देश में चीनी की कमी का डर! 10 साल बाद आयात की तैयारी, डीलर्स के स्टॉक पर भी सख्ती

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CENTRAL NEWS DESK: भारत दुनिया के बड़े चीनी उत्पादक देशों में शामिल है, लेकिन घरेलू बाजार में कीमतों में लगातार तेजी के बीच चीनी की उपलब्धता को लेकर चिंता बढ़ गई है। मार्च के बाद से कीमतों में बढ़ोतरी देखी गई है और हाल के दिनों में यह तेजी और ज्यादा हुई है। ऐसे में सरकार ने जमाखोरी और कालाबाजारी पर लगाम लगाने के लिए स्टॉक लिमिट को और सख्त करने का फैसला किया है।

30 दिन की लिमिट के बाद अब 15 दिन का स्टॉक

पहले व्यापारियों और डीलर्स के लिए किसी भी समय 30 दिन से ज्यादा का स्टॉक नहीं रखने की सीमा लागू की गई थी। इसके बावजूद कीमतों में करीब 10% तक की तेजी देखने को मिली। अब थोक उपभोक्ताओं के लिए अस्थायी तौर पर स्टॉक सीमा घटाकर 15 दिन की खपत तक कर दी गई है। यह नियम 1 सितंबर से 30 नवंबर 2026 तक लागू रहने की बात कही गई है।

क्या भारत में सचमुच चीनी खत्म हो रही है?

ऐसा कहना सही नहीं होगा कि देश में चीनी पूरी तरह खत्म हो गई है। चिंता मुख्य रूप से घरेलू सप्लाई, उपलब्ध स्टॉक और बढ़ती कीमतों को लेकर है। इंडस्ट्री से जुड़े अनुमानों के मुताबिक, 30 सितंबर तक देश में करीब 32-35 लाख टन चीनी का स्टॉक बच सकता है। नए सीजन से पहले यह उपलब्धता दबाव में आ सकती है।

10 साल बाद ड्यूटी फ्री इंपोर्ट की चर्चा

घरेलू बाजार में पर्याप्त सप्लाई बनाए रखने के लिए सरकार करीब एक दशक बाद चीनी के ड्यूटी फ्री आयात पर विचार कर रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, आयात के जरिए बाजार में अतिरिक्त चीनी उपलब्ध कराने और कीमतों पर दबाव कम करने की कोशिश हो सकती है।

भारत खुद बड़ा चीनी उत्पादक, फिर आयात की जरूरत क्यों?

भारत दुनिया के सबसे बड़े चीनी उत्पादकों और निर्यातकों में शामिल है। लेकिन घरेलू खपत बहुत ज्यादा होने के कारण उत्पादन और उपलब्ध स्टॉक में मामूली दबाव भी कीमतों को प्रभावित कर सकता है। ऐसे में सरकार का फोकस फिलहाल घरेलू सप्लाई बनाए रखने और त्योहारी सीजन में कीमतों को काबू में रखने पर है।

सरकार की नजर जमाखोरी पर

स्टॉक लिमिट का एक बड़ा मकसद जमाखोरी और कालाबाजारी को रोकना है। सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि सीमित उपलब्धता का फायदा उठाकर व्यापारी जरूरत से ज्यादा स्टॉक जमा न करें और बाजार में कृत्रिम कमी पैदा न हो। यानी फिलहाल देश में चीनी खत्म होने की स्थिति नहीं है, लेकिन स्टॉक और कीमतों को लेकर सरकार सतर्क है। जरूरत पड़ने पर आयात और सख्त स्टॉक लिमिट जैसे कदमों से घरेलू बाजार में सप्लाई बनाए रखने की कोशिश की जा रही है।

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