जंतर-मंतर पर पेपर लीक के खिलाफ सोनम वांगचुक की अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू, दिल्ली पुलिस पर आरोप

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  • देश में लगातार सामने आ रहे पेपर लीक और छात्रों से जुड़े अन्य गंभीर मुद्दों को लेकर ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) का प्रदर्शन
  • शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर सरकार की ओर से कोई ठोस प्रतिक्रिया या कदम न उठाए जाने के विरोध में आंदोलन को और तेज कर दिया

Central News Desk: राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली का ऐतिहासिक धरना स्थल जंतर-मंतर एक बार फिर देश के सबसे बड़े छात्र आंदोलन का गवाह बनने जा रहा है। देश में लगातार सामने आ रहे पेपर लीक और छात्रों से जुड़े अन्य गंभीर मुद्दों को लेकर ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) का प्रदर्शन अब एक बेहद संवेदनशील और निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर सरकार की ओर से कोई ठोस प्रतिक्रिया या कदम न उठाए जाने के विरोध में आंदोलन को और तेज कर दिया गया है।

छात्रों की इस लड़ाई को नई धार देने के लिए देश के प्रसिद्ध क्लाइमेट चेंज एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक रविवार, 28 जून 2026 से जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठ गए हैं। इस बड़े घटनाक्रम की पुष्टि खुद सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने की है।

अनशन शुरू होते ही खड़ा हुआ नया विवाद: दिल्ली पुलिस पर गंभीर आरोप

जंतर-मंतर पर सोनम वांगचुक के अनशन की शुरुआत के साथ ही प्रशासनिक और राजनीतिक मोर्चे पर विवाद गहरा गया है। सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर सिलसिलेवार पोस्ट साझा करते हुए दिल्ली पुलिस के रवैये पर बेहद गंभीर सवाल उठाए हैं।

अभिजीत दीपके का दावा है कि जैसे ही सोनम वांगचुक भूख हड़ताल पर बैठे, वैसे ही दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर पर साफ-सफाई की व्यवस्था को ठप कर दिया और वहां का पानी का कनेक्शन भी काट दिया।

आयोजकों की मुख्य चिंताएं:

सेहत का हवाला: सोनम वांगचुक की बढ़ती उम्र और उनके स्वास्थ्य से जुड़ी चिंताओं को लेकर पुलिस प्रशासन को बार-बार अवगत कराया गया, लेकिन कोई सहयोग नहीं मिला।

मौलिक अधिकारों का हनन: प्रदर्शनकारियों को अंदेशा है कि आने वाले दिनों में बिजली और अन्य बुनियादी नागरिक सुविधाएं भी पूरी तरह से रोक दी जाएंगी।

प्रशासन से सीधा सवाल: सोशल मीडिया पर दीपके ने पूछा है कि आखिर बुनियादी जरूरतें रोककर दिल्ली पुलिस इस संवेदनशील आंदोलन को किस दिशा में ले जाना चाहती है?

किसान नेताओं को नजरबंद करने का दावा और राजघाट पर गांधी जी का आशीर्वाद

इस भूख हड़ताल के औपचारिक आगाज से पहले दिल्ली की सीमाओं और पड़ोसी राज्यों में भारी प्रशासनिक हलचल देखने को मिली। अभिजीत दीपके ने आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश, हरियाणा और पंजाब के कई प्रमुख किसान नेताओं को प्रशासन द्वारा उनके घरों में ही नजरबंद (House Arrest) किया जा रहा है, ताकि वे इस छात्र आंदोलन को समर्थन देने जंतर-मंतर न पहुंच सकें।

अनशन स्थल पर बैठने से ठीक पहले सोनम वांगचुक और अभिजीत दीपके राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की समाधि स्थल, राजघाट पहुंचे। वहां उन्होंने बापू को नमन कर उनका आशीर्वाद लिया और देश के करोड़ों युवाओं व छात्रों को न्याय दिलाने के दृढ़ संकल्प के साथ अपनी इस अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल की शुरुआत की।

छात्रों का भविष्य बनाम प्रशासनिक रवैया एक तरफ जहां पेपर लीक और कड़े कानूनों की मांग को लेकर देश का युवा वर्ग आक्रोशित है और उनकी आवाज बनकर सोनम वांगचुक जैसे बड़े चेहरे मैदान में उतर चुके हैं, वहीं दूसरी तरफ अनशन स्थल पर पानी और सफाई जैसी जरूरी सुविधाएं रोकने के दावों ने प्रशासनिक संवेदनशीलता पर बड़े सवालिया निशान लगा दिए हैं। यह आंदोलन अब केवल छात्रों की मांगों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह लोकतांत्रिक अधिकारों और प्रशासनिक कार्रवाई के बीच की एक बड़ी जंग का रूप लेता जा रहा है।

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