अमित शाह के जवाब पर सरकार की शर्त, संसद में छात्रों के प्रदर्शन पर चर्चा को लेकर गतिरोध खत्म करने की कोशिश

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CENTRAL NEWS DESK: संसद के मानसून सेशन के खत्म होने में अब सिर्फ दो दिन बचे हैं और लगभग पूरा सेशन हंगामे की भेंट चढ़ चुका है। ऐसे में सरकार ने विपक्ष के साथ गतिरोध खत्म करने की कोशिश तेज कर दी है। छात्रों के प्रदर्शन, अयोध्या राम मंदिर चंदा मामले और एफसीआरए बिल को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच बातचीत चल रही है।

सरकारी सूत्रों के मुताबिक, सरकार केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के जरिए छात्रों के आंदोलन पर जवाब देने के लिए तैयार है, लेकिन इसके लिए कुछ शर्तें रखी गई हैं। सरकार चाहती है कि अमित शाह के जवाब से पहले सदन में इस मुद्दे पर प्रॉपर डिस्कशन यानी विस्तृत चर्चा हो।

अमित शाह के जवाब में पंजाब और झारखंड का भी जिक्र होगा

सरकार ने विपक्ष को साफ कर दिया है कि अगर अमित शाह छात्रों के आंदोलन पर जवाब देते हैं तो इसमें सिर्फ दिल्ली में हुए प्रदर्शन की बात नहीं होगी। विपक्ष शासित पंजाब और झारखंड में हुए छात्र आंदोलनों को भी चर्चा में शामिल किया जाएगा।

सरकारी सूत्रों का कहना है कि सिर्फ गृह मंत्री का बयान देना पर्याप्त नहीं होगा। सरकार चाहती है कि पहले सदन में इस पूरे मुद्दे पर चर्चा हो और उसके बाद अमित शाह सरकार की ओर से जवाब दें। सरकार का तर्क है कि केवल बयान जारी करना महज एक फॉर्मेलिटी होगी। सरकार चाहती है कि संसद में इस विषय पर गंभीर और विस्तृत चर्चा हो।

20 जुलाई से ठप है संसद का कामकाज

20 जुलाई को छात्रों के ‘संसद चलो’ मार्च के दौरान दिल्ली में पुलिस कार्रवाई के बाद से संसद का कामकाज लगातार प्रभावित है। छात्रों का प्रदर्शन कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के नेतृत्व में हुआ था। प्रदर्शनकारी छात्रों ने तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की थी। छात्रों का आरोप था कि परीक्षा पेपर लीक के मामलों में सरकार को जवाब देना चाहिए।

प्रदर्शन के दौरान कई छात्र और पुलिसकर्मी घायल हुए थे। बाद में सामने आए वीडियो और तस्वीरों में कुछ प्रदर्शनकारियों के शरीर पर पेलेट इंजरी के निशान भी दिखाई दिए।

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद भी नहीं थमा विवाद

छात्र आंदोलन के बीच धर्मेंद्र प्रधान ने 30 जुलाई को शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया। हालांकि इसके बाद भी विपक्ष का विरोध खत्म नहीं हुआ। कांग्रेस और दूसरे विपक्षी दलों ने छात्रों के खिलाफ कथित पुलिस कार्रवाई को लेकर सरकार पर सवाल उठाए। विपक्ष की मांग है कि गृह मंत्री अमित शाह संसद में इस मामले पर जवाब दें और बताएं कि 20 जुलाई को छात्रों के खिलाफ हुई कथित फायरिंग का आदेश किसने दिया था।

राहुल गांधी ने रखीं तीन बड़ी मांगें

लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने भी सरकार पर दबाव बढ़ाते हुए कहा है कि अमित शाह को संसद में छात्रों के खिलाफ हुई पुलिस कार्रवाई पर जवाब देना चाहिए। राहुल गांधी ने विशेष रूप से सवाल उठाया है कि 20 जुलाई को छात्रों पर कथित फायरिंग का आदेश किसने दिया था।

इसके अलावा उन्होंने प्रभावित छात्रों से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से माफी मांगने की मांग भी की है।

राहुल गांधी ने अयोध्या के राम मंदिर चंदा चोरी के आरोपों पर भी जवाबदेही की मांग की है। विपक्ष की ओर से इन तीनों मुद्दों को संसद में गतिरोध खत्म करने के लिए ‘नॉन-नेगोशिएबल’ यानी ऐसी मांगें बताया गया है, जिन पर समझौता नहीं किया जाएगा।

एफसीआरए बिल ने बढ़ाई विपक्ष की मुश्किल

छात्र आंदोलन के अलावा एफसीआरए यानी फॉरेन कॉन्ट्रिब्यूशन रेगुलेशन एक्ट से जुड़े बिल को लेकर भी विपक्ष के भीतर मतभेद सामने आए हैं। सरकार इन मुद्दों पर संसद में चर्चा और विधायी कामकाज आगे बढ़ाना चाहती है। वहीं विपक्ष छात्रों पर पुलिस कार्रवाई और राम मंदिर चंदे के मामले पर सरकार से जवाब मांग रहा है।

अब मानसून सेशन के सिर्फ दो दिन बचे हैं। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या सरकार और विपक्ष के बीच सहमति बन पाएगी और क्या अमित शाह के जवाब के बाद संसद का कामकाज सामान्य हो सकेगा?

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