बरेली के पॉश इलाके में बुलडोज़र एक्शन : तौकीर रज़ा के सहयोगी की करोड़ों की अवैध कमाई पर गिरी गाज
Central News Desk: उत्तर प्रदेश के बरेली के सबसे व्यस्त और पॉश इलाके नावेल्टी चौराहे पर बने कॉम्प्लेक्स को नगर निगम ने अवैध घोषित करते हुए कार्रवाई शुरू कर दी है। इस कॉम्प्लेक्स में बनी करीब 70 दुकानें पिछले कई सालों से चल रही थीं, जिनसे हर महीने 8 से 10 लाख रुपये की वसूली होती थी। यह रकम सीधे तौर पर मौलाना तौकीर रज़ा के खास सहयोगी नफीस खान और उनके साथियों के पास जाती थी।
10 लाख रुपये महीना की वसूली
स्थानीय लोगों के मुताबिक हर दुकान का किराया 10 से 20 हज़ार रुपये महीना था। दुकानदार बताते हैं कि किराए का कुछ हिस्सा लखनऊ भेजा जाता था जबकि बाकी रकम यहीं स्थानीय गुर्गों को दी जाती थी। इस तरह हर महीने 10 लाख रुपये तक की आमदनी सीधे तौकीर रज़ा के नेटवर्क को मज़ार के नाम पर होती रही।
कैसे खड़ा हुआ ये कॉम्प्लेक्स?
जानकारी के अनुसार, सन 2000 के बाद से दुकानों का निर्माण शुरू हुआ और यह सिलसिला चार साल पहले तक चलता रहा। शुरुआत में मज़ार पहलवान साहेब की देखरेख रईस मियां कादरी करते थे, लेकिन जैसे-जैसे तौकीर रज़ा का राजनीतिक और धार्मिक प्रभाव बढ़ा, उनके समर्थकों ने कमेटी पर कब्ज़ा कर लिया। मज़ार की आड़ में एक-एक कर दुकानें खड़ी होती गईं और प्रशासन ने आंख मूंद ली।
अदालत और विवाद
इस कॉम्प्लेक्स को लेकर नगर निगम और वक्फ बोर्ड के बीच मुकदमा भी चला, जो अब भी हाईकोर्ट में लंबित है। हालांकि दुकानों को गिराने पर स्टे लगा हुआ है, लेकिन यह पूरा मामला बताता है कि कैसे धार्मिक प्रभाव का इस्तेमाल कर अवैध संपत्तियां बनाई और मोटी कमाई की गई।
करोड़ों की संपत्तियों पर कार्रवाई
नगर निगम अब लगातार बुलडोज़र एक्शन चला रहा है।
इसके अलावा आधा दर्जन संपत्तियों का सर्वे जारी है।
होटल स्काईलार्क (पीलीभीत बाइपास) और उससे जुड़े दो लग्ज़री बैंक्वेट हाल को सील किया गया, जिनकी बाज़ार कीमत करीब 150 करोड़ रुपये है।
नावेल्टी कॉम्प्लेक्स की 70 दुकानें, जिनकी कीमत 50 करोड़ से अधिक है, सील कर दी गईं।
ढाई बीघे में फैला मैरिज हॉल, जिसकी कीमत 50–60 करोड़ रुपये, भी सील किया गया।
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