पेपर लीक पर ‘एक्शन’ खूब, ‘कन्विक्शन’ क्यों नहीं? CBI और ED के 28 मामलों का चौंकाने वाला रिकॉर्ड

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Aug 10, 2026, 10_14_05 PM

CENTRAL NEWS DESK: देश में कॉम्पटेटिव एग्जाम्स में पेपर लीक और परीक्षा धांधली के मामले लगातार सामने आते रहे हैं। जांच एजेंसियों ने इन मामलों में गिरफ्तारियां की, आरोपपत्र दाखिल किए और संपत्तियां जब्त कीं, लेकिन कोर्ट से अंतिम दोषसिद्धि के आंकड़े बेहद कम हैं। 2015 के बाद सीबीआई को कम से कम 17 परीक्षा धांधली के मामलों की जांच सौंपी गई। इन मामलों में सीबीआई की अपनी पोस्ट-2015 जांचों से अब तक कोई डॉक्युमेंटेशन कंविक्शन दर्ज नहीं हुई है। वहीं ईडी ने धनशोधन निवारण अधिनियम के तहत कम से कम 11 परीक्षा धांधली से जुड़े मामलों में कार्रवाई की, लेकिन इन मामलों में भी अब तक कोई डॉक्युमेंटेशन कंविक्शन दर्ज नहीं हुई। हालांकि, इसका यह अर्थ नहीं है कि इन सभी मामलों के आरोपी कोर्ट से निर्दोष साबित हो चुके हैं। कई मामलों में जांच या मुकदमे की प्रक्रिया अभी जारी है।

CBI के पास कौन-कौन से पेपर लीक मामले रहे?

CBI से जुड़े 17 पोस्ट-2015 मामलों में से प्रमुख मामले

परीक्षा/मामलावर्षCBI की स्थिति
AIPMT2015इलेक्ट्रॉनिक तरीके से पेपर प्रसारित होने के बाद जांच
WB SSC2016FIR/जांच
SSC CGL20172019 में चार्जशीट; ट्रायल लंबित
Army CEE2017जांच
BARC परीक्षा2018जांच
CG PSC2020जांच
JEE Main2021कई गिरफ्तारियां; दोषसिद्धि नहीं
HP Police Constable2022जांच
APPSC2022जांच
WR CBT2023–24जांच
NEET-UG2024कई चार्जशीट/गिरफ्तारियां; दोषसिद्धि नहीं
UGC-NET2024क्लोजर रिपोर्ट
ECR Inspector2025जांच
IBPS RRB2025जांच
UKSSSC Group-C2025CBI चार्जशीट; ट्रायल लंबित

NEET-UG 2024, UGC-NET 2024, SSC CGL 2017, JEE Main 2021, WB SSC 2016, HP Police Constable 2022, Army CEE 2017 और Karnataka PSI 2021 का विशेष रूप से उल्लेख किया गया है। शेष मामलों सहित कुल संख्या कम-से-कम 17 बताई गई है।

नीट-यूजी मामला: गिरफ्तारियां और आरोपपत्र, लेकिन फैसला अभी नहीं

नीट-यूजी 2024 मामले में सीबीआई ने कई गिरफ्तारियां कीं और आरोपपत्र दाखिल किए। अध्ययन के मुताबिक मामले में कथित मुख्य आरोपी के खिलाफ निर्धारित 90 दिन की अवधि में आरोपपत्र दाखिल नहीं हो सका, जिसके बाद उसे डिफॉल्ट जमानत मिली। हालांकि, जमानत मिलना दोषमुक्ति या निर्दोष साबित होना नहीं है। मामले में अदालत की अंतिम दोषसिद्धि अभी दर्ज नहीं हुई है।

यूजीसी-नेट मामला: जांच के बाद क्लोजर रिपोर्ट

जून 2024 की यूजीसी-नेट परीक्षा को कथित परीक्षा की शुचिता प्रभावित होने के कारण रद्द किया गया था। बाद में सीबीआई ने जांच की और जनवरी 2025 में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की। एजेंसी ने कथित पेपर लीक से जुड़े स्क्रीनशॉट को छेड़छाड़ किया हुआ बताया। इस मामले में गिरफ्तारी नहीं हुई और जांच का अंतिम परिणाम क्लोजर रिपोर्ट के रूप में सामने आया।

एसएससी सीजीएल 2017: आरोपपत्र दाखिल, मुकदमा अब भी लंबित

एसएससी सीजीएल 2017 मामले में सीबीआई ने 2019 में आरोपपत्र दाखिल किया था। लेकिन उपलब्ध अध्ययन के अनुसार वर्षों बाद भी अदालत से अंतिम दोषसिद्धि नहीं हुई है और मुकदमा लंबित है।

UKSSC मामला: आरोपपत्र के बाद भी अदालत का फैसला नहीं

उत्तराखंड के यूकेएसएसएससी ग्रुप-सी मामले में सीबीआई ने मामला दर्ज करने के बाद आरोपपत्र दाखिल किया। लेकिन अध्ययन के समय तक अदालत से दोषसिद्धि नहीं हुई थी और मुकदमा लंबित था।


ED के पास कौन-कौन से पेपर लीक मामले पहुंचे?

ED ने इन मामलों में सीधे पेपर लीक की जांच करने के बजाय मुख्यतः Prevention of Money Laundering Act (PMLA) के तहत कथित अपराध की कमाई और money trail की जांच की।

ED से जुड़े कम-से-कम 11 मामले

परीक्षा/मामलावर्षED की कार्रवाई/स्थिति
WB SSC2016PMLA जांच
Maharashtra TET2019/2021PMLA जांच
REET2021PMLA जांच
Karnataka PSI2021₹1.53 करोड़ की संपत्ति/राशि अटैचमेंट का उल्लेख
HPSC HCS2021PMLA जांच
HPSC Dental Surgeon2021PMLA जांच
UKSSSC Graduate-Level2021PMLA जांच
TSPSC Group-I2022PMLA जांच
NHM Staff Nurse, MP2023PMLA जांच
UP Police Constable2024PMLA जांच; संपत्ति अटैच
UPPSC RO/ARO2024PMLA जांच; संपत्ति अटैच

इन 11 मामलों में documented conviction नहीं हुई है।


यूपी पुलिस और आरओ-एआरओ मामला: ईडी की बड़ी कार्रवाई

उत्तर प्रदेश पुलिस कांस्टेबल भर्ती परीक्षा 2023 और आरओ-एआरओ परीक्षा 2023 के पेपर लीक मामलों में ईडी ने कथित धन के लेन-देन की जांच की। जनवरी 2026 में ईडी ने 18 आरोपियों के खिलाफ पूरक अभियोजन शिकायत दाखिल की। जांच में करीब 1.02 करोड़ रुपये की कथित अपराध से अर्जित आय से जुड़ी संपत्तियों को अस्थायी रूप से जब्त किए जाने का उल्लेख है। ईडी ने इससे पहले रवि अत्री और सुभाष प्रकाश को गिरफ्तार किया था तथा सात आरोपियों के खिलाफ अभियोजन शिकायत दाखिल की थी। लेकिन यहां भी गिरफ्तारी, संपत्ति जब्ती या अभियोजन शिकायत को अदालत की दोषसिद्धि नहीं माना जा सकता।


148 मामलों में सिर्फ एक सत्यापित दोषसिद्धि

इसी व्यापक अध्ययन के अनुसार, वर्ष 2005 से मई 2026 तक देश में 220 परीक्षा धांधली के मामले दर्ज किए गए। इनमें 2015 के बाद 148 मामले बताए गए हैं। अध्ययन के अनुसार, पूरे पोस्ट-2015 आंकड़ों में सिर्फ एक सत्यापित दोषसिद्धि मिली। यह मामला हरियाणा न्यायिक सेवा 2017 से जुड़ा था और इसकी जांच सीबीआई ने नहीं, बल्कि चंडीगढ़ विशेष जांच दल ने की थी।

कई मामलों में:

  • जांच अभी जारी है;
  • आरोपपत्र दाखिल हो चुका है;
  • मुकदमा अदालत में लंबित है;
  • आरोपी जमानत पर हैं;
  • कुछ मामलों में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल हुई है;
  • जबकि कुछ मामलों में प्राथमिकी या आरोप अदालत द्वारा रद्द भी किए गए हैं।

सवाल सिर्फ पेपर लीक का नहीं, जवाबदेही का भी

पेपर लीक के खिलाफ गिरफ्तारियां, आरोपपत्र, संपत्ति जब्ती और जांच ये सभी कार्रवाई का हिस्सा हैं। लेकिन किसी भी आपराधिक मामले का अंतिम परिणाम अदालत की दोषसिद्धि से तय होता है। 2005 से 2026 के उपलब्ध संकलित आंकड़े बताते हैं कि परीक्षा धांधली के मामलों की संख्या और अंतिम दोषसिद्धि के बीच बड़ा अंतर मौजूद है।

2015 के बाद 148 परीक्षा धांधली मामलों में सिर्फ एक सत्यापित दोषसिद्धि, सीबीआई की कम से कम 17 पोस्ट-2015 जांचों में शून्य दस्तावेजीकृत दोषसिद्धि और ईडी के 11 पीएमएलए से जुड़े मामलों में शून्य दस्तावेजीकृत दोषसिद्धि ये आंकड़े परीक्षा व्यवस्था में केवल पेपर की सुरक्षा ही नहीं, बल्कि जांच से लेकर अदालत के अंतिम फैसले तक पूरी आपराधिक जवाबदेही की प्रक्रिया पर भी गंभीर सवाल खड़े करते हैं।

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