महाराष्ट्र में 1.5 लाख ड्राइवरों ने सीखी मराठी, 7,750 एग्जाम में फेल, अब दोबारा देना होगा टेस्ट
CENTRAL NEWS DESK: महाराष्ट्र में कमर्शियल पैसेंजर वाहनों के ड्राइवरों के लिए मराठी भाषा की जानकारी को लेकर सरकार का अभियान तेज हो गया है। राज्य के परिवहन मंत्री प्रताप सरनाइक के मुताबिक, करीब डेढ़ लाख गैर-मराठी भाषी ड्राइवरों ने मराठी सीखने के लिए शुरू किए गए कोर्स में हिस्सा लिया, जबकि चेकिंग के दौरान लिए गए टेस्ट में 7,750 ड्राइवर पास नहीं हो सके। ऐसे ड्राइवरों को दोबारा परीक्षा देनी होगी।
सरकार का कहना है कि ड्राइवरों के लिए मराठी की बुनियादी जानकारी जरूरी करने का उद्देश्य सिर्फ भाषा को बढ़ावा देना नहीं, बल्कि यात्रियों के साथ बेहतर संवाद और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना भी है।
पहले दिन 1,268 ड्राइवरों को नोटिस
राज्यभर में गुरुवार से शुरू हुई जांच के पहले दिन आरटीओ अधिकारियों ने कमर्शियल पैसेंजर वाहनों के 8,217 ड्राइवरों की जांच की। इनमें मुंबई महानगर क्षेत्र के 3,995 ड्राइवर शामिल थे। जांच के दौरान मुंबई महानगर क्षेत्र में 604 ड्राइवरों को मराठी की पर्याप्त जानकारी नहीं होने पर नोटिस दिया गया। वहीं महाराष्ट्र के अन्य हिस्सों में 4,222 ड्राइवरों की जांच हुई, जिनमें 664 ड्राइवरों को नोटिस जारी किए गए।
कुल मिलाकर पहले दिन 1,268 ड्राइवरों को नोटिस मिला।
एक महीने का समय, वरना बैज होगा निलंबित
परिवहन विभाग ने नोटिस पाने वाले ड्राइवरों को मराठी की जरूरी जानकारी हासिल करने के लिए एक महीने का समय दिया है। तय अवधि में भाषा की आवश्यक जानकारी हासिल नहीं करने पर ड्राइवरों का बैज तीन महीने के लिए निलंबित किया जा सकता है। सरकार की यह कार्रवाई मुख्य रूप से ऑटो-रिक्शा और टैक्सी जैसे यात्री वाहनों के ड्राइवरों पर केंद्रित है।
16 सवालों का लिया जा रहा टेस्ट
मराठी भाषा की जानकारी जांचने के लिए ड्राइवरों से 16 सवालों की परीक्षा ली जा रही है। सरकार ने गैर-मराठी भाषी ड्राइवरों के लिए पहले ही मराठी सीखने का कोर्स शुरू किया था। इसके लिए ड्राइवरों को भाषा सीखने की समय-सीमा 15 अगस्त तक दी गई थी। अब चेकिंग अभियान के जरिए यह देखा जा रहा है कि ड्राइवरों ने मराठी की बुनियादी जानकारी हासिल की है या नहीं।
30 सितंबर तक जारी रहेगी जांच
परिवहन मंत्री प्रताप सरनाइक के मुताबिक, राज्यभर में यह जांच अभियान 30 सितंबर तक जारी रहेगा। आरटीओ की टीमें कमर्शियल पैसेंजर वाहनों और उनके ड्राइवरों की जांच करेंगी। सरकार का तर्क है कि यात्रियों और ड्राइवरों के बीच भाषा का स्पष्ट संवाद कई परिस्थितियों में बेहद जरूरी होता है। खासकर आपात स्थिति में ड्राइवर और यात्री के बीच सही तरीके से बातचीत होना सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
भाषा के साथ यात्री सुरक्षा पर भी जोर
सरकार ने साफ किया है कि मराठी की बुनियादी जानकारी का नियम केवल भाषा से जुड़ा विषय नहीं है। इसका संबंध यात्रियों की सुविधा, ड्राइवरों और यात्रियों के बीच संवाद तथा सुरक्षा से भी है। अब जिन ड्राइवरों को टेस्ट में सफलता नहीं मिली है, उनके सामने दोबारा परीक्षा पास करने की चुनौती है। वहीं, सितंबर के अंत तक चलने वाले इस अभियान से यह साफ होगा कि राज्य में कितने कमर्शियल ड्राइवर निर्धारित मराठी भाषा मानक को पूरा कर पाते हैं।
Avneesh Mishra is a young and energetic journalist. He keeps a keen eye on sports, politics and foreign affairs. Avneesh has done Post Graduate Diploma in TV Journalism.
