BRICS Summit 2026: AI की बढ़ती ताकत पर लगेगी सुरक्षा की लक्ष्मण रेखा, जैव-सुरक्षा से ग्लोबल गवर्नेंस तक मंथन
CENTRAL NEWS DESK: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI अब केवल चैटबॉट, फोटो या वीडियो बनाने तक सीमित नहीं रह गया है। स्वास्थ्य, बैंकिंग, वैज्ञानिक शोध, साइबर सुरक्षा, रोजगार और रक्षा जैसे क्षेत्रों में इसका इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे में AI की बढ़ती क्षमता के साथ उससे जुड़े सुरक्षा जोखिम भी दुनिया के सामने बड़ी चुनौती बन रहे हैं।
12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली में होने वाले BRICS शिखर सम्मेलन में AI की सुरक्षा, जिम्मेदार इस्तेमाल और वैश्विक गवर्नेंस का मुद्दा अहम चर्चा का विषय बन सकता है। भारत BRICS देशों के बीच AI, एडवांस्ड कंप्यूटिंग, क्वांटम टेक्नोलॉजी और सेमीकंडक्टर के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के साथ-साथ AI के सुरक्षित इस्तेमाल के लिए साझा मानकों पर भी जोर दे सकता है।
AI के लिए अंतरराष्ट्रीय निगरानी की जरूरत
AI के तेजी से विस्तार के बीच इसके लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर निगरानी और समन्वय की मांग भी बढ़ रही है। इस साल भारत में आयोजित AI इम्पैक्ट समिट के दौरान AI के जोखिमों से निपटने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग की जरूरत पर चर्चा हुई थी।
ओपनएआई के CEO सैम ऑल्टमैन ने भी AI के अंतरराष्ट्रीय समन्वय के लिए परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में काम करने वाली IAEA जैसी व्यवस्था की संभावना का सुझाव दिया था। ऐसी व्यवस्था का उद्देश्य शक्तिशाली AI सिस्टम से जुड़े जोखिमों पर देशों के बीच सहयोग और सुरक्षा सुनिश्चित करना हो सकता है।
अब सिर्फ डीपफेक का खतरा नहीं
AI से जुड़े खतरे अब फेक न्यूज और डीपफेक तक सीमित नहीं हैं। AI और जैव-प्रौद्योगिकी के मेल ने जैव-सुरक्षा को लेकर भी नई चिंताएं पैदा कर दी हैं।
अगस्त में प्रकाशित एक वैज्ञानिक अध्ययन में AI की मदद से बैक्टीरियोफेज डिजाइन किए जाने की जानकारी सामने आई। ये ऐसे वायरस होते हैं जो बैक्टीरिया को संक्रमित करते हैं और भविष्य में एंटीबायोटिक-प्रतिरोधी संक्रमणों के इलाज में उपयोगी हो सकते हैं।
हालांकि ये मानव वायरस नहीं थे, लेकिन इस तरह की तकनीकी क्षमता ने यह सवाल जरूर खड़ा किया है कि भविष्य में AI का गलत इस्तेमाल खतरनाक जैविक एजेंटों को डिजाइन करने में किया जा सकता है या नहीं। यही वजह है कि AI गवर्नेंस में जैव-सुरक्षा को शामिल करने की जरूरत लगातार महत्वपूर्ण होती जा रही है।
BRICS में साझा AI सुरक्षा मानक पर हो सकती है पहल
BRICS के सभी देशों के लिए एक समान AI कानून बनाना फिलहाल चुनौतीपूर्ण है। सदस्य देशों की तकनीकी क्षमता, कानून और नीतिगत प्राथमिकताएं अलग-अलग हैं। हालांकि भारत साझा न्यूनतम सुरक्षा मानकों की दिशा में पहल कर सकता है।
इन मानकों में शक्तिशाली AI मॉडल की सुरक्षा जांच, गंभीर AI घटनाओं की जानकारी साझा करना, डीपफेक की पहचान, AI और बायोटेक्नोलॉजी से जुड़े जोखिमों पर सहयोग और स्वतंत्र सुरक्षा परीक्षण जैसे मुद्दे शामिल हो सकते हैं।
भारत का फोकस- इनोवेशन भी, सुरक्षा भी
भारत का मौजूदा रुख AI पर एक ही व्यापक और कठोर कानून लागू करने के बजाय जोखिम आधारित नियमन की दिशा में है। सरकार चाहती है कि AI का इस्तेमाल स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि और दूसरे क्षेत्रों में तेजी से बढ़े, लेकिन इसके साथ डेटा सुरक्षा, जवाबदेही और गलत इस्तेमाल को रोकने के उपाय भी मजबूत हों।
BRICS देशों के रुख में भी अलग-अलग प्राथमिकताएं दिखाई देती हैं। रूस AI को राष्ट्रीय तकनीकी और रणनीतिक क्षमता से जोड़ता है। ब्राजील AI के सामाजिक प्रभाव और नियमन पर जोर देता है, जबकि दक्षिण अफ्रीका विकासशील देशों की AI तक पहुंच बढ़ाने और डिजिटल असमानता कम करने पर ध्यान देता है।
चीन भी चाहता है ग्लोबल AI गवर्नेंस में बड़ी भूमिका
BRICS में चीन का रुख इस मुद्दे पर बेहद महत्वपूर्ण रहने वाला है। जुलाई 2026 में शंघाई में आयोजित विश्व AI सम्मेलन के दौरान चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने AI गवर्नेंस में अंतरराष्ट्रीय सहयोग और साझा नियमों की जरूरत पर जोर दिया था।
चीन का कहना है कि AI के विकास और उसके लिए नियम तैयार करने में सभी देशों, खासकर विकासशील देशों की भागीदारी होनी चाहिए। चीन संयुक्त राष्ट्र की भूमिका मजबूत करने और AI तकनीक को ज्यादा देशों तक पहुंचाने की वकालत भी करता रहा है।
चीन खुद भी ग्लोबल AI गवर्नेंस में बड़ी भूमिका हासिल करना चाहता है। इसके लिए वह ग्लोबल साउथ के देशों के साथ AI सहयोग और प्रशिक्षण को बढ़ावा देने की दिशा में काम कर रहा है।
साझा कानून मुश्किल, लेकिन सहयोग संभव
BRICS देशों के बीच तत्काल कोई साझा AI कानून बनना आसान नहीं माना जा रहा है। अलग-अलग देशों की नीतियों और तकनीकी क्षमताओं के चलते इस दिशा में लंबी बातचीत की जरूरत होगी।
हालांकि साझा सुरक्षा मानक, स्वतंत्र AI परीक्षण, गंभीर घटनाओं की जानकारी साझा करना और AI-बायोटेक्नोलॉजी से जुड़े जैव-सुरक्षा जोखिमों पर सहयोग जैसे क्षेत्रों में सहमति बन सकती है।
ऐसे में BRICS Summit 2026 AI के लिए कोई एक वैश्विक कानून बनाने से ज्यादा सुरक्षित, जिम्मेदार और समावेशी AI विकास के लिए साझा ढांचा तैयार करने की दिशा में अहम कदम साबित हो सकता है।
Avneesh Mishra is a young and energetic journalist. He keeps a keen eye on sports, politics and foreign affairs. Avneesh has done Post Graduate Diploma in TV Journalism.
