Gen Z ने बदली कमाई की तस्वीर, Millennials से आगे निकली नई पीढ़ी; सैलरी में बड़ा उछाल, लेकिन खतरे भी बरकरार

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CENTRAL NEWS DESK: दुनियाभर में युवाओं की कमाई और करियर को लेकर आई एक नई रिपोर्ट ने चौंकाने वाले आंकड़े सामने रखे हैं। लंबे समय से यह माना जा रहा था कि आर्थिक चुनौतियों, महंगाई और रोजगार संकट के कारण नई पीढ़ी को भी Millennials की तरह संघर्ष करना पड़ेगा, लेकिन ताजा रिपोर्ट इससे अलग तस्वीर पेश करती है। रिसोल्यूशन फाउंडेशन की स्टडी के मुताबिक, Gen Z यानी 1997 से 2012 के बीच जन्मे युवा अपने करियर की शुरुआती दौर में Millennials की तुलना में ज्यादा कमाई कर रहे हैं।

रिपोर्ट बताती है कि 1990 के दशक के आखिर में जन्मे युवाओं की 24 साल की उम्र में मिलने वाली रीयल वीकली पे 1980 के दशक के आखिर में जन्मे Millennials की तुलना में करीब 12 फीसदी ज्यादा है। इतना ही नहीं, शुरुआती 2000 के दशक में जन्मे युवाओं की कमाई 1950 के दशक के बाद की किसी भी पीढ़ी से अधिक दर्ज की गई है।

Millennials क्यों रह गए पीछे?

विशेषज्ञों के अनुसार Millennials की पीढ़ी को सबसे बड़ा झटका 2008 की फाइनेंशियल क्राइसिस से लगा था। इसी दौर में लाखों युवाओं ने अपने करियर की शुरुआत की थी। आर्थिक मंदी के कारण नौकरियों के अवसर कम हुए और रियल वेज ग्रोथ कई वर्षों तक लगभग ठप रही।

यही वजह रही कि Millennials अपने माता-पिता की पीढ़ी की तुलना में बेहतर लिविंग स्टैंडर्ड हासिल नहीं कर सके। कई देशों में घर खरीदना, बचत करना और आर्थिक स्थिरता हासिल करना उनके लिए मुश्किल साबित हुआ।

Gen Z को कैसे मिला फायदा

रिपोर्ट के मुताबिक Gen Z को कई मोर्चों पर फायदा मिला है। सबसे बड़ा कारण मिनिमम वेज में लगातार हुई बढ़ोतरी है। खासकर 2016 के बाद कई देशों में न्यूनतम वेतन बढ़ाया गया, जिसका सीधा लाभ युवाओं को मिला। आंकड़ों के अनुसार सबसे कम वेतन पाने वाले कर्मचारियों की आय 2012 से 2025 के बीच वास्तविक रूप से 36 फीसदी तक बढ़ी है। वहीं 22 से 29 वर्ष आयु वर्ग के कर्मचारियों की प्रति घंटे आय में 15 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई। विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल इकोनॉमी, टेक्नोलॉजी सेक्टर और नए रोजगार अवसरों ने भी Gen Z की आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

रिपोर्ट में चेतावनी भी

हालांकि रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि यह सकारात्मक तस्वीर हमेशा बनी रहे, इसकी कोई गारंटी नहीं है। मध्य-पूर्व में जारी युद्ध, बढ़ती वैश्विक महंगाई, ऊर्जा संकट और धीमी पड़ती आर्थिक वृद्धि आने वाले समय में युवाओं की कमाई पर असर डाल सकती है।\ रिपोर्ट के अनुसार अगर आर्थिक दबाव बढ़ता है तो रियल वेज ग्रोथ फिर से कमजोर पड़ सकती है और Gen Z की मौजूदा बढ़त खतरे में पड़ सकती है।

एक करोड़ नहीं, लेकिन 10 लाख युवा अब भी सिस्टम से बाहर

रिपोर्ट का सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि बड़ी संख्या में युवा अभी भी रोजगार और शिक्षा दोनों से दूर हैं। 16 से 24 वर्ष आयु वर्ग के करीब 10 लाख युवा ऐसे हैं जो न तो किसी नौकरी में हैं, न पढ़ाई कर रहे हैं और न ही किसी ट्रेनिंग प्रोग्राम का हिस्सा हैं। विशेषज्ञों ने इसे NEET Crisis (Not in Employment, Education or Training) बताया है। उनका कहना है कि यदि सरकारों ने समय रहते कदम नहीं उठाए तो आने वाले वर्षों में यह संख्या और बढ़ सकती है।

सरकारों के लिए बड़ा संदेश

रिपोर्ट का निष्कर्ष साफ है कि Gen Z ने कमाई के मामले में उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन किया है। लेकिन रोजगार, कौशल विकास और आर्थिक स्थिरता सुनिश्चित किए बिना इस सफलता को लंबे समय तक बनाए रखना आसान नहीं होगा। विशेषज्ञों का कहना है कि युवाओं को बेहतर स्किल डेवलपमेंट, रोजगार अवसर और आर्थिक सुरक्षा देना आने वाले वर्षों की सबसे बड़ी प्राथमिकता होनी चाहिए। अगर ऐसा नहीं हुआ तो आज की यह सकारात्मक कहानी भविष्य में एक नई चुनौती में बदल सकती है।

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