झारखंड विधानसभा गेट के पास छात्रों पर लाठीचार्ज, वाटर कैनन और आंसू गैस; सीएम हेमंत बोले- छात्रों की मांगों पर सरकार गंभीर

0
jharkhand-protests-104929555-16x9_0

CENTRAL NEWS DESK: झारखंड में जेपीएससी और जेएसएससी की भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों को लेकर चल रहा छात्र आंदोलन सोमवार को उस समय और तेज हो गया, जब हजारों प्रदर्शनकारी छात्र विधानसभा के गेट नंबर-1 तक पहुंच गए। छात्रों ने कई स्तर की बैरिकेडिंग पार कर विधानसभा का घेराव किया। उन्हें रोकने के लिए पुलिस ने वाटर कैनन चलाया, आंसू गैस के गोले छोड़े और बाद में लाठीचार्ज किया। इस दौरान कई प्रदर्शनकारियों के घायल होने की खबर है। पुलिस की ओर से भी चार जवानों के घायल होने की जानकारी दी गई है।

आंदोलन के प्रमुख चेहरों में शामिल छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो भी नौ दिन की भूख हड़ताल के बावजूद एंबुलेंस और स्ट्रेचर के जरिए विधानसभा मार्च में पहुंचे। बाद में उनकी तबीयत बिगड़ने पर उन्हें रांची सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनका इलाज इमरजेंसी वार्ड में चल रहा है।

विधानसभा तक कैसे पहुंचे हजारों छात्र?

सोमवार सुबह करीब 10:30 बजे छात्रों का मार्च पुराने विधानसभा परिसर के पास से शुरू हुआ। छात्रों ने विधानसभा की ओर बढ़ते हुए रास्ते में लगाई गई कई बैरिकेडिंग पार कर ली। कुछ बैरिकेडिंग पर कंटीले तार भी लगाए गए थे।

प्रदर्शनकारी छात्रों की मुख्य मांगों में भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों की जांच, विवादित परीक्षाओं को रद्द करना और पूरे मामले की सीबीआई जांच शामिल है। छात्र नेताओं का कहना है कि सरकार के साथ कई दौर की बातचीत के बावजूद उनकी प्रमुख मांगों पर ठोस फैसला नहीं हुआ।

आखिरी बैरिकेडिंग टूटी तो पुलिस ने किया बल प्रयोग

दोपहर बाद प्रदर्शनकारी विधानसभा के गेट के काफी करीब पहुंच गए। पुलिस ने उन्हें रोकने की कोशिश की, लेकिन प्रदर्शनकारी पीछे हटने को तैयार नहीं हुए। इसके बाद पुलिस ने पहले वाटर कैनन का इस्तेमाल किया और फिर आंसू गैस के गोले छोड़े।

इसके बावजूद प्रदर्शन जारी रहने पर पुलिस ने लाठीचार्ज किया। कई छात्र-छात्राओं ने पुलिस कार्रवाई में चोट लगने का दावा किया है। न्यू इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, प्रदर्शनकारियों में महिलाओं के घायल होने के दावे भी सामने आए, जबकि पुलिस अधिकारियों ने कहा कि पथराव के दौरान चार पुलिसकर्मी घायल हुए।

रांची के ग्रामीण एसपी ने पुलिस कार्रवाई को हल्का लाठीचार्ज बताया और कहा कि कुछ प्रदर्शनकारी अंतिम बैरिकेडिंग की ओर बढ़ने की कोशिश कर रहे थे। पुलिस के मुताबिक, इलाके में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा लागू थी।

देवेंद्र नाथ महतो नौ दिन से भूख हड़ताल पर

इस आंदोलन का सबसे प्रमुख चेहरा बने देवेंद्र नाथ महतो पिछले नौ दिनों से भूख हड़ताल पर थे। सोमवार को खराब सेहत के बावजूद वह विधानसभा मार्च में शामिल हुए।

रिपोर्टों के मुताबिक, महतो पहले एंबुलेंस से प्रदर्शन स्थल तक पहुंचे और बाद में स्ट्रेचर पर छात्रों के साथ मार्च में शामिल हुए। उनकी हालत बिगड़ने के बाद उन्हें रांची सदर अस्पताल ले जाया गया। अस्पताल की मेडिकल ऑफिसर नैनी प्रिया के अनुसार, उनका इलाज इमरजेंसी वार्ड में किया जा रहा है।

महतो के सहयोगी ने दावा किया कि विधानसभा के पास पुलिस कार्रवाई के दौरान उन्हें चोट लगी थी। हालांकि, उनकी अस्पताल में भर्ती की मुख्य वजह लंबे समय से चल रही भूख हड़ताल और बिगड़ती तबीयत बताई गई है।

पहले भी डॉक्टरों ने अस्पताल में भर्ती होने की सलाह दी थी

देवेंद्र नाथ महतो की सेहत आंदोलन शुरू होने के बाद लगातार चर्चा में रही है। इससे पहले मेडिकल टीम ने उनकी जांच के बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती होने की सलाह दी थी, लेकिन उन्होंने आंदोलन छोड़ने से इनकार कर दिया था।

रिपोर्टों में उनके ब्लड शुगर के लगातार गिरने की बात भी सामने आई थी। इसके बावजूद वह धरना स्थल पर डटे रहे और छात्रों की मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रखने की बात कहते रहे।

छात्रों की क्या-क्या मांगें हैं?

छात्र नेताओं की प्रमुख मांगों में शामिल हैं—

  • विवादित 14वीं जेपीएससी प्रारंभिक परीक्षा को रद्द किया जाए।
  • जेपीएससी और जेएसएससी की भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों की सीबीआई जांच कराई जाए।
  • परीक्षा में कथित अनियमितताओं के लिए जिम्मेदार अधिकारियों और एजेंसियों पर कार्रवाई हो।
  • भर्ती परीक्षाओं के लिए स्पष्ट और समयबद्ध परीक्षा कैलेंडर जारी किया जाए।
  • परीक्षा के बाद अभ्यर्थियों को ओएमआर शीट की कार्बन कॉपी उपलब्ध कराई जाए।
  • रिजल्ट के साथ कटऑफ और अभ्यर्थियों के प्राप्तांक सार्वजनिक किए जाएं।
  • दागी परीक्षा एजेंसियों को भर्ती परीक्षाओं से दूर रखा जाए।
  • भविष्य की परीक्षाओं के लिए पारदर्शी और भरोसेमंद व्यवस्था बनाई जाए।

सरकार का दावा- 98 फीसदी मांगें मानी गईं

सरकार की ओर से दावा किया गया है कि छात्रों की करीब 98 फीसदी मांगें मान ली गई हैं। सरकार ने 14वीं जेपीएससी परीक्षा तथा कुछ बैकलॉग परीक्षाओं को रद्द करने पर सहमति जताने की बात कही है। वित्तीय गड़बड़ियों की जांच ईडी और आपराधिक मामलों की जांच सीआईडी से कराने की बात भी सामने आई है।

हालांकि छात्र संगठन सरकार के इस दावे से सहमत नहीं हैं। उनका कहना है कि उनकी कई प्रमुख मांगें अब भी पूरी नहीं हुई हैं और सबसे अहम मुद्दा भर्ती परीक्षाओं की कथित गड़बड़ियों की सीबीआई जांच है।

तीन दौर की बातचीत के बाद भी नहीं बनी बात

विधानसभा घेराव से पहले सरकार और छात्र प्रतिनिधियों के बीच बातचीत के तीन दौर हो चुके थे। लेकिन बातचीत में कोई ऐसा समाधान नहीं निकला, जिसे छात्र संगठन अपनी सभी प्रमुख मांगों की स्वीकृति मानते। इसी के बाद छात्रों ने विधानसभा घेराव का फैसला किया। सोमवार को हजारों अभ्यर्थी रांची पहुंचे और विधानसभा की ओर मार्च किया।

आंदोलन की शुरुआत कैसे हुई?

मौजूदा आंदोलन की शुरुआत जुलाई के अंतिम सप्ताह में हुई। छात्रों ने जेपीएससी और जेएसएससी की प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ प्रदर्शन शुरू किया।5 जुलाई को 14वीं जेपीएससी प्रारंभिक परीक्षा का रिजल्ट जारी होने के बाद छात्रों ने कई सवाल उठाए। इसके बाद सोशल मीडिया पर एक कथित ओएमआर शीट भी वायरल हुई, जिसमें एक अभ्यर्थी द्वारा 100 में 48 सवाल हल किए जाने के बावजूद सफल होने का दावा किया गया। हालांकि ऐसे दावों और वायरल सामग्री को लेकर अलग-अलग पक्षों के अपने दावे हैं और इन्हें जांच के निष्कर्ष के रूप में नहीं माना जा सकता।

इसके बाद छात्रों ने आंदोलन तेज किया और 2 अगस्त से देवेंद्र नाथ महतो ने अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू की। आंदोलन धीरे-धीरे राजधानी रांची के बड़े छात्र आंदोलनों में बदल गया।

परीक्षा कराने वाली कंपनी को लेकर भी उठे सवाल

आंदोलन के दौरान परीक्षा कराने वाली एजेंसी टीएसआर डेटा प्रोसेसिंग को लेकर भी छात्रों ने सवाल उठाए। छात्रों का दावा है कि एजेंसी को कुछ अन्य राज्यों में ब्लैकलिस्ट किया जा चुका था। इस मुद्दे को लेकर भी अभ्यर्थियों ने सरकार से जवाब मांगा।

विधानसभा के बाहर अभी भी आंदोलन जारी

पुलिस द्वारा विधानसभा के सामने की सड़क खाली कराए जाने के बावजूद आंदोलन पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। रिपोर्टों के अनुसार, सैकड़ों छात्र विधानसभा से कुछ दूरी पर अलग-अलग समूहों में मौजूद रहे और अपनी मांगों के समर्थन में नारेबाजी करते रहे।

छात्र नेताओं का कहना है कि जब तक उनकी प्रमुख मांगों पर ठोस फैसला नहीं होता, आंदोलन जारी रहेगा। वहीं सरकार की ओर से छात्रों की मांगों पर गंभीरता से विचार करने और बातचीत के जरिए समाधान निकालने का रुख सामने आया है।

पुलिस और छात्रों के दावों में अंतर

इस पूरे घटनाक्रम में एक अहम बात यह है कि पुलिस और प्रदर्शनकारियों के दावे अलग-अलग हैं। छात्रों ने पुलिस पर जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग और लाठीचार्ज का आरोप लगाया है, जबकि पुलिस का कहना है कि बैरिकेडिंग तोड़कर आगे बढ़ रहे प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित करने के लिए कार्रवाई की गई और पथराव में पुलिसकर्मी भी घायल हुए।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You may have missed