अमित शाह आज सिलीगुड़ी में: चिकन नेक की सुरक्षा से दार्जिलिंग के स्थायी समाधान तक, बड़ी बैठकें
CENTRAL NEWS DESK: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह शनिवार को पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी में कई अहम बैठकों की अध्यक्षता करेंगे। उनके दौरे के अंतिम दिन एजेंडे में दो बड़े मुद्दे सबसे ऊपर हैं, देश के रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण सिलीगुड़ी कॉरिडोर यानी ‘चिकन नेक’ की सुरक्षा और दार्जिलिंग की पहाड़ियों के लंबे समय से लंबित राजनीतिक मुद्दे का स्थायी राजनीतिक समाधान। अमित शाह सुकना के बाहरी इलाके में स्थित अपने ठहरने वाले होटल में सुबह करीब 11 बजे लगातार दो बैठकें करेंगे। इसके बाद दोपहर करीब 2:30 बजे उनके बागडोगरा एयरपोर्ट से दिल्ली रवाना होने की संभावना है।
चिकन नेक की सुरक्षा पर होगी बड़ी समीक्षा
सिलीगुड़ी कॉरिडोर भारत के लिए बेहद संवेदनशील रणनीतिक क्षेत्र है। यह संकरा भू-भाग देश के पूर्वोत्तर राज्यों को भारत के बाकी हिस्सों से जोड़ता है। इसकी भौगोलिक स्थिति के कारण यहां सुरक्षा व्यवस्था को लेकर केंद्र सरकार लगातार नजर रखती है। अमित शाह की बैठक में BSF, SSB, खुफिया एजेंसियों और राज्य प्रशासन के बीच तालमेल की समीक्षा होने की संभावना है। नेपाल, भूटान और बांग्लादेश की सीमाओं के करीब होने के कारण इस पूरे क्षेत्र की सुरक्षा को विशेष महत्व दिया जाता है।
बैठक में सीमा सुरक्षा, निगरानी व्यवस्था, सीमा पर बुनियादी ढांचे और केंद्रीय सुरक्षा बलों के बीच समन्वय जैसे मुद्दों पर चर्चा हो सकती है।
दार्जिलिंग के राजनीतिक समाधान पर भी नजर
अमित शाह की दूसरी अहम बैठक दार्जिलिंग की पहाड़ियों के राजनीतिक मुद्दे से जुड़ी हो सकती है। सूत्रों के मुताबिक, वह पहाड़ी क्षेत्र के निर्वाचित प्रतिनिधियों और राजनीतिक नेताओं से मुलाकात कर सकते हैं। हालांकि, इस बैठक को लेकर आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। बैठक में बीजेपी की ओर से चुनाव के दौरान किए गए ‘स्थायी राजनीतिक समाधान’ के वादे पर चर्चा होने की उम्मीद है। गोरखा समुदाय और पहाड़ी क्षेत्र के दूसरे लोगों की लंबे समय से चली आ रही राजनीतिक मांगों को लेकर यह बैठक महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
अलग गोरखालैंड की मांग दशकों पुरानी
दार्जिलिंग पहाड़ियों में अलग गोरखालैंड राज्य की मांग दशकों से चली आ रही है। इस मुद्दे को हल करने के लिए पहले भी कई व्यवस्थाएं बनाई गईं। इनमें दार्जिलिंग गोरखा हिल काउंसिल और बाद में गोरखालैंड टेरिटोरियल एडमिनिस्ट्रेशन (GTA) जैसी संस्थाएं शामिल रही हैं।
इसके बावजूद क्षेत्र में स्थायी राजनीतिक समाधान का मुद्दा पूरी तरह खत्म नहीं हुआ। 2026 के विधानसभा चुनाव अभियान के दौरान अमित शाह ने पहाड़ियों के लिए ‘स्थायी राजनीतिक समाधान’ का वादा किया था। ऐसे में उनकी सिलीगुड़ी बैठक को उस वादे की दिशा में आगे बढ़ने वाले कदम के तौर पर देखा जा रहा है।
कौन-कौन नेता हो सकते हैं शामिल?
दार्जिलिंग क्षेत्र के प्रमुख नेताओं की बैठक में मौजूद रहने की संभावना है। गोरखा जनमुक्ति मोर्चा (GJM) के अध्यक्ष बिमल गुरुंग और महासचिव रोशन गिरि के अलावा बीजेपी के दार्जिलिंग सांसद राजू बिष्ट, पहाड़ी क्षेत्र से जुड़े राज्य मंत्री और विधायक भी बैठक में शामिल हो सकते हैं। हालांकि, अंतिम सूची और बैठक की आधिकारिक पुष्टि का इंतजार है।
शुक्रवार को भी सुरक्षा व्यवस्था का लिया जायजा
अमित शाह ने अपने बंगाल दौरे के दूसरे दिन शुक्रवार को भी सिलीगुड़ी में सुरक्षा से जुड़े कार्यक्रमों में हिस्सा लिया। उन्होंने सशस्त्र सीमा बल (SSB) फ्रंटियर मुख्यालय का दौरा किया और कई बुनियादी ढांचा परियोजनाओं का उद्घाटन तथा शिलान्यास किया। इसके अलावा उन्होंने नए आपराधिक कानूनों पर आधारित एक प्रदर्शनी का भी उद्घाटन किया।
शुक्रवार के कार्यक्रम में अमित शाह ने सीमा पर बाड़ लगाने और सुरक्षा से जुड़े बुनियादी ढांचे के लिए जमीन उपलब्ध कराने में पिछली ममता बनर्जी सरकार पर देरी का आरोप लगाया। उन्होंने मौजूदा मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी की सरकार की केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों के साथ सहयोग और जमीन हस्तांतरण में तेजी के लिए तारीफ की।
पूर्वोत्तर की सुरक्षा के लिहाज से बेहद अहम है क्षेत्र
सिलीगुड़ी कॉरिडोर की अहमियत सिर्फ पश्चिम बंगाल तक सीमित नहीं है। यह भारत के पूर्वोत्तर हिस्से को देश के बाकी हिस्सों से जोड़ने वाला महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग है। इसलिए इस इलाके में किसी भी तरह की सुरक्षा चुनौती का सीधा असर पूर्वोत्तर की कनेक्टिविटी और रणनीतिक सुरक्षा पर पड़ सकता है।
यही वजह है कि अमित शाह की शनिवार की बैठकों को केवल नियमित समीक्षा बैठक नहीं माना जा रहा। एक तरफ केंद्र सरकार चिकन नेक की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने पर ध्यान दे रही है, वहीं दूसरी तरफ दार्जिलिंग के राजनीतिक विवाद का समाधान निकालने की कोशिश भी एजेंडे में है।
ऐसे में सिलीगुड़ी में होने वाली इन बैठकों से यह संकेत मिल सकता है कि केंद्र सरकार आने वाले समय में सीमा सुरक्षा और दार्जिलिंग के राजनीतिक मुद्दे, दोनों को लेकर किस दिशा में आगे बढ़ने वाली है।
Avneesh Mishra is a young and energetic journalist. He keeps a keen eye on sports, politics and foreign affairs. Avneesh has done Post Graduate Diploma in TV Journalism.
