राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामला: एसआईटी के सामने कैशियर का बड़ा खुलासा, 10 CCTV कैमरों के बीच होती थी नोटों की गिनती

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राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे नए खुलासे सामने आ रहे हैं। अब इस मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम (एसआईटी) के सामने दान गिनने वाले एक कैशियर ने अपना बयान दर्ज कराया है। करीब 30 मिनट तक चली पूछताछ में एसआईटी ने उससे मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था, दान गिनने की पूरी प्रक्रिया, गिरफ्तार आरोपियों के व्यवहार और काउंटिंग सेंटर के संचालन को लेकर विस्तार से सवाल पूछे।

2005 में हुई थी नियुक्ति, दो शिफ्टों में होती थी दान की गिनती

कैशियर ने जांच अधिकारियों को बताया कि उसकी नियुक्ति वर्ष 2005 में इंटरव्यू के माध्यम से हुई थी। वह रोजाना मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए नोटों और सिक्कों की गिनती का काम करता था। उसके अनुसार काउंटिंग सेंटर में दो शिफ्टों में कर्मचारियों की ड्यूटी लगती थी और वह दूसरी शिफ्ट में कार्यरत था।

कड़ी सुरक्षा जांच के बाद ही मिलता था प्रवेश

कैशियर ने बताया कि काउंटिंग सेंटर तक पहुंचने से पहले कर्मचारियों को कई स्तर की सुरक्षा जांच से गुजरना पड़ता था। सबसे पहले मुख्य प्रवेश द्वार पर पुलिस द्वारा तलाशी ली जाती थी। इसके बाद हुंडी कार्यालय में दोबारा जांच होती थी। कर्मचारियों को उपस्थिति दर्ज कराने के बाद मोबाइल फोन और निजी सामान लॉकर में जमा करना अनिवार्य था। विशेष ड्रेस पहनने के बाद ही एसआईएस (SIS) सुरक्षा कर्मी पहचान का मिलान कर काउंटिंग रूम में प्रवेश की अनुमति देते थे। पूरी प्रक्रिया सीसीटीवी कैमरों की निगरानी में रिकॉर्ड होती थी।

10 CCTV कैमरों की निगरानी में होती थी नोटों की गिनती

बयान के मुताबिक दान पात्र छह लोगों की मौजूदगी में खोले जाते थे। लगभग 10×12 फीट के काउंटिंग रूम में करीब 10 सीसीटीवी कैमरे लगे थे, जिनकी निगरानी में नोटों की गिनती की जाती थी। काउंटिंग रूम में ट्रस्ट के अधिकारी, भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के कर्मचारी, सुपरवाइजर और कैशियर समेत करीब 50 लोग दो शिफ्टों में काम करते थे। नोटों की गिनती पूरी होने के बाद रजिस्टर में उसकी एंट्री की जाती थी और फिर बैंक की गाड़ी नकदी लेकर चली जाती थी।

आरोपियों के व्यवहार पर कभी नहीं हुआ शक

एसआईटी की पूछताछ के दौरान कैशियर ने गिरफ्तार आरोपियों के व्यवहार के बारे में भी जानकारी दी। उसने बताया कि सभी आरोपी बेहद शांत स्वभाव के थे। वे किसी से अधिक बातचीत नहीं करते थे और केवल अपने काम तक ही सीमित रहते थे। यही वजह रही कि कभी किसी को उन पर संदेह नहीं हुआ।

उसने यह भी बताया कि गिरफ्तार आरोपी अनुकल्प अक्सर खुद को बड़े ठेकेदार का बेटा बताता था और धार्मिक आयोजनों व राजनीति में अपनी रुचि की बातें किया करता था।

टीनू यादव का नाम लेने पर मिल जाती थी एंट्री

कैशियर ने जांच टीम को एक और अहम जानकारी देते हुए बताया कि गिरफ्तार आरोपी टीनू यादव का नाम लेने पर मंदिर परिसर के कई हिस्सों में बिना किसी रोक-टोक के प्रवेश मिल जाता था। हालांकि उसकी ड्यूटी गर्भगृह में होने के कारण टीनू यादव से उसकी रोजाना मुलाकात नहीं होती थी।

CCTV मॉनिटरिंग में भी सामने आई बड़ी लापरवाही

पूछताछ के दौरान कैशियर ने सुरक्षा व्यवस्था में एक बड़ी खामी की ओर भी इशारा किया। उसके अनुसार जिस कर्मचारी की जिम्मेदारी सीसीटीवी मॉनिटरिंग रूम में बैठकर काउंटिंग सेंटर की निगरानी करने की थी, वह कई बार अपनी सीट से अनुपस्थित रहता था। ऐसे में निगरानी व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।

एसआईटी हर पहलू की कर रही जांच

एसआईटी अब कैशियर के बयान और अन्य कर्मचारियों से मिली जानकारियों के आधार पर पूरे काउंटिंग सिस्टम, सुरक्षा व्यवस्था और आरोपियों की भूमिका की गहराई से जांच कर रही है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि चोरी की वारदात के दौरान सुरक्षा व्यवस्था में कहां-कहां चूक हुई और क्या इस पूरे मामले में किसी अन्य व्यक्ति की भी भूमिका रही है।

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