राम मंदिर दान घोटाला: ट्रस्ट महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा ने दिया इस्तीफा, एसआईटी जांच के बाद बढ़ा विवाद
CENTRAL NEWS DESK : अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में कथित दान गबन मामले ने अब बड़ा मोड़ ले लिया है। दान में कथित अनियमितताओं को लेकर चल रही जांच के बीच ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा ने नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। सूत्रों के अनुसार दोनों ने शुक्रवार को अपना इस्तीफा सौंप दिया। यह घटनाक्रम उस समय सामने आया है जब विशेष जांच दल (एसआईटी) की प्रारंभिक रिपोर्ट में मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए दान के संग्रह, सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था में गंभीर खामियों की ओर संकेत किया गया है।
SIT की सिफारिश पर दर्ज हुई FIR
दान गबन मामले में एसआईटी की सिफारिश के बाद पहली एफआईआर दर्ज की गई। शिकायत ट्रस्ट के सदस्य कृष्ण मोहन ने दर्ज कराई, जो वर्ष 2025 में दिवंगत ट्रस्टी कामेश्वर चौपाल के निधन के बाद ट्रस्ट में शामिल हुए थे। एफआईआर दर्ज होने के कुछ ही घंटों बाद उत्तर प्रदेश पुलिस ने मामले में नामजद सभी आठ आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।
आठ आरोपी गिरफ्तार
पुलिस ने जिन आरोपियों को गिरफ्तार किया है, उनमें अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, मनीष कुमार यादव, करुणेश पांडेय, रामाशंकर मिश्रा, सुभाष श्रीवास्तव और रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू शामिल हैं। सभी आरोपियों से पूछताछ की जा रही है और कानूनी प्रक्रिया पूरी की जा रही है।

किन धाराओं में दर्ज हुआ मामला
एफआईआर में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत कई गंभीर धाराएं लगाई गई हैं। इनमें चोरी, आपराधिक विश्वासघात, चोरी की संपत्ति छिपाना, आपराधिक साजिश तथा समान उद्देश्य से अपराध करने जैसी धाराएं शामिल हैं।
दान प्रबंधन में मिली कई गंभीर खामियां
सूत्रों के अनुसार एसआईटी की शुरुआती जांच में कई प्रशासनिक और प्रक्रियागत कमियां सामने आई हैं। जांच में पाया गया कि मंदिर के संवेदनशील क्षेत्रों में आने-जाने वाले कर्मचारियों की पर्याप्त जांच नहीं होती थी। सीसीटीवी निगरानी व्यवस्था भी कमजोर पाई गई। इसके अलावा मंदिर से ट्रस्ट कार्यालय और फिर बैंक तक दान राशि पहुंचाने की प्रक्रिया में भी कई अनियमितताएं सामने आईं। एसआईटी यह भी जांच कर रही है कि दान की गिनती में आउटसोर्स कर्मचारियों की नियुक्ति किस प्रक्रिया के तहत की गई थी और उनकी निगरानी कैसे की जाती थी।
सोना-चांदी और बहुमूल्य आभूषणों की भी जांच
जांच एजेंसियां श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए सोने, चांदी, आभूषण और अन्य बहुमूल्य वस्तुओं का रिकॉर्ड भी खंगाल रही हैं। प्रारंभिक जांच में इनकी सूची और दस्तावेजों में कथित विसंगतियां मिलने की बात भी सामने आई है।
“सिर्फ इस्तीफा काफी नहीं”
भाजपा कार्यकर्ता डॉ. रजनीश सिंह, जिन्होंने इस मामले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर जांच की मांग की थी, ने कहा कि केवल इस्तीफा पर्याप्त नहीं है। उन्होंने मांग की कि दोनों पूर्व पदाधिकारियों की भूमिका, संपत्ति और वित्तीय लेन-देन की भी विस्तृत जांच होनी चाहिए। हालांकि यह उनके व्यक्तिगत आरोप हैं और इनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। डॉ. रजनीश सिंह ने कहा कि उनका उद्देश्य किसी व्यक्ति या ट्रस्ट पर आरोप लगाना नहीं, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े इस मामले में पूरी पारदर्शिता सुनिश्चित करना है।
पहले भी सीबीआई और ईडी जांच की उठी थी मांग
डॉ. रजनीश सिंह ने इससे पहले मंदिर के दान में कथित 7 से 7.5 करोड़ रुपये के गबन के आरोपों की सीबीआई या प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) से जांच कराने की मांग भी की थी। उन्होंने 12 जून 2026 को प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर ट्रस्ट की आय, व्यय, बैंक खातों, दान राशि, भूमि खरीद और संपत्तियों का सार्वजनिक विवरण जारी करने की मांग की थी।
राजनीतिक बयानबाजी भी तेज
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इस मामले को लेकर न्यायिक जांच की मांग की है। एफआईआर दर्ज होने के बाद उन्होंने सवाल उठाया कि क्या केवल निचले स्तर के लोगों पर कार्रवाई होगी या जिम्मेदार बड़े अधिकारियों की भी जवाबदेही तय की जाएगी। वहीं राम मंदिर आंदोलन से जुड़े कई वरिष्ठ लोगों ने भी मामले में पूरी पारदर्शिता और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दोहराई जीरो टॉलरेंस नीति
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि सनातन आस्था और श्रद्धालुओं के विश्वास के साथ किसी भी प्रकार का खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि एसआईटी की रिपोर्ट मिलते ही सरकार ने तुरंत कार्रवाई शुरू कर दी। अयोध्या की गरिमा बनाए रखना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
अंतिम रिपोर्ट पर टिकी सबकी नजर
फिलहाल एसआईटी अपनी विस्तृत जांच जारी रखे हुए है और जल्द ही अंतिम रिपोर्ट मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सौंपेगी। माना जा रहा है कि रिपोर्ट आने के बाद ट्रस्ट की कार्यप्रणाली में बड़े प्रशासनिक बदलाव और आगे की कानूनी कार्रवाई हो सकती है। राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए दान से जुड़े इस मामले ने देशभर में व्यापक चर्चा छेड़ दी है। अब सभी की निगाहें एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट और उसके बाद होने वाली सरकारी कार्रवाई पर टिकी हैं।
Avneesh Mishra is a young and energetic journalist. He keeps a keen eye on sports, politics and foreign affairs. Avneesh has done Post Graduate Diploma in TV Journalism.
