10 ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था के लिए मजबूत कानून जरूरी: सीजेआई सूर्यकांत
सीजेआई सूर्यकांत ने स्पष्ट कहा कि देश को 10 ट्रिलियन डॉलर की इकॉनमी बनाने के लिए केवल पूंजी और नीतियों पर निर्भर नहीं रहना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि एक मजबूत, स्थिर और भरोसेमंद कानूनी व्यवस्था ही इस लक्ष्य को हासिल करने की असली नींव है। निवेशकों का भरोसा कानून की पारदर्शिता और स्थिरता पर टिका होता है, इसलिए इसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
लंबी अवधि के निवेश पर जोर
सीजेआई ने कहा कि भारत को अब ऐसे निवेश की जरूरत है जो सिर्फ त्वरित लाभ के लिए न हों, बल्कि लंबे समय तक टिकाऊ हों। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि बुनियादी ढांचे में पेंशन फंड का निवेश, तकनीकी कंपनियों द्वारा ज्ञान साझा करना और वैश्विक कंपनियों का सप्लाई चेन विकसित करना ये सभी दीर्घकालिक भरोसे पर आधारित कदम हैं।
उनके अनुसार, निवेशक सबसे पहले यह देखते हैं कि जिस देश में वे निवेश कर रहे हैं, वहां की कानूनी व्यवस्था भविष्य में भी निष्पक्ष, स्थिर और विश्वसनीय बनी रहेगी या नहीं। उन्होंने कहा कि सिर्फ अनुबंध का पालन ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि पूरे व्यावसायिक संबंध में भरोसा बनाए रखना भी जरूरी है।
बदलता व्यापारिक विवादों का स्वरूप
सीजेआई ने बताया कि पिछले दो दशकों में व्यापारिक विवादों का स्वरूप काफी बदल गया है। पहले विवाद मुख्यतः भुगतान या सप्लाई जैसे सीधे मुद्दों पर होते थे, लेकिन अब ये जटिल व्यावसायिक संबंधों से जुड़े होते हैं। जैसे-जैसे अर्थव्यवस्था का विस्तार हुआ है, विवाद भी अधिक जटिल होते गए हैं।
उन्होंने कहा कि अब कानून की भूमिका केवल समझौते तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि पूरे व्यापारिक संबंध के दौरान न्याय सुनिश्चित करना जरूरी है।
विवाद समाधान के तीन अहम स्तंभ
सीजेआई सूर्यकांत ने कानूनी व्यवस्था को प्रभावी बनाने के लिए तीन प्रमुख जरूरतें बताईं:
- स्थिरता: अलग-अलग परिस्थितियों में भी कानून के सिद्धांत एक समान लागू हों।
- पूर्व-निवारण की संस्कृति: विवाद होने से पहले ही उन्हें रोकने की सोच विकसित की जाए, जिसमें ईमानदारी से अनुबंध निभाने की भावना हो। मध्यस्थता को बढ़ावा देकर मुकदमों को अंतिम विकल्प बनाया जा सकता है।
- विशेषज्ञता: आधुनिक व्यापारिक विवादों की जटिलता को देखते हुए अलग-अलग क्षेत्रों में विशेषज्ञ ज्ञान जरूरी है, खासकर बुनियादी ढांचा, वित्त और डिजिटल क्षेत्र में।
तकनीक की भूमिका और सीमाएं
सीजेआई ने कहा कि तकनीक को कानूनी व्यवस्था का अभिन्न हिस्सा बनाया जाना चाहिए। डिजिटल केस मैनेजमेंट, कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित शोध और इलेक्ट्रॉनिक प्रक्रियाएं न्याय प्रक्रिया को तेज और सस्ता बना सकती हैं।
हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि तकनीक केवल एक साधन है, अंतिम निर्णय हमेशा मानवीय समझ और न्याय पर आधारित होगा। तकनीक का उद्देश्य केवल प्रक्रिया को सरल और प्रभावी बनाना है।
वकीलों की भूमिका भी अहम
अपने संबोधन के अंत में सीजेआई ने वकीलों की भूमिका पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि वकीलों को खुद को केवल सेवा प्रदाता नहीं, बल्कि देश के आर्थिक भविष्य के साझेदार के रूप में देखना चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि जो पीढ़ी भारत की 10 ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था के लिए वाणिज्यिक कानून को आकार देगी, उसे उसी तरह याद किया जाएगा जैसे संविधान निर्माण करने वाली पीढ़ी को याद किया जाता है।
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