बिहार चुनाव 2025 : कांग्रेस ने 89 लाख नाम हटाने की दी शिकायत, चुनाव आयोग ने नियम गिनाकर जताई आपत्ति

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Bihar News Desk: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 से पहले मतदाता सूची को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की जिला कमेटियों ने पिछले 1-2 दिनों में जिला निर्वाचन अधिकारियों को पत्र सौंपकर करीब 89 लाख मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाने की मांग की है। इस कदम ने बिहार की राजनीति में हलचल मचा दी है।

इस मामले पर भारत निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट किया कि कांग्रेस की ओर से दी गई आपत्तियां निर्धारित प्रारूप में नहीं हैं। आयोग ने कहा कि इन आपत्तियों को संबंधित निर्वाचन पंजीयन अधिकारियों (ERO) को अग्रेषित किया जा रहा है, जो कानून के तहत आगे की कार्यवाही करेंगे।


चुनाव आयोग ने बताए नियम

मुख्य चुनाव अधिकारी कार्यालय ने बयान जारी कर कहा कि मतदाता सूची से नाम हटाने की आपत्तियां निर्वाचक पंजीकरण नियम, 1960 के नियम 13 के तहत फॉर्म-7 में या राजनीतिक दलों द्वारा नियुक्त बूथ लेवल एजेंट्स के जरिए लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 31 के अनुसार ही दी जानी चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट ने भी 22 अगस्त 2025 के अपने आदेश में कहा था कि किसी भी पार्टी को गलत नामों की जानकारी केवल निर्धारित प्रपत्र में ही देनी होगी। आयोग ने स्पष्ट किया कि कांग्रेस की आपत्तियां इस प्रक्रिया का पालन नहीं करतीं।

अब जिला निर्वाचन अधिकारी इन्हें ERO को भेज रहे हैं, जहां कांग्रेस जिलाध्यक्षों से शपथ पत्र लेकर नाम हटाने की कार्रवाई पर निर्णय लिया जाएगा।

नाम जोड़ने से ज्यादा हटाने के आवेदन

ड्राफ्ट वोटर लिस्ट पर आए आंकड़े भी इस विवाद को और गहरा रहे हैं। निर्वाचन आयोग को अब तक 128 आवेदन मिले हैं। इनमें से:

  • CPI (ML) ने 118 आवेदन जमा किए हैं, जिनमें 15 नाम जोड़ने और 103 नाम हटाने की मांग शामिल है।
  • RJD ने 10 आवेदन दिए, और सभी नाम जोड़ने के लिए हैं।
  • अन्य दलों ने इस प्रक्रिया में कोई आवेदन नहीं दिया है।

सियासी तकरार तेज

कांग्रेस और राजद सहित पूरा महागठबंधन इसे “वोट चोरी” का मुद्दा बना रहा है। विपक्षी दल चुनाव आयोग के साथ-साथ पीएम नरेंद्र मोदी पर भी हमलावर हैं। वहीं, बीजेपी और एनडीए गठबंधन इसे विपक्ष का चुनावी प्रपंच बता रहा है।

अब सबकी नजर निर्वाचन आयोग के अंतिम फैसले पर है, क्योंकि 89 लाख नाम हटाने की कांग्रेस की मांग से चुनावी गणित पर बड़ा असर पड़ सकता है। यह विवाद चुनाव से पहले बिहार की सियासत को गरमा रहा है।

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