मध्य प्रदेश में यूसीसी लागू करने की तैयारी, ट्रिपल तलाक और बहुविवाह पर रोक; कैबिनेट ने बिल को दी मंजूरी

0
my

CENTRAL NEWS DESK: मध्य प्रदेश सरकार ने राज्य में यूनिफॉर्म सिविल कोड (यूसीसी) लागू करने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए ड्राफ्ट बिल को कैबिनेट की मंजूरी दे दी है। अब यह विधेयक सोमवार से शुरू होने वाले विधानसभा के मानसून सत्र में पेश किया जाएगा। प्रस्तावित कानून के तहत ट्रिपल तलाक, बहुविवाह और निकाह हलाला जैसी प्रथाओं पर रोक लगाने का प्रावधान किया गया है। साथ ही सभी धर्मों के लिए विवाह और तलाक का पंजीकरण अनिवार्य होगा। हालांकि अनुसूचित जनजातियों को इस कानून के दायरे से बाहर रखा गया है।

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने बताया ऐतिहासिक फैसला

जगदीशपुर (पूर्व में इस्लाम नगर) में हुई विशेष कैबिनेट बैठक के बाद मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि राज्य में अब “राम और रहीम” सभी के लिए एक समान नागरिक कानून लागू होगा। उन्होंने कहा कि यह कानून संविधान में निहित समानता, न्याय और धर्मनिरपेक्षता की भावना को मजबूत करेगा।

मुख्यमंत्री ने बताया कि न्यायमूर्ति रंजना देसाई समिति ने विस्तृत अध्ययन के बाद यूसीसी का मसौदा तैयार किया, जिसे सरकार ने मंजूरी दे दी है।

ट्रिपल तलाक, बहुविवाह और निकाह हलाला पर सख्ती

प्रस्तावित कानून के अनुसार किसी भी व्यक्ति को एक समय में केवल एक ही जीवनसाथी रखने की अनुमति होगी। ट्रिपल तलाक, बहुविवाह और निकाह हलाला जैसी प्रथाओं को दंडनीय अपराध बनाया जाएगा। किसी भी धर्म में विवाह या तलाक का पंजीकरण अनिवार्य होगा।

लिव-इन रिलेशनशिप के लिए भी नए नियम

यूसीसी ड्राफ्ट में लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर भी स्पष्ट प्रावधान किए गए हैं। साथ रहने वाले जोड़ों को एक महीने के भीतर अपने संबंध का पंजीकरण कराना होगा।

यदि कोई जोड़ा निर्धारित समय में पंजीकरण नहीं कराता है तो तीन महीने तक की जेल या 10 हजार रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकेगा। गलत जानकारी देने पर तीन महीने की सजा और 25 हजार रुपये तक का जुर्माना होगा, जबकि नोटिस के बाद भी जानकारी न देने पर छह महीने तक की जेल और 25 हजार रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है।

यदि किसी महिला को लिव-इन संबंध के दौरान छोड़ दिया जाता है, तो उसे सक्षम अदालत से भरण-पोषण मांगने का अधिकार मिलेगा।

बच्चों को समान अधिकार

प्रस्तावित कानून के तहत विवाह, गोद लेने, सरोगेसी, असिस्टेड रिप्रोडक्टिव टेक्नोलॉजी या लिव-इन रिलेशनशिप से जन्मे सभी बच्चों को समान कानूनी दर्जा और संपत्ति में बराबर का अधिकार मिलेगा। संपत्ति के मामलों में बेटा और बेटी दोनों को समान अधिकार प्राप्त होंगे। विधवा और विधुर को भी उत्तराधिकार संबंधी मामलों में समान अधिकार दिए जाएंगे।

विवाह की न्यूनतम आयु

ड्राफ्ट के अनुसार विवाह के लिए पुरुष की न्यूनतम आयु 21 वर्ष और महिला की 18 वर्ष तय की गई है। विवाह केवल दोनों पक्षों की स्वैच्छिक सहमति से ही मान्य होगा।

ऑनलाइन और स्थानीय स्तर पर होगा पंजीकरण

शहरी क्षेत्रों में विवाह और तलाक का पंजीकरण एमपी ई-नगरपालिका पोर्टल के माध्यम से किया जाएगा, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में एसडीएम, नगर निकाय या पंचायत स्तर पर यह प्रक्रिया पूरी होगी।

अनुसूचित जनजातियों को रखा गया बाहर

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि संविधान के अनुच्छेद 342 और अनुच्छेद 366(25) के तहत आने वाली अनुसूचित जनजातियों पर यह कानून लागू नहीं होगा। इसके अलावा संविधान के भाग-21 के तहत संरक्षित पारंपरिक अधिकार रखने वाले समुदायों को भी छूट दी गई है।

महिलाओं की सुरक्षा और समानता पर जोर

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि यूसीसी का सबसे बड़ा उद्देश्य महिलाओं को समान अधिकार देना और वर्षों से चले आ रहे भेदभाव को समाप्त करना है। उन्होंने दावा किया कि समिति के समक्ष लगभग 80 प्रतिशत मुस्लिम महिलाओं और 40 प्रतिशत मुस्लिम पुरुषों ने इस कानून का समर्थन किया।

विधानसभा में होगा अंतिम फैसला

कैबिनेट से मंजूरी मिलने के बाद अब यूसीसी विधेयक को विधानसभा के मानसून सत्र में पेश किया जाएगा। यदि सदन से पारित हो जाता है, तो मध्य प्रदेश उत्तराखंड, गुजरात और असम के बाद समान नागरिक संहिता लागू करने वाले राज्यों की सूची में शामिल हो जाएगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You may have missed