2047 में विकसित भारत का सपना, लेकिन ग्राउंड रियलिटी क्या है? GDP की रफ्तार तेज, अब असली टेस्ट बाकी!
CENTRAL NEWS DESK: भारत को 2047 तक विकसित देश बनाने का विजन चर्चा में है। सरकार का फोकस इकोनॉमी को बूस्ट देने, इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत करने और भारत को ग्लोबल लेवल पर पावरफुल बनाने पर है। लेकिन यहां एक बड़ा सवाल है, क्या देश की तेज ग्रोथ का फायदा आम लोगों की लाइफ में भी दिख रहा है?
सीधे शब्दों में कहें तो भारत का इकोनॉमिक ग्राफ ऊपर जा रहा है, लेकिन विकसित देश बनने का असली टेस्ट सिर्फ जीडीपी नहीं, बल्कि लोगों की इनकम, जॉब सिक्योरिटी, एजुकेशन और हेल्थकेयर भी है।
GDP की ग्रोथ दमदार, लेकिन पिक्चर अभी बाकी है
सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के 5 जून 2026 को जारी अनंतिम अनुमानों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025-26 में भारत की रियल जीडीपी ग्रोथ 7.7 प्रतिशत रही। इससे पहले 2024-25 में यह दर 7.1 प्रतिशत अनुमानित थी।
यह आंकड़ा बताता है कि भारतीय इकोनॉमी अच्छी स्पीड से आगे बढ़ रही है। इंफ्रास्ट्रक्चर, डिजिटल सर्विसेज, मैन्युफैक्चरिंग और कंजम्पशन जैसे सेक्टर इसमें अहम भूमिका निभाते हैं। लेकिन यहां ट्विस्ट है। देश की टोटल इकोनॉमी बड़ी होने का मतलब यह नहीं कि हर नागरिक की जेब भी उसी रफ्तार से मजबूत हो रही है। असली सवाल है कि ग्रोथ का फायदा कितने लोगों तक पहुंच रहा है और उनकी लाइफ कितनी अफोर्डेबल बन रही है।
Human Development Index में भारत का क्या स्टेटस है?
यूनाइटेड नेशंस डेवलपमेंट प्रोग्राम यानी UNDP की ह्यूमन डेवलपमेंट रिपोर्ट 2025 के मुताबिक, भारत 193 देशों में 130वें स्थान पर रहा। रिपोर्ट में वर्ष 2023 के लिए भारत का ह्यूमन डेवलपमेंट इंडेक्स यानी HDI स्कोर 0.685 दर्ज किया गया। HDI केवल पैसा नहीं देखता। इसमें लाइफ एक्सपेक्टेंसी, एजुकेशन और प्रति व्यक्ति राष्ट्रीय आय जैसे फैक्टर्स शामिल होते हैं। 0.700 से कम स्कोर के साथ भारत अभी मीडियम ह्यूमन डेवलपमेंट कैटेगरी में है।
इसका मतलब साफ है इकोनॉमी आगे बढ़ रही है, लेकिन लोगों की हेल्थ, पढ़ाई और जीवन स्तर में सुधार की स्पीड भी बढ़ानी होगी।
युवाओं के लिए सबसे बड़ा सवाल: जॉब कहां और कैसी?
भारत की यूथ पॉपुलेशन उसकी सबसे बड़ी ताकत मानी जाती है। लेकिन इस ताकत को रियल ग्रोथ में बदलने के लिए युवाओं को सिर्फ डिग्री नहीं, बल्कि मार्केट में काम आने वाली स्किल्स भी चाहिए।
पीएलएफएस 2023-24 की रिपोर्ट के मुताबिक, 15 साल और उससे ज्यादा उम्र के लोगों में सामान्य स्थिति के आधार पर बेरोजगारी दर 3.2 प्रतिशत थी। इसी रिपोर्ट में श्रम बल भागीदारी दर 60.1 प्रतिशत दर्ज की गई थी।
हालांकि, ये आंकड़े जुलाई 2023 से जून 2024 के हैं। बेरोजगारी का आंकड़ा अकेले पूरी जॉब मार्केट की तस्वीर नहीं दिखाता। यह भी देखना जरूरी है कि युवाओं को उनकी क्वालिफिकेशन के हिसाब से नौकरी मिल रही है या नहीं, सैलरी कितनी है और रोजगार कितना स्टेबल है।
2047 तक विकसित भारत का सपना पूरा करने के लिए हाई-पेइंग जॉब्स, स्किल डेवलपमेंट, स्टार्टअप्स और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को मजबूत करना होगा।
एजुकेशन और हेल्थ में अपग्रेड के बिना मिशन अधूरा
किसी देश की असली पावर उसके नागरिक होते हैं। अगर एजुकेशन की क्वालिटी बेहतर होगी, रिसर्च को बढ़ावा मिलेगा और हेल्थकेयर अफोर्डेबल होगा, तो देश की प्रोडक्टिविटी भी बढ़ेगी। भारत को स्कूलों में बेसिक लर्निंग मजबूत करने, कॉलेजों में रिसर्च के मौके बढ़ाने और युवाओं को AI, इलेक्ट्रॉनिक्स, सेमीकंडक्टर तथा दूसरी नई टेक्नोलॉजी के लिए तैयार करने की जरूरत है।
हेल्थ सेक्टर में भी केवल बड़े अस्पताल बनाना काफी नहीं होगा। छोटे शहरों और गांवों में डॉक्टर, दवाएं, जांच और सस्ता इलाज आसानी से उपलब्ध होना चाहिए। आखिरकार, इलाज के खर्च से किसी परिवार का बजट बिगड़ना भी आम आदमी की लाइफ क्वालिटी को प्रभावित करता है।
AI, सेमीकंडक्टर और डिजिटल इंडिया से कितना बदलेगा गेम?
फ्यूचर की इकोनॉमी में टेक्नोलॉजी का रोल और बड़ा होने वाला है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, इलेक्ट्रॉनिक्स, सेमीकंडक्टर, क्लीन एनर्जी और एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग भारत के लिए नए अवसर तैयार कर सकते हैं।
लेकिन केवल टेक्नोलॉजी अपनाना काफी नहीं है। भारत को अपनी रिसर्च, इनोवेशन और हाई-टेक प्रोडक्शन कैपेसिटी भी बढ़ानी होगी। इसके साथ युवाओं को नई स्किल्स की ट्रेनिंग देनी होगी, ताकि टेक्नोलॉजी के कारण पुराने काम बदलने पर उनके पास नए अवसर मौजूद रहें।
विकसित भारत का मतलब सिर्फ स्मार्ट सिटी नहीं
बड़े एक्सप्रेसवे, हाई-स्पीड ट्रेन और मॉडर्न बिल्डिंग्स डेवलपमेंट की तस्वीर का हिस्सा हैं, लेकिन पूरी तस्वीर नहीं। असली डेवलपमेंट तब होगा, जब गांवों में भी अच्छी सड़कें, साफ पानी, भरोसेमंद बिजली, तेज इंटरनेट, बेहतर स्कूल और हेल्थ सर्विसेज मिलें। छोटे शहरों में भी युवाओं को रोजगार के लिए बार-बार बड़े महानगरों की ओर न भागना पड़े।
इसके साथ प्रदूषण, क्लाइमेट चेंज और प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा पर भी फोकस जरूरी है। ग्रोथ ऐसी होनी चाहिए, जो आज की जरूरतें पूरी करने के साथ आने वाली पीढ़ियों का फ्यूचर भी सुरक्षित रखे।
2047 का मिशन: ग्रोथ से ज्यादा जरूरी उसका फायदा
भारत के पास युवा आबादी, बड़ी मार्केट और टेक्नोलॉजी के जरिए आगे बढ़ने का बड़ा मौका है। लेकिन इस मौके को सक्सेस में बदलने के लिए सरकार, प्राइवेट सेक्टर और एजुकेशन सिस्टम को मिलकर काम करना होगा।
Avneesh Mishra is a young and energetic journalist. He keeps a keen eye on sports, politics and foreign affairs. Avneesh has done Post Graduate Diploma in TV Journalism.
