22 साल पुराने नासा सैटेलाइट को बचाने निकला रोबोट! अंतरिक्ष में इतिहास रचने मिशन पर कटलिस्ट स्पेस
c: अमेरिका की स्पेस एजेंसी नासा और एरिजोना की निजी स्पेस स्टार्टअप कटलिस्ट स्पेस टेक्नोलॉजीज ने अंतरिक्ष में एक ऐतिहासिक मिशन लॉन्च किया है। इस मिशन का मकसद 22 साल पुराने स्विफ्ट ऑब्जर्वेटरी को अंतरिक्ष में नष्ट होने से बचाना है। इसके लिए ‘लिंक’ नाम का एक रोबोटिक स्पेसक्राफ्ट भेजा गया है, जो खराब हो चुके सैटेलाइट को पकड़कर उसे ऊंची और सुरक्षित कक्षा में पहुंचाएगा।
यह मिशन सिर्फ एक सैटेलाइट को बचाने तक सीमित नहीं है, बल्कि भविष्य में अंतरिक्ष में फंसे या खराब हो चुके सैटेलाइट्स की मरम्मत और उन्हें नई कक्षा में पहुंचाने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।
22 साल से कर रहा था अंतरिक्ष की निगरानी
नील गेहरल्स स्विफ्ट ऑब्जर्वेटरी को साल 2004 में लॉन्च किया गया था। करीब 500 मिलियन डॉलर की लागत से बने इस ऑब्जर्वेटरी ने ब्लैक होल, दूरस्थ आकाशगंगाओं और गामा रे विस्फोटों पर दुनिया को अहम वैज्ञानिक जानकारियां दी हैं। लेकिन इस सैटेलाइट में खुद का कोई प्रोपल्शन सिस्टम नहीं है। लगातार पृथ्वी की ओर खिंचाव बढ़ने से इसके इस साल के अंत तक वायुमंडल में प्रवेश कर जलकर खत्म होने का खतरा था।
रोबोटिक ‘लिंक’ करेगा रेस्क्यू ऑपरेशन
करीब आधा टन वजन वाला लिंक स्पेसक्राफ्ट खास तौर पर इसी मिशन के लिए तैयार किया गया है। इसमें तीन रोबोटिक भुजाएं, कई सेंसर और अत्याधुनिक थ्रस्टर लगाए गए हैं। यह पहले स्विफ्ट ऑब्जर्वेटरी के करीब पहुंचेगा, फिर बेहद सावधानी से उसे पकड़कर लगभग 600 किलोमीटर ऊंची नई कक्षा में ले जाएगा। इस पूरी प्रक्रिया में करीब 60 दिन लगेंगे।
सिर्फ 9 महीने में तैयार हुआ मिशन
कटलिस्ट स्पेस टेक्नोलॉजीज का दावा है कि उसने इस पूरे स्पेसक्राफ्ट को केवल 9 महीने में डिजाइन, तैयार और टेस्ट किया। नासा ने इस प्रोजेक्ट के लिए कंपनी को करीब 30 मिलियन डॉलर का कॉन्ट्रैक्ट दिया था।
अमेरिका-चीन स्पेस रेस में बड़ा कदम
यह मिशन ऐसे समय पर हुआ है जब अमेरिका और चीन के बीच अंतरिक्ष तकनीक को लेकर प्रतिस्पर्धा लगातार बढ़ रही है।
पिछले साल चीन ने भी अंतरिक्ष में दो सैटेलाइट्स को बेहद करीब लाकर परीक्षण किया था। इससे पहले चीन एक सैटेलाइट को पकड़कर उसकी कक्षा बदलने का प्रदर्शन भी कर चुका है।
ऐसे में अमेरिका का यह मिशन सिर्फ वैज्ञानिक उपलब्धि नहीं, बल्कि भविष्य की स्पेस सिक्योरिटी और सैटेलाइट सर्विसिंग तकनीक के लिहाज से भी बेहद अहम माना जा रहा है।
आगे क्या होगा?
अगर मिशन सफल रहा तो लिंक स्पेसक्राफ्ट स्विफ्ट ऑब्जर्वेटरी को सुरक्षित कक्षा में पहुंचाने के बाद अतिरिक्त ईंधन की मदद से और भी कई नजदीकी स्पेस ऑपरेशन का अभ्यास करेगा। कटलिस्ट स्पेस के सीईओ घोनही ली का कहना है कि आने वाले वर्षों में ऐसे सैकड़ों रोबोटिक स्पेसक्राफ्ट अंतरिक्ष में काम करेंगे, जो पुराने सैटेलाइट्स की मरम्मत, उन्हें नई कक्षा में पहुंचाने और अंतरिक्ष में निर्माण जैसे बड़े कार्य करेंगे।
Avneesh Mishra is a young and energetic journalist. He keeps a keen eye on sports, politics and foreign affairs. Avneesh has done Post Graduate Diploma in TV Journalism.
