23 नए आतंकियों को केंद्र ने घोषित किया, अब सूची में 80 नाम: 17 पाकिस्तान से, 6 जम्मू-कश्मीर के

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CENTRAL NEWS DESK: केंद्र सरकार ने आतंकवाद के खिलाफ अपनी कार्रवाई को और तेज करते हुए शनिवार को 23 नए लोगों को आधिकारिक तौर पर आतंकी घोषित कर दिया। गृह मंत्रालय के अनुसार, ये सभी जैश-ए-मोहम्मद, लश्कर-ए-तैयबा, द रेजिस्टेंस फ्रंट और जमात-उद-दावा जैसे प्रतिबंधित आतंकी संगठनों से जुड़े रहे हैं और भारत विरोधी आतंकी गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभाते रहे हैं।

इन 23 नामों के जुड़ने के बाद अब केंद्र सरकार द्वारा घोषित व्यक्तिगत आतंकियों की कुल संख्या बढ़कर 80 हो गई है। सरकार का कहना है कि इन लोगों की भूमिका आतंकियों की भर्ती, घुसपैठ, हथियारों की सप्लाई, आतंकी फंडिंग, साजिश रचने और सीमा पार से आतंक फैलाने जैसी गतिविधियों में रही है।

17 पाकिस्तान से, 6 जम्मू-कश्मीर के निवासी

सरकार द्वारा घोषित 23 आतंकियों में 17 पाकिस्तान से जुड़े हैं। इनमें 10 पाकिस्तान के विभिन्न इलाकों में रह रहे हैं, जबकि 7 पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) में सक्रिय बताए गए हैं। इसके अलावा 6 आतंकी जम्मू-कश्मीर के मूल निवासी हैं, जो बाद में पाकिस्तान समर्थित आतंकी संगठनों से जुड़ गए।

जांच एजेंसियों के मुताबिक ये सभी लंबे समय से भारत विरोधी नेटवर्क का हिस्सा रहे हैं और कई आतंकी मॉड्यूल को संचालित करने में इनकी भूमिका सामने आई है।

नगरोटा और सुनजवां हमलों से जुड़े आरोपी भी सूची में

गृह मंत्रालय के अनुसार, सूची में शामिल कुछ आतंकी 2016 के नगरोटा आर्मी कैंप हमले और 2022 के सुनजवां आतंकी हमले से जुड़े रहे हैं। 29 नवंबर 2016 को जम्मू के नगरोटा आर्मी कैंप पर सेना की वर्दी पहनकर आए आतंकियों ने हमला किया था। इस हमले में 7 भारतीय जवान शहीद हुए थे। बाद में सुरक्षाबलों ने तीनों आतंकियों को मार गिराया था। जांच में इस हमले के पीछे जैश-ए-मोहम्मद की साजिश सामने आई थी।

इसके बाद 22 अप्रैल 2022 को जम्मू के सुनजवां इलाके में सीआईएसएफ जवानों को ले जा रही बस पर आतंकियों ने हमला किया था। इस हमले में एक जवान शहीद हुआ था जबकि कई अन्य घायल हुए थे। इस हमले की जिम्मेदारी द रेजिस्टेंस फ्रंट (टीआरएफ) ने ली थी। जांच एजेंसियों ने बाद में सीमा पार बैठे आतंकियों की भूमिका की पुष्टि की थी।

किन गतिविधियों में शामिल थे घोषित आतंकी

सरकार के अनुसार सूची में शामिल लोग कई गंभीर गतिविधियों में शामिल रहे हैं, जिनमें

  • आतंकियों की भर्ती करना
  • सीमा पार से घुसपैठ कराना
  • आतंकी हमलों की योजना बनाना
  • हथियार और गोला-बारूद पहुंचाना
  • आतंकियों को आर्थिक मदद उपलब्ध कराना
  • आतंकी नेटवर्क को लॉजिस्टिक सपोर्ट देना
  • भारत में स्लीपर सेल सक्रिय करना

किस कानून के तहत घोषित किया जाता है आतंकी

केंद्र सरकार किसी व्यक्ति को गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) 1967 के तहत आतंकी घोषित करती है। 2019 में यूएपीए में संशोधन के बाद सरकार को यह अधिकार मिला कि वह केवल संगठनों ही नहीं, बल्कि किसी व्यक्ति को भी सीधे आतंकी घोषित कर सकती है।

किसके पास है अधिकार

किसी व्यक्ति को आतंकी घोषित करने का अधिकार केंद्रीय गृह मंत्रालय के पास होता है। गृह मंत्रालय अधिसूचना जारी कर संबंधित व्यक्ति का नाम यूएपीए की चौथी अनुसूची में शामिल करता है।

आतंकी घोषित होने के बाद क्या होता है

किसी व्यक्ति को आतंकी घोषित किए जाने के बाद

  • उसकी संपत्ति जब्त या फ्रीज की जा सकती है।
  • बैंक खातों और आर्थिक लेन-देन पर निगरानी रखी जाती है।
  • उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई तेज हो जाती है।
  • अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उसकी गतिविधियों की जानकारी साझा की जा सकती है।
  • सुरक्षा एजेंसियों को कार्रवाई के लिए अतिरिक्त कानूनी अधिकार मिल जाते हैं।

फैसले को चुनौती देने का अधिकार

कानून के अनुसार संबंधित व्यक्ति पहले केंद्र सरकार से अपना नाम सूची से हटाने की मांग कर सकता है। यदि मांग खारिज होती है तो वह रिव्यू कमेटी और उसके बाद अदालत का दरवाजा खटखटा सकता है। हालांकि पाकिस्तान में मौजूद घोषित आतंकियों के मामलों में इस प्रक्रिया का व्यावहारिक महत्व बेहद सीमित माना जाता है।

सरकार का कहना है कि आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति के तहत ऐसी कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी और देश की सुरक्षा के लिए सक्रिय आतंकी नेटवर्क पर लगातार सख्त कार्रवाई की जाएगी।

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