दाख के उदाहरण को आधार बनाकर यह तर्क दे रहे हैं कि न्यायिक व्यवस्था को क्षेत्र के करीब लाने के लिए पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भी पीठ की व्यवस्था पर विचार किया जा सकता है।
पश्चिमी यूपी में क्यों उठ रही है मांग?
पश्चिमी यूपी में हाई कोर्ट बेंच की मांग कई दशकों पुरानी है। मेरठ के वकीलों के अनुसार पश्चिमी उत्तर प्रदेश के 22 जिलों में बड़ी आबादी रहती है और बड़ी संख्या में मुकदमे लंबित हैं। उनका तर्क है कि इलाहाबाद हाई कोर्ट तक पहुंचने में पश्चिमी यूपी के लोगों को लंबी दूरी तय करनी पड़ती है।
50 साल से चल रही है मांग
वकीलों का कहना है कि पश्चिमी यूपी में हाई कोर्ट बेंच की मांग करीब पांच दशक से उठती रही है। समय-समय पर मेरठ और आसपास के जिलों में अधिवक्ताओं ने आंदोलन और प्रदर्शन भी किए हैं।
अब लद्दाख में हाई कोर्ट की पीठ के लिए नए कानूनी प्रावधान के बाद पश्चिमी यूपी के वकीलों ने इस उदाहरण को अपनी मांग से जोड़ते हुए फिर से मुद्दा उठाया है।
क्या यूपी में भी लद्दाख जैसा रास्ता संभव है?
यह सवाल कानूनी प्रक्रिया से जुड़ा है और इसका सीधा जवाब केवल राज्य विधानसभा के प्रस्ताव से हाई कोर्ट बेंच बन जाने के रूप में नहीं दिया जा सकता। लद्दाख की व्यवस्था विशेष संवैधानिक और कानूनी प्रावधानों के तहत बनी है अनुच्छेद 240 और जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम, 2019 की धारा 58(2) इसके आधार हैं।
इसलिए पश्चिमी यूपी के मामले में भी यह देखना होगा कि मौजूदा संवैधानिक व्यवस्था, हाई कोर्ट की शक्तियां, केंद्र सरकार की भूमिका और न्यायपालिका से संबंधित प्रावधान किस प्रकार लागू होते हैं।
Avneesh Mishra is a young and energetic journalist. He keeps a keen eye on sports, politics and foreign affairs. Avneesh has done Post Graduate Diploma in TV Journalism.
