14,500 पीएम श्री विद्यालय, 27,360 करोड़ रुपये का निवेश… क्या इससे बदल पाएगी सरकारी स्कूलों की तस्वीर?

0
images (6)

सरकारी स्कूलों को आधुनिक बनाने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने वर्ष 2022 में पीएम श्री (प्रधानमंत्री स्कूल्स फॉर राइजिंग इंडिया) योजना शुरू की। इस योजना के तहत देशभर के 14,500 से अधिक सरकारी विद्यालयों को आदर्श विद्यालय के रूप में विकसित किया जा रहा है। सरकार के अनुसार इन विद्यालयों में स्मार्ट कक्षाएं, विज्ञान प्रयोगशालाएं, कौशल आधारित शिक्षा, खेल सुविधाएं और नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप शिक्षण व्यवस्था विकसित की जा रही है। इस योजना पर 27,360 करोड़ रुपये खर्च किए जाने का अनुमान है, जिसमें केंद्र सरकार का बड़ा हिस्सा शामिल है।

हालांकि शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि देश में सरकारी विद्यालयों की कुल संख्या 10 लाख से अधिक है। ऐसे में 14,500 विद्यालयों का आधुनिकीकरण एक महत्वपूर्ण शुरुआत तो है, लेकिन इससे पूरे सरकारी शिक्षा तंत्र की तस्वीर बदलने में अभी समय लगेगा। उनका मानना है कि यदि इस मॉडल को चरणबद्ध तरीके से अन्य विद्यालयों तक भी पहुंचाया जाता है, तभी इसका व्यापक असर देखने को मिलेगा।


83,562 करोड़ रुपये का बजट किया गया पास

केंद्र सरकार ने वर्ष 2026-27 के बजट में स्कूल शिक्षा विभाग के लिए 83,562 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। इसमें समग्र शिक्षा अभियान के लिए 42,100 करोड़ रुपये, पीएम पोषण योजना के लिए 12,750 करोड़ रुपये और पीएम श्री विद्यालय योजना के लिए 7,500 करोड़ रुपये निर्धारित किए गए हैं।

शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि शिक्षा पर लगातार बढ़ता निवेश सकारात्मक संकेत है, लेकिन केवल बजट बढ़ाने से शिक्षा की गुणवत्ता अपने आप नहीं बढ़ती। यदि राशि समय पर विद्यालयों तक नहीं पहुंचे, संसाधनों का प्रभावी उपयोग न हो और बच्चों की सीखने की क्षमता में सुधार दिखाई न दे, तो बड़े बजट का उद्देश्य अधूरा रह जाता है।


एक करोड़ से अधिक शिक्षक, फिर भी सरकारी स्कूलों से घट रहा विद्यार्थियों का भरोसा

यू-डाइस प्लस 2024-25 के अनुसार देश में पहली बार एक करोड़ से अधिक शिक्षक कार्यरत हैं और विद्यालय छोड़ने की दर में भी कमी आई है। इसके बावजूद सरकारी विद्यालयों में विद्यार्थियों के नामांकन में गिरावट दर्ज की गई है। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि बड़ी संख्या में अभिभावक बेहतर शैक्षणिक माहौल, नियमित पढ़ाई और अंग्रेजी माध्यम की उम्मीद में निजी विद्यालयों की ओर रुख कर रहे हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि सरकारी विद्यालयों में आधारभूत सुविधाओं में सुधार हुआ है, लेकिन अब सबसे बड़ी चुनौती अभिभावकों का भरोसा दोबारा मजबूत करना है। इसके लिए केवल भवन और स्मार्ट कक्षाएं पर्याप्त नहीं होंगी, बल्कि पढ़ाई की गुणवत्ता और सीखने के परिणामों में भी स्पष्ट सुधार दिखाना होगा।


सरकारी स्कूलों की असली सफलता बच्चों की सीखने की क्षमता से तय होगी

शिक्षा के क्षेत्र में काम करने वाले विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में सरकारी विद्यालयों की सफलता का सबसे बड़ा पैमाना यह नहीं होगा कि कितने भवन बने या कितना बजट खर्च हुआ। असली सफलता तब मानी जाएगी, जब हर बच्चा अपनी कक्षा के अनुरूप पढ़ने, समझने, लिखने और गणित करने में सक्षम होगा। उनका कहना है कि यदि योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन, प्रशिक्षित शिक्षक, नियमित शैक्षणिक आकलन और विद्यालयों की जवाबदेही सुनिश्चित की जाती है, तभी सरकारी विद्यालय वास्तव में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के केंद्र बन सकेंगे। यही भारतीय शिक्षा व्यवस्था के सामने आने वाले वर्षों की सबसे बड़ी चुनौती भी है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You may have missed