हर दिन 1.70 लाख टन कचरा पैदा, सिर्फ 1.04 लाख टन की प्रोसेसिंग, देश में वेस्ट मैनेजमेंट पर बड़ा सवाल

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CENTRAL N EWS DESK: देश में म्युनिसिपल वेस्ट यानी नगर निकायों के कचरे को कलेक्ट करने में लगातार सुधार हुआ है, लेकिन इसकी प्रोसेसिंग अब भी जरूरत के मुताबिक नहीं हो पा रही है। बुधवार, 5 अगस्त को जारी एक नई रिपोर्ट में सामने आए आंकड़े देश के वेस्ट मैनेजमेंट सिस्टम की बड़ी चुनौती को उजागर करते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक भारत में हर दिन करीब 1.70 लाख टन म्युनिसिपल वेस्ट पैदा होता है, लेकिन इसमें से सिर्फ करीब 1.04 लाख टन कचरे की ही प्रोसेसिंग हो पाती है। यानी रोजाना करीब 66 हजार टन कचरे के पूरी तरह प्रोसेस नहीं होने की चुनौती बनी हुई है।

कलेक्शन बढ़ा, लेकिन प्रोसेसिंग सिस्टम अब भी कमजोर

इंस्टीट्यूट फॉर गवर्नेंस एंड सस्टेनेबल डेवलपमेंट यानी आईजीएसडी और गेटवे रिसर्च की रिपोर्ट में बताया गया है कि देश में वेस्ट कलेक्शन की व्यवस्था में सुधार हुआ है। हालांकि, कचरे की प्रोसेसिंग, रिसाइक्लिंग और वैज्ञानिक डिस्पोजल की क्षमता उसी रफ्तार से नहीं बढ़ी है।

इसका असर शहरों की क्लीनलिनेस और एनवायरनमेंट पर पड़ रहा है। बड़ी मात्रा में अनप्रोसेस्ड वेस्ट लैंडफिल साइट्स तक पहुंच रहा है, जिससे जमीन, पानी और हवा पर दबाव बढ़ रहा है।

रोजाना 66 हजार टन कचरे की प्रोसेसिंग सबसे बड़ी चुनौती

रिपोर्ट के आंकड़े बताते हैं कि अब चुनौती सिर्फ कचरा कलेक्ट करने की नहीं है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि कलेक्ट किए गए कचरे की प्रोसेसिंग और रिसाइक्लिंग कितनी प्रभावी तरीके से की जा रही है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक म्युनिसिपल बॉडीज को कचरा कलेक्शन के साथ उसके सेग्रीगेशन, रिसाइक्लिंग और री-यूज पर भी ज्यादा फोकस करना होगा।

वेस्ट मैनेजमेंट को लेकर बढ़ानी होगी क्षमता

भारत में तेजी से बढ़ते शहरीकरण के बीच आने वाले वर्षों में कचरे की मात्रा और बढ़ सकती है। ऐसे में वेस्ट मैनेजमेंट सिस्टम की कैपेसिटी बढ़ाना जरूरी होगा। 1.70 लाख टन रोजाना कचरा पैदा होना और सिर्फ 1.04 लाख टन की प्रोसेसिंग होना साफ बताता है कि कचरा प्रबंधन के क्षेत्र में अब अगली बड़ी चुनौती प्रोसेसिंग और डिस्पोजल की है।

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