उन्नाव जिला अस्पताल की हकीकत: उप मुख्यमंत्री के दावे फेल, मरीज बेहाल

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Unnao News Desk: प्रदेश सरकार और उप मुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री बृजेश पाठक भले ही बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के दावे करते हों, लेकिन जमीनी हकीकत बिल्कुल उलट है। जिला अस्पताल उमा शंकर दीक्षित में मरीजों को न तो सही इलाज मिल पा रहा है और न ही दवाइयां।

अस्पताल में तैनात फिजियोथैरेपी डॉक्टर राजीव अक्सर मरीजों को बिना इलाज लौटाते हैं। मरीजों का कहना है कि डॉक्टर राजीव दोपहर 1 बजे से पहले ही कह देते हैं कि आज फिजियोथैरेपी नहीं होगी, कल आना।” दूर-दराज़ से भूखे-प्यासे अस्पताल पहुंचने वाले मरीज घंटों इंतजार करने के बाद मायूस होकर लौट जाते हैं।

शिकायत करने पर सीएमएस राजीव गुप्ता ने साफ कहा कि फिजियोथैरेपी विभाग उनके अंडर में नहीं आता, बल्कि यह सीएमओ के अधीन है। इतना ही नहीं, उन्होंने यह भी कहा कि अगर ज्यादा दबाव बनाया तो डॉक्टर राजीव नौकरी छोड़कर चले जाएंगे। इससे साफ है कि अस्पताल प्रशासन भी डॉक्टरों की मनमानी रोकने में असमर्थ दिख रहा है।

इतना ही नहीं, कई अन्य डॉक्टर भी समय पर अस्पताल नहीं आते और 2 बजे से पहले ही अस्पताल छोड़ देते हैं। इलाज की व्यवस्था चरमराई हुई है। वहीं मरीजों का आरोप है कि डॉक्टरों और मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव्स (एमआर) की मिलीभगत से मरीजों को बाहर की महंगी दवाइयां लिखी जाती हैं, जिन पर डॉक्टरों को कमीशन मिलता है।

बाहर की दवाएं लिखते पकड़े गए चिकित्सक, सीएमएस ने दी चेतावनी

डॉक्टरों की मनमानी और दवा कंपनियों से मिलीभगत का मामला एक बार फिर सामने आया है। मरीजों का आरोप है कि अस्पताल में मुफ्त मिलने वाली दवाओं के बजाय डॉक्टर जानबूझकर बाहर की महंगी दवाएं लिख रहे हैं। बताया जा रहा है कि मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव (एमआर) डॉक्टरों को गाड़ी और पैसों का लालच देकर महंगी दवाएं लिखने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।

इस लापरवाही की पुष्टि उस समय हुई जब एक चिकित्सक को कैमरे में बाहर की दवाएं लिखते हुए कैद किया गया। वहीं बुखार की एक मरीज ने भी स्वीकार किया कि उसे बाहर से दवाएं खरीदने को कहा गया।

मामले को गंभीरता से लेते हुए अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक (सीएमएस) डॉ. राजीव गुप्ता ने तत्काल बैठक बुलाई और सभी डॉक्टरों को सख्त चेतावनी दी। उन्होंने साफ कहा कि भविष्य में यदि कोई चिकित्सक बाहर की दवाएं लिखता पाया गया या एमआर व दलालों से संबंध रखता है, तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

सूत्रों के अनुसार, डॉक्टर सतेंद्र को इस मामले में नोटिस जारी किया जाएगा। साथ ही, समय पर अस्पताल न आने वाले डॉक्टरों पर भी सीएमएस ने कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।

सरकार की योजनाओं और दावों के बावजूद जिला अस्पताल की हकीकत ये है कि मरीजों को बेहतर इलाज तो दूर, सामान्य सुविधाएं तक नहीं मिल रही हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन इस लापरवाही पर कब सख्ती करेगा।

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