गजब है! वोट चोरी पर राहुल गांधी का दावा निकला बेअसर, अपने ही सत्याग्रह वेबसाइट पर 32,107 में सिर्फ 435 मामले
CENTRAL NEWS DESK: कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी लगातार ‘वोट चोरी’ के मुद्दे को लेकर केंद्र सरकार और चुनाव आयोग पर सवाल उठाते रहे हैं। लेकिन कांग्रेस की ओर से शुरू किए गए सत्याग्रह प्लेटफॉर्म पर दर्ज आंकड़े इस मुद्दे की तस्वीर कुछ अलग दिखा रहे हैं। प्लेटफॉर्म पर अब तक दर्ज 32 हजार से ज्यादा प्रविष्टियों में वोट चोरी से जुड़ी शिकायतों की संख्या काफी कम है।
32 हजार से ज्यादा लोगों ने दर्ज कराए अपने मुद्दे
राहुल गांधी ने 3 अक्टूबर को ‘सत्याग्रह’ प्लेटफॉर्म की शुरुआत की थी। इसका उद्देश्य देश के अलग-अलग हिस्सों में अपने अधिकारों और विभिन्न समस्याओं को लेकर संघर्ष कर रहे लोगों को एक साझा मंच उपलब्ध कराना बताया गया था। प्लेटफॉर्म पर खबर लिखे जाने तक देशभर से 32,107 प्रविष्टियां दर्ज की गई थीं। इनमें लोगों ने शिक्षा, भ्रष्टाचार, जातीय भेदभाव, स्वास्थ्य, किसान, महिला सुरक्षा और जमीन से जुड़े अधिकारों सहित कई मुद्दों को सामने रखा।
हालांकि, इन प्रविष्टियों में वोट चोरी से संबंधित सिर्फ 435 शिकायतें दर्ज हुईं। आंकड़ों के अनुसार वोट चोरी का मुद्दा शीर्ष 13 मुद्दों में 11वें स्थान पर रहा।
शिक्षा सबसे बड़ा मुद्दा, भ्रष्टाचार दूसरे नंबर पर
सत्याग्रह प्लेटफॉर्म के आंकड़ों में शिक्षा तक पहुंच सबसे बड़ा मुद्दा बनकर सामने आया। इससे संबंधित 5,654 प्रविष्टियां दर्ज हुईं। इसके बाद भ्रष्टाचार का मुद्दा रहा, जिसको लेकर 5,363 प्रविष्टियां दर्ज की गईं। वहीं जातीय भेदभाव से जुड़ी 2,489 प्रविष्टियां सामने आईं। इसके अलावा स्वास्थ्य सुविधाओं तक पहुंच को लेकर भी बड़ी संख्या में लोगों ने अपनी बात रखी। स्वास्थ्य से संबंधित 2,412 प्रविष्टियां दर्ज की गईं।
इसके बाद श्रमिक अधिकार, किसान से जुड़े मुद्दे, महिला सुरक्षा और जमीन से जुड़े अधिकार जैसे विषय भी लोगों की प्राथमिकताओं में शामिल रहे।
राहुल गांधी ने किस मकसद से शुरू किया था प्लेटफॉर्म?
राहुल गांधी ने सत्याग्रह प्लेटफॉर्म लॉन्च करते हुए कहा था कि देश के अलग-अलग हिस्सों में लोग अपने अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन कई बार उनकी आवाज अकेले पड़ जाती है। उनका उद्देश्य ऐसे लोगों और उनके संघर्षों को एक मंच पर लाना है।
प्लेटफॉर्म के जरिए छात्रों, युवाओं, किसानों, आदिवासियों, दलितों, महिलाओं और दूसरे समुदायों से जुड़े मुद्दों को सामने लाने की कोशिश की गई है। इसके तहत 28 राज्यों और 8 केंद्र शासित प्रदेशों से लोगों की प्रविष्टियां दर्ज होने की बात सामने आई है।
ई-20 का मुद्दा भी आंकड़ों में पीछे
हाल के महीनों में ई-20 और पेट्रोल में इथेनाल मिश्रण का मुद्दा भी राजनीतिक बहस का हिस्सा रहा है। हालांकि सत्याग्रह प्लेटफॉर्म पर इससे जुड़ी प्रविष्टियों की संख्या भी काफी कम दिखाई देती है। प्लेटफॉर्म पर इथेनाल मिलावट से संबंधित करीब 150 प्रविष्टियां दर्ज हुईं। यानी यह मुद्दा भी दर्ज शिकायतों के लिहाज से सबसे निचले स्तर पर रहा।
आंकड़े क्या संकेत दे रहे हैं?
सत्याग्रह प्लेटफॉर्म के उपलब्ध आंकड़े यह जरूर दिखाते हैं कि वहां अपनी समस्याएं दर्ज कराने वाले लोगों के बीच शिक्षा, भ्रष्टाचार, जातीय भेदभाव और स्वास्थ्य जैसे मुद्दों की संख्या वोट चोरी की तुलना में काफी अधिक है।
हालांकि, इन प्रविष्टियों को पूरे देश की जनता की राय का अंतिम पैमाना मानना उचित नहीं होगा, क्योंकि यह आंकड़े सिर्फ उस प्लेटफॉर्म पर दर्ज शिकायतों और मुद्दों को दर्शाते हैं। फिर भी, राजनीतिक रूप से यह आंकड़े कांग्रेस के ‘वोट चोरी’ अभियान को लेकर एक दिलचस्प तस्वीर जरूर पेश करते हैं।
Avneesh Mishra is a young and energetic journalist. He keeps a keen eye on sports, politics and foreign affairs. Avneesh has done Post Graduate Diploma in TV Journalism.
