ईरान संकट ने हिला दिया दुनिया का तेल बाजार! 1979 के ऑयल शॉक से कितना बड़ा है मौजूदा संकट, जानिए पूरी तुलना

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CENTRAL NEWS DESK: ईरान में जारी युद्ध ने वैश्विक ऊर्जा बाजार को गहरे संकट में डाल दिया है। तेल की सप्लाई में आई भारी गिरावट के बाद अब इसकी तुलना वर्ष 1979 की ईरानी क्रांति के दौरान आए ऐतिहासिक ऑयल शॉक से की जा रही है। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि मौजूदा संकट कई मायनों में पहले के सभी ऊर्जा संकटों से अलग और कहीं ज्यादा व्यापक है।

रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, मौजूदा ईरान युद्ध के दौरान रोजाना तेल उत्पादन में जितनी बड़ी गिरावट आई है, उतनी पहले कभी नहीं देखी गई। हालांकि कुल उत्पादन नुकसान के मामले में 1979 की ईरानी क्रांति अब भी सबसे बड़ा तेल संकट मानी जाती है।

14 मिलियन बैरल प्रतिदिन की सप्लाई हुई प्रभावित

इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी के अनुसार मौजूदा संकट के दौरान प्रतिदिन 1 करोड़ 40 लाख बैरल तेल की सप्लाई प्रभावित हुई। यह इस साल दुनिया की कुल तेल मांग का लगभग 13.6 प्रतिशत है।

तुलना करें तो

  • 1973 अरब ऑयल एम्बार्गो के दौरान 45 लाख बैरल प्रतिदिन
  • 1979 ईरानी क्रांति के दौरान 56 लाख बैरल प्रतिदिन
  • 1991 खाड़ी युद्ध के दौरान 43 लाख बैरल प्रतिदिन

की सप्लाई प्रभावित हुई थी।

सिर्फ तेल नहीं, गैस और डीजल पर भी बड़ा असर

इस बार का संकट सिर्फ कच्चे तेल तक सीमित नहीं है। ईरान युद्ध के कारण प्राकृतिक गैस, डीजल, जेट फ्यूल और उर्वरक की सप्लाई भी प्रभावित हुई है। कतर की लगभग 20 प्रतिशत एलएनजी उत्पादन क्षमता भी बाधित हुई, जिससे यूरोप, एशिया और अफ्रीका के कई देशों में ऊर्जा संकट गहरा गया।

इतिहास के सबसे बड़े ऊर्जा संकटों में शामिल

रिपोर्ट के अनुसार मई से जून के बीच लगभग 35 दिनों में करीब 1.5 अरब बैरल तेल की सप्लाई बाजार से गायब हो गई। हालांकि 1979 की ईरानी क्रांति के दौरान तीन वर्षों में लगभग 4.3 अरब बैरल तेल उत्पादन प्रभावित हुआ था, जो अब भी सबसे बड़ा संचयी नुकसान माना जाता है।

1973 और 1991 के संकट से भी बड़ा असर

1973 के अरब ऑयल एम्बार्गो के दौरान लगभग 53 से 65 करोड़ बैरल तेल की सप्लाई प्रभावित हुई थी, जबकि 1991 के खाड़ी युद्ध में करीब 51 करोड़ बैरल उत्पादन प्रभावित हुआ था। मौजूदा ईरान संकट इन दोनों घटनाओं से कहीं बड़ा साबित हुआ है।

रणनीतिक भंडार से निकाला गया रिकॉर्ड तेल

बाजार को स्थिर रखने के लिए इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी ने सदस्य देशों के रणनीतिक भंडार से रिकॉर्ड 40 करोड़ बैरल तेल जारी किया है, ताकि मध्य पूर्व से कम हुई सप्लाई की भरपाई की जा सके।

आगे भी बनी रह सकती है चुनौती

विशेषज्ञों का मानना है कि युद्धविराम के बावजूद तेल और गैस की सप्लाई सामान्य होने में कई महीने लग सकते हैं। प्राकृतिक गैस क्षेत्र में इसका असर वर्षों तक बना रह सकता है। ऐसे में वैश्विक ऊर्जा बाजार पर महंगाई और सप्लाई संकट का दबाव आने वाले समय में भी जारी रह सकता है।

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