अंबाला में सिख संगठनों और पुलिस के बीच तनाव, गुरसिमरन मंड पर हमले के आरोपियों की रिहाई को लेकर प्रदर्शन

0
images (24)

CENTRAL N EWS DESK: हरियाणा के अंबाला में गुरसिमरन सिंह मंड पर कथित हमले के बाद तनाव बढ़ गया है। मंड, जो इंटरनेशनल एंटी-खालिस्तान फ्रंट के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं, पर 7 अगस्त को पंजोखरा साहिब इलाके में हमला किए जाने का आरोप लगा था। घटना के दौरान उनकी कार में तोड़फोड़ की गई थी। उन्हें बचाने पहुंचे पुलिसकर्मियों समेत चार लोग घायल हुए थे।

घटना के बाद पुलिस ने मामले में कार्रवाई करते हुए अंबाला के दो स्थानीय लोगों को हिरासत में लिया था। हालांकि, बाद में विरोध-प्रदर्शन के बीच दोनों को छोड़ दिया गया। इसके बाद आरोपियों की रिहाई को लेकर विवाद और बढ़ गया।

क्या है पूरा मामला?

रिपोर्टों के मुताबिक, गुरसिमरन सिंह मंड को केंद्रीय अर्धसैनिक सुरक्षा मिली हुई है। 7 अगस्त की शाम पंजोखरा साहिब गांव में कथित तौर पर युवाओं के एक समूह ने उन्हें निशाना बनाया। घटना के दौरान मंड की कार को नुकसान पहुंचाया गया। उन्हें सुरक्षित निकालने के दौरान दो स्थानीय पुलिसकर्मी भी घायल हुए। कुल चार लोगों के घायल होने की जानकारी सामने आई थी। घटना के बाद पुलिस ने जांच शुरू की और दो स्थानीय निवासियों को हिरासत में लिया। लेकिन उनकी हिरासत के बाद स्थानीय स्तर पर विरोध शुरू हो गया और दोनों को बाद में रिहा कर दिया गया।

आरोपियों की रिहाई पर क्यों बढ़ा विवाद?

मंड पर हमले के मामले में आरोपियों की गिरफ्तारी और कार्रवाई की मांग को लेकर समर्थकों और स्थानीय लोगों में नाराजगी बताई जा रही है। दूसरी तरफ, हिरासत में लिए गए लोगों की रिहाई के बाद पुलिस की कार्रवाई पर भी सवाल उठ रहे हैं।

यही विवाद आगे चलकर पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तनाव का कारण बना। प्रदर्शनकारियों की मांग है कि मंड पर कथित हमले में शामिल लोगों के खिलाफ निष्पक्ष जांच हो और दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए।

DSP के घायल होने का दावा

आपके दिए घटनाक्रम में प्रदर्शन के दौरान एक DSP का अंगूठा कटने की बात कही गई है। हालांकि, उपलब्ध प्रमुख और विश्वसनीय रिपोर्टों में मुझे इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं मिली है। इसलिए इस हिस्से को फिलहाल दावे के तौर पर ही देखा जाना चाहिए, न कि पुष्ट तथ्य के रूप में।

पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव की स्थिति में प्रशासन की प्राथमिकता कानून-व्यवस्था बनाए रखना और किसी भी पक्ष को गंभीर नुकसान से बचाना होगी।

मंड पर पहले भी हो चुके हैं हमले और धमकियां

गुरसिमरन सिंह मंड लंबे समय से विवादित राजनीतिक और धार्मिक मुद्दों पर मुखर रहे हैं। उन्हें पहले भी धमकियां मिलने की खबरें सामने आती रही हैं। जून 2026 में चंडीगढ़ के सेक्टर-11 हत्याकांड को लेकर भी मंड ने पुलिस मुख्यालय पहुंचकर आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की थी।

उनकी सुरक्षा को देखते हुए अंबाला की घटना को लेकर सुरक्षा एजेंसियों की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो जाती है।

अब पुलिस के सामने बड़ी चुनौती

अंबाला में मौजूदा विवाद पुलिस के लिए कानून-व्यवस्था के लिहाज से संवेदनशील है। एक तरफ मंड पर कथित हमले की निष्पक्ष जांच और आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग है, तो दूसरी तरफ प्रदर्शन के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच किसी भी तरह के टकराव को रोकना प्रशासन के लिए चुनौती है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You may have missed