नीट में फिर उठे सवाल: आंसर की के हिसाब से 305 अंक, नतीजे में मिले सिर्फ 64; मामला हाई कोर्ट पहुंचा
CENTRAL NEWS DESK: नीट परीक्षा के नतीजों को लेकर एक और गंभीर मामला सामने आया है। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर पीठ में दायर याचिका में एक छात्र ने दावा किया है कि आधिकारिक ओएमआर शीट और आंसर की के आधार पर उसके 305 अंक बनते हैं, लेकिन अंतिम नतीजे में उसे सिर्फ 64 अंक दिए गए। इस तरह छात्र के दावे के मुताबिक उसके संभावित अंकों और घोषित परिणाम के बीच 241 अंकों का बड़ा अंतर है।
झाबुआ के छात्र ने दायर की याचिका
यह याचिका झाबुआ जिले के छात्र लोकेंद्र सिंह खड़िया ने दायर की है। मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति सुबोध अभ्यंकर और आलोक अवस्थी की युगल पीठ कर रही है। हाई कोर्ट ने मामले में राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी यानी एनटीए से स्थिति स्पष्ट करने को कहा है।
पहली बार ओएमआर शीट में दिखे खाली उत्तर
याचिकाकर्ता के अनुसार, 14 जुलाई को एनटीए की ओर से ओएमआर शीट उपलब्ध कराई गई। पहली बार लॉग-इन करने पर भौतिकी और रसायन विज्ञान के सभी उत्तर खाली दिखाई दे रहे थे। छात्र का दावा है कि कुछ समय बाद दोबारा लॉग-इन करने पर दूसरी ओएमआर शीट दिखाई दी, जिसमें उसके उत्तर दर्ज थे।
आंसर की से मिलान पर 305 अंक का दावा
याचिका के अनुसार, दूसरी ओएमआर शीट का आधिकारिक आंसर की से मिलान करने पर छात्र के अंक इस प्रकार बनते हैं
- भौतिकी: 104 अंक
- रसायन विज्ञान: 125 अंक
- जीव विज्ञान: 76 अंक
कुल मिलाकर छात्र के अनुसार उसके 305 अंक बनते हैं। हालांकि, 16 जुलाई 2026 को घोषित अंतिम परिणाम में उसे सिर्फ 64 अंक दिए गए। इसी वजह से छात्र ने परिणाम और मूल्यांकन प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
एनटीए की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
याचिका में इस अंतर को ओएमआर डेटा प्रोसेसिंग, मूल्यांकन प्रणाली या परिणाम तैयार करने की प्रक्रिया में संभावित तकनीकी गड़बड़ी बताया गया है। छात्र का कहना है कि उसने ई-मेल के जरिए एनटीए को शिकायत भी भेजी, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हुआ।
छात्र ने पुनर्मूल्यांकन नहीं, रिकॉर्ड की जांच मांगी
याचिका में साफ कहा गया है कि छात्र सामान्य पुनर्मूल्यांकन की मांग नहीं कर रहा है। उसकी मांग है कि एनटीए की आधिकारिक ओएमआर शीट, आंसर की और मूल्यांकन रिकॉर्ड का स्वतंत्र सत्यापन कराया जाए। यदि आधिकारिक रिकॉर्ड में विसंगति पाई जाती है, तो परिणाम में आवश्यक सुधार किया जाए।
एनटीए की कानूनी स्थिति को भी चुनौती
इस मामले में याचिकाकर्ता ने केवल अपने परिणाम को चुनौती नहीं दी है, बल्कि एनटीए की कानूनी और संवैधानिक स्थिति पर भी सवाल उठाए हैं। याचिका में कहा गया है कि एनटीए संसद द्वारा बनाए गए कानून के तहत गठित वैधानिक संस्था नहीं है, बल्कि सोसायटी पंजीकरण अधिनियम, 1860 के तहत पंजीकृत संस्था है। याचिकाकर्ता ने प्रवेश परीक्षाएं आयोजित करने के एनटीए के अधिकार और उसकी कानूनी स्थिति की न्यायिक समीक्षा की मांग की है।
अब हाई कोर्ट की सुनवाई पर नजर
नीट परीक्षा और परिणामों को लेकर देश के अलग-अलग हिस्सों में पहले से ही सवाल उठ रहे हैं। इसी बीच ओएमआर शीट, आंसर की और अंतिम परिणाम के बीच 241 अंकों के कथित अंतर का मामला हाई कोर्ट पहुंचना एनटीए की परीक्षा प्रणाली के लिए एक और बड़ी चुनौती है। अब मामले में एनटीए की ओर से दी जाने वाली सफाई बेहद महत्वपूर्ण होगी। हाई कोर्ट यह देखेगा कि क्या यह तकनीकी गड़बड़ी थी, डेटा प्रोसेसिंग में समस्या हुई या फिर परिणाम तैयार करने की प्रक्रिया में किसी स्तर पर गंभीर विसंगति सामने आई। फिलहाल इस मामले की अगली सुनवाई और एनटीए के जवाब पर सभी की नजरें टिकी हैं।
Avneesh Mishra is a young and energetic journalist. He keeps a keen eye on sports, politics and foreign affairs. Avneesh has done Post Graduate Diploma in TV Journalism.
