‘शरीर बीमार था या जमीर?’ उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के इस्तीफे पर कांग्रेस नेता की टिप्पणी से मचा सियासी बवाल

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Image Credit: BBC

स्वास्थ्य कारण या कुछ और? उपराष्ट्रपति के इस्तीफे के पीछे क्या है असली वजह

Central News Desk: देश के उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के सोमवार शाम अचानक दिए गए इस्तीफे से सियासी हलचल तेज हो गई है। धनखड़ ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को पत्र भेजकर अपने इस्तीफे की जानकारी दी और स्वास्थ्य देखभाल को प्राथमिकता देने का हवाला दिया। लेकिन विपक्ष इसे केवल स्वास्थ्य से जुड़ा मामला नहीं मान रहा।

राजनीतिक कटाक्ष ने गरमाया माहौल
कांग्रेस के प्रवक्ता सुरेंद्र राजपूत ने इस मुद्दे को संवेदनशील मानने की बजाय व्यक्तिगत और नैतिक हमला कर डाला। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा – “शरीर बीमार था या जमीर?” यह बयान सिर्फ उपराष्ट्रपति के स्वास्थ्य पर सवाल नहीं उठाता, बल्कि उनके निर्णय की नैतिकता पर भी सीधा वार करता है। इस तरह की टिप्पणी पर अब भाजपा की ओर से तीखी प्रतिक्रिया की उम्मीद की जा रही है।

कांग्रेस नेताओं की चिंता और अपील
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि इस्तीफा जितना चौंकाने वाला है, उतना ही समझ से परे भी। रमेश ने बताया कि उन्होंने सोमवार शाम साढ़े सात बजे तक धनखड़ से बात की थी और उनके व्यवहार में कोई असामान्यता नहीं दिखी। उन्होंने कहा, “धनखड़ ने कार्य मंत्रणा समिति की बैठक बुलाई थी और मंगलवार को न्यायपालिका से जुड़ी कुछ बड़ी घोषणाएं करने वाले थे।”

प्रधानमंत्री से हस्तक्षेप की मांग
कांग्रेस ने प्रधानमंत्री मोदी से हस्तक्षेप की अपील की है कि वे उपराष्ट्रपति से इस्तीफा वापस लेने को कहें। पार्टी का कहना है कि देशहित में यह आवश्यक है और इससे कृषक समुदाय को राहत भी मिलेगी। वरिष्ठ नेता पी चिदंबरम और भाकपा सांसद पी संदोष कुमार ने भी इस फैसले को अप्रत्याशित बताया है और इसके पीछे किसी गहरे असंतोष की संभावना जताई है।

संसदीय गरिमा पर चोट
विश्लेषकों का मानना है कि उपराष्ट्रपति के इस्तीफे पर सवाल उठाना राजनीतिक रूप से स्वीकार्य हो सकता है, लेकिन जिस भाषा और तरीके से यह किया गया, खासतौर पर ‘शरीर या जमीर’ जैसी टिप्पणी, वह न सिर्फ संवैधानिक गरिमा को ठेस पहुंचाती है बल्कि लोकतांत्रिक मर्यादा पर भी प्रश्नचिन्ह लगाती है।

भविष्य की राजनीति पर पड़ेगा असर
अब सवाल यह है कि क्या धनखड़ वाकई स्वास्थ्य कारणों से पद छोड़ रहे हैं या इसके पीछे कोई राजनीतिक या संवैधानिक असंतोष है? विपक्ष को लगता है कि मामला सिर्फ ‘स्वास्थ्य’ तक सीमित नहीं है। वहीं, भाजपा इस पूरे प्रकरण पर सधी हुई चुप्पी साधे हुए है, लेकिन संसद सत्र में इस पर जबरदस्त हंगामे की आशंका है।

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