कराची में बड़ा आतंकी हमला: सिंध रेंजर्स मुख्यालय पर आत्मघाती धावा, 6 आतंकी ढेर और 4 जवान शहीद

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Central News Desk: पाकिस्तान का सबसे बड़ा शहर और आर्थिक राजधानी कराची एक बार फिर दहल उठा है। शनिवार रात शहर के एक बेहद सुरक्षित माने जाने वाले सैन्य प्रतिष्ठान पर बड़ा आतंकी हमला हुआ। आतंकियों ने इस बार सिंध रेंजर्स के भिट्टाई विंग मुख्यालय को अपना निशाना बनाया। कराची के घनी आबादी वाले गुलिस्तान-ए-जौहर इलाके में हुई इस दुस्साहसिक वारदात ने एक बार फिर पाकिस्तान के आंतरिक सुरक्षा दावों की पोल खोलकर रख दी है। विश्वसनीय सुरक्षा सूत्रों के मुताबिक, इस खौफनाक हमले के पीछे प्रतिबंधित तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) से जुड़े आतंकी संगठन जमात-उल-अहरार का हाथ है।

धमाके के साथ परिसर में घुसे सुसाइड हमलावर

यह हमला शनिवार रात करीब 8:30 बजे हुआ, जब जमात-उल-अहरार के सात भारी हथियारों से लैस आतंकियों ने मुख्यालय को घेर लिया। हमले की शुरुआत बेहद खौफनाक थी; आतंकियों ने सबसे पहले विस्फोटकों से भरे एक वाहन को रेंजर्स मुख्यालय के मुख्य गेट से टकरा दिया। इस आत्मघाती धमाके से गेट पूरी तरह तबाह हो गया और आतंकियों के लिए परिसर के अंदर घुसने का रास्ता साफ हो गया। अंदर दाखिल होते ही हमलावरों ने हैंड ग्रेनेड फेंकने और अंधाधुंध फायरिंग करनी शुरू कर दी, जिससे चारों तरफ अफरा-तफरी मच गई।

90 मिनट तक चली भीषण मुठभेड़

अचानक हुए इस हमले के बावजूद, रेंजर्स के सतर्क जवानों ने बिना वक्त गंवाए तुरंत मोर्चा संभाल लिया और आतंकियों को करारा जवाब दिया। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए तुरंत बैकअप बुलाया गया, जिसके बाद स्पेशल सिक्योरिटी यूनिट (SSU) के कमांडो और एंटी टेररिस्ट फोर्स (ATF) की टीमें भी हथियारों के साथ मौके पर पहुंच गईं। इसके बाद सुरक्षा बलों और आतंकियों के बीच करीब 90 मिनट (डेढ़ घंटे) तक दोनों तरफ से रोंगटे खड़े कर देने वाली भीषण गोलीबारी चलती रही।

भारी नुकसान और एक आतंकी जिंदा गिरफ्तार

इस संयुक्त और त्वरित सैन्य अभियान में सुरक्षा बलों ने अपनी जांबाजी का परिचय देते हुए छह आतंकवादियों को मौके पर ही ढेर कर दिया। वहीं, एक बड़ी कामयाबी तब हाथ लगी जब एक घायल हमलावर को जिंदा गिरफ्तार कर लिया गया, जिससे आगे की पूछताछ में अहम सुराग मिलने की उम्मीद है। हालांकि, इस आमने-सामने की भीषण जंग में देश की रक्षा करते हुए सिंध रेंजर्स के चार बहादुर जवानों ने भी अपनी जान गंवा दी।

छावनी में तब्दील हुआ इलाका

मुठभेड़ खत्म होने के तुरंत बाद सुरक्षा बलों ने पूरे गुलिस्तान-ए-जौहर इलाके को अपने कड़े सुरक्षा घेरे में ले लिया। रेंजर्स मुख्यालय की तरफ आने-जाने वाली सभी सड़कों को पूरी तरह सील कर दिया गया और दहशत के साए के बीच स्थानीय निवासियों को सुरक्षा के लिहाज से घरों के भीतर ही रहने की सख्त हिदायत दी गई। सुरक्षा विशेषज्ञों की चिंता: अक्टूबर 2024 के बाद कराची में यह पहला इतना बड़ा और सीधा आतंकी हमला माना जा रहा है। इतने सुरक्षित और घनी आबादी वाले सैन्य ठिकाने पर हुआ यह हमला पाकिस्तान की इंटेलिजेंस और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

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