Online Gaming Act 2025: राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद ऑनलाइन गेमिंग विधेयक बना कानून, रियल मनी गेम्स पर पूरी तरह रोक

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Central News Desk: भारत के ऑनलाइन गेमिंग उद्योग में शुक्रवार को बड़ा बदलाव हुआ। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने संसद से पारित ऑनलाइन गेमिंग संवर्धन व विनियमन विधेयक, 2025 को मंजूरी दे दी है। इसके साथ ही यह विधेयक अब कानून बन गया है। इस कानून का सीधा असर उन सभी ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर पड़ा है जहां खिलाड़ी पैसे लगाकर गेम खेलते थे और नकद इनाम जीतने की उम्मीद रखते थे।

नए कानून की बड़ी बातें

  1. रियल मनी गेम्स पर प्रतिबंध –

कोई भी ऑनलाइन गेम जिसमें खिलाड़ी पैसे देकर खेलता है और नकद इनाम पाता है, अब गैरकानूनी है।

इसमें फैंटेसी स्पोर्ट्स, लॉटरी और स्किल-बेस्ड मनी गेम्स भी शामिल हैं।

  1. ई-स्पोर्ट्स और सोशल गेम्स को बढ़ावा –

ई-स्पोर्ट्स को वैध खेल का दर्जा दिया जाएगा।

सरकार ट्रेनिंग अकादमी, रिसर्च और आधिकारिक प्रतियोगिताओं को प्रोत्साहन देगी।

शैक्षिक और सामाजिक गेम्स को पंजीकरण के बाद बढ़ावा मिलेगा।

  1. विज्ञापन और लेन-देन पर रोक –

मनी गेम्स से जुड़े विज्ञापन, प्रमोशन और बैंक/पेमेंट ऐप्स के जरिए लेन-देन प्रतिबंधित रहेंगे।

सख्त दंड का प्रावधान

मनी गेम्स ऑफर करने पर: 3 साल की जेल + ₹1 करोड़ तक का जुर्माना।

विज्ञापन करने पर: 2 साल की जेल + ₹50 लाख जुर्माना।

दोहराने पर: 3-5 साल की जेल + ₹2 करोड़ तक का जुर्माना।

केंद्र सरकार या प्राधिकरण के निर्देश न मानने पर: ₹10 लाख तक का जुर्माना और पंजीकरण रद्द।

यह अपराध गंभीर और गैर-जमानती श्रेणी में रखे गए हैं।

नया प्राधिकरण बनेगा

सरकार एक ऑनलाइन गेमिंग अथॉरिटी स्थापित करेगी, जो:

ऑनलाइन गेम्स को श्रेणीबद्ध और पंजीकृत करेगी।

तय करेगी कि कौन-सा गेम प्रतिबंधित मनी गेम है।

शिकायतों का निपटारा करेगी।

नियमों की निगरानी करेगी।

इसके संचालन के लिए प्रारंभिक लागत ₹50 करोड़ और वार्षिक खर्च ₹20 करोड़ का अनुमान है।

ई-स्पोर्ट्स को मिलेगी मान्यता

सरकार ने पहले ही 2022 में ई-स्पोर्ट्स को मल्टी-स्पोर्ट इवेंट में शामिल कर लिया था।

अब ई-स्पोर्ट्स को आधिकारिक समर्थन मिलेगा।

शतरंज सहित वैश्विक स्तर पर मान्यता प्राप्त खेलों को बढ़ावा दिया जाएगा।

मुंबई में इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ क्रिएटिव टेक्नोलॉजी और STPI के तहत कई सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित किए गए हैं।

उद्योग जगत की चिंताएँ

भारतीय गेमिंग महासंघ (AIGF), ई-गेमिंग महासंघ (EGF) और भारतीय फैंटेसी खेल महासंघ (FIFS) ने इस कानून पर चिंता जताई है।

उनका कहना है कि पूर्ण प्रतिबंध से 400 से अधिक कंपनियां बंद हो सकती हैं। लगभग 2 लाख नौकरियां खत्म होंगी। विदेशी निवेश और निवेशकों का भरोसा भी प्रभावित होगा। उपयोगकर्ता अवैध विदेशी प्लेटफार्मों की ओर जा सकते हैं। भारत का ऑनलाइन गेमिंग उद्योग:

उद्यम मूल्यांकन: ₹2 लाख करोड़ से अधिक।

वार्षिक राजस्व: ₹31,000 करोड़।

कर योगदान: ₹20,000 करोड़ सालाना।

2020 में 36 करोड़ ऑनलाइन गेमर्स → 2024 में 50 करोड़ से अधिक।

जून 2022 तक उद्योग ने ₹25,000 करोड़ का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) आकर्षित किया।

सरकार की दलील

इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सचिव एस. कृष्णन का कहना है:

भारत वैध ई-स्पोर्ट्स और गेम डेवलपमेंट का हब बन सकता है।

सरकार AVGC (Animation, Visual Effects, Gaming & Comics) सेक्टर को मजबूत कर रही है।

इस कदम से युवाओं को सुरक्षित और सकारात्मक गेमिंग का माहौल मिलेगा और अवैध ऑनलाइन जुआ पर रोक लगेगी।

ऑनलाइन गेमिंग एक्ट 2025 ने भारत के डिजिटल गेमिंग परिदृश्य को पूरी तरह बदल दिया है। अब रियल मनी गेम्स इतिहास बन चुके हैं, जबकि ई-स्पोर्ट्स और सोशल गेम्स को नई उड़ान मिलेगी। हालांकि, उद्योग जगत को डर है कि इस प्रतिबंध से भारी आर्थिक और रोजगार संकट खड़ा हो सकता है।

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