12 राज्यों में वोटर लिस्ट से 6.08 करोड़ नाम हटे, यूपी में सबसे ज्यादा 2.04 करोड़ वोटर बाहर

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CENTRAL NEWS DESK: चुनाव आयोग के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) के दूसरे फेज के तहत देश के 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में मतदाता सूची का व्यापक पुनरीक्षण पूरा कर लिया गया है। इस प्रक्रिया के बाद सामने आए आंकड़े बेहद चौंकाने वाले हैं, क्योंकि कुल 6.08 करोड़ नाम वोटर लिस्ट से हटा दिए गए हैं। इसके चलते इन राज्यों में कुल मतदाताओं की संख्या में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है।

कुल मतदाता संख्या में बड़ी गिरावट

एसआईआर अभियान शुरू होने से पहले, 27 अक्टूबर तक इन 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में कुल मतदाता संख्या लगभग 51 करोड़ थी। लेकिन फाइनल लिस्ट जारी होने के बाद यह घटकर 44.92 करोड़ रह गई है। यानी करीब 6 करोड़ से अधिक मतदाताओं के नाम सूची से बाहर हो गए हैं। यह बदलाव चुनावी आंकड़ों में अब तक के सबसे बड़े संशोधनों में से एक माना जा रहा है।

उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा असर

इस पूरे अभियान का सबसे ज्यादा असर उत्तर प्रदेश में देखने को मिला है। राज्य में वोटरों की संख्या करीब 13% तक घट गई है। पहले जहां मतदाताओं की संख्या कहीं ज्यादा थी, अब यह घटकर 13.39 करोड़ रह गई है। इसका मतलब है कि करीब 2.04 करोड़ लोगों के नाम अंतिम वोटर लिस्ट से हटा दिए गए हैं। इतनी बड़ी संख्या में नाम हटने से राजनीतिक दलों और विश्लेषकों के बीच चर्चा तेज हो गई है।

पश्चिम बंगाल में भी बड़ी कटौती

उत्तर प्रदेश के बाद पश्चिम बंगाल दूसरा ऐसा राज्य है, जहां बड़ी संख्या में मतदाता सूची से नाम हटाए गए हैं। यहां करीब 91 लाख वोटर्स को अंतिम सूची से बाहर कर दिया गया है। यह आंकड़ा राज्य की राजनीति और आगामी चुनावों के समीकरणों को प्रभावित कर सकता है।

इन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में हुआ संशोधन

एसआईआर के दूसरे फेज में जिन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की वोटर लिस्ट अपडेट की गई है, उनमें उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, राजस्थान, छत्तीसगढ़, केरल, गुजरात, मध्य प्रदेश और गोवा शामिल हैं। इसके अलावा पुडुचेरी, अंडमान-निकोबार और लक्षद्वीप जैसे केंद्र शासित प्रदेशों में भी फाइनल मतदाता सूची प्रकाशित की गई है।

क्या है एसआईआर और क्यों जरूरी है यह प्रक्रिया

स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन एक विशेष अभियान होता है, जिसका उद्देश्य मतदाता सूची को पूरी तरह से शुद्ध और अद्यतन बनाना होता है। इस प्रक्रिया के दौरान मृत, स्थानांतरित या डुप्लीकेट मतदाताओं के नाम हटाए जाते हैं। इसके अलावा नए पात्र मतदाताओं को सूची में जोड़ा भी जाता है।

चुनाव आयोग का मानना है कि इस तरह की प्रक्रिया से चुनाव अधिक पारदर्शी, निष्पक्ष और विश्वसनीय बनते हैं। इससे यह सुनिश्चित किया जाता है कि केवल वास्तविक और पात्र मतदाता ही चुनाव में भाग लें।

विवाद और सवाल भी उठे

हालांकि, इतनी बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने के बाद इस पर सवाल भी उठने लगे हैं। कई राजनीतिक दलों और संगठनों का कहना है कि इतनी बड़ी कटौती के पीछे कारणों की स्पष्ट जानकारी दी जानी चाहिए। वहीं, कुछ लोगों ने आशंका जताई है कि कहीं पात्र मतदाताओं के नाम भी गलती से तो नहीं हट गए।

आने वाले चुनावों पर असर

विशेषज्ञों का मानना है कि इस बदलाव का असर आने वाले चुनावों पर साफ तौर पर दिखाई दे सकता है। खासकर उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल जैसे बड़े और राजनीतिक रूप से अहम राज्यों में मतदाता संख्या में इतनी बड़ी कमी चुनावी रणनीतियों को प्रभावित कर सकती है।

चुनाव आयोग का पक्ष

चुनाव आयोग ने साफ किया है कि यह पूरी प्रक्रिया पारदर्शी और नियमों के अनुसार की गई है। आयोग के अनुसार, इस अभियान का मकसद केवल मतदाता सूची को अधिक सटीक और त्रुटिरहित बनाना है, ताकि चुनाव प्रक्रिया की विश्वसनीयता बनी रहे।

SIR की प्रोसेस को 6 बातें जानें

1. SIR क्या है?

यह चुनाव आयोग की एक प्रक्रिया है। इसमें घर-घर जाकर लोगों से फॉर्म भरवाकर वोटर लिस्ट अपडेट की जाती है। 18 साल से ज्यादा के नए वोटरों को जोड़ा जाता है। ऐसे लोग जिनकी मौत हो चुकी है या जो दूसरी जगह शिफ्ट हो चुके हैं, उनके नाम हटाए जाते हैं। नाम, पते में गलतियों को भी ठीक किया जाता है।

2. पहले किस राज्य में हुआ?

पहले फेज में बिहार में हुआ। फाइनल लिस्ट में 7.42 करोड़ वोटर्स हैं। दूसरे फेज के तहत उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़, गोवा, गुजरात, मध्य प्रदेश, राजस्थान, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह और लक्षद्वीप में SIR की घोषणा हुई।

3. कौन करता है?

ब्लॉक लेवल ऑफिसर (BLO) और बूथ लेवल एजेंट (BLA) घर-घर जाकर वोटरों का वेरिफिकेशन करते हैं।

4. SIR में वोटर को क्या करना होगा?

SIR के दौरान BLO/BLA वोटर को फॉर्म देंगे। वोटर को उन्हें जानकारी मैच करवानी है। अगर दो जगह वोटर लिस्ट में नाम है तो उसे एक जगह से कटवाना होगा। अगर नाम वोटर लिस्ट में नहीं है तो जुड़वाने के लिए फॉर्म भरना होगा और संबंधित डॉक्यूमेंट्स देने होंगे।

5. SIR के लिए कौन से दस्तावेज मान्य?

पेंशनर पहचान पत्र

किसी सरकारी विभाग द्वारा जारी पहचान पत्र

जन्म प्रमाणपत्र

पासपोर्ट

10वीं की मार्कशीट

स्थायी निवास प्रमाणपत्र

वन अधिकार प्रमाणपत्र

जाति प्रमाणपत्र

राष्ट्रीय रजिस्टर (NRC) में नाम

परिवार रजिस्टर में नाम

जमीन या मकान आवंटन पत्र

आधार कार्ड

6. SIR का मकसद क्या है?

1951 से लेकर 2004 तक का SIR हो गया है, लेकिन पिछले 21 साल से बाकी है। इस लंबे दौर में मतदाता सूची में कई परिवर्तन जरूरी हैं। जैसे लोगों का माइग्रेशन, दो जगह वोटर लिस्ट में नाम होना।

डेथ के बाद भी नाम रहना। विदेशी नागरिकों का नाम सूची में आ जाने पर हटाना। कोई भी योग्य वोटर लिस्ट में न छूटे और कोई भी अयोग्य मतदाता सूची में शामिल न हो।

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