SIR विवाद पर ECI का करारा जवाब: चिदंबरम के दावों को बताया भ्रामक, तमिलनाडु में प्रक्रिया अभी शुरू ही नहीं

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Central News Desk: पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम द्वारा बिहार में SIR (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) को लेकर लगाए गए आरोपों पर अब चुनाव आयोग (ECI) ने सार्वजनिक रूप से प्रतिक्रिया दी है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि चिदंबरम द्वारा किए गए दावे तथ्यात्मक रूप से गलत और गुमराह करने वाले हैं। ECI ने कहा कि चुनावी प्रक्रिया के बारे में झूठ फैलाकर लोगों को भ्रमित करना दुर्भाग्यपूर्ण है।


संविधान क्या कहता है?

चुनाव आयोग ने अपने बयान में भारत के संविधान का उल्लेख करते हुए कहा कि अनुच्छेद 19(1)(e) के तहत सभी नागरिकों को देश के किसी भी हिस्से में रहने और बसने का अधिकार है। इसके साथ ही, जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1950 की धारा 19(b) के अनुसार कोई भी व्यक्ति जिसकी “सामान्य निवास स्थली” किसी निर्वाचन क्षेत्र में है, वहां मतदाता बन सकता है।

आयोग ने आगे स्पष्ट किया कि धारा 20 के तहत “सामान्य निवासी” की जो परिभाषा दी गई है, वह इस बात की अनुमति देती है कि अगर कोई तमिलनाडु से दिल्ली गया है, तो वह दिल्ली का मतदाता हो सकता है, और यदि कोई बिहार से चेन्नई में रहता है, तो चेन्नई में वोट डालने का हकदार हो सकता है।


क्या है चिदंबरम का आरोप?

चिदंबरम ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट के माध्यम से आरोप लगाया था कि बिहार में 65 लाख मतदाताओं के नाम हटाए जा रहे हैं और तमिलनाडु में 6.5 लाख नए मतदाताओं को जोड़ा गया है, जो उनके अनुसार गैरकानूनी और चुनावी हेरफेर है।
उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि यदि प्रवासी मजदूर छठ पूजा पर बिहार लौटते हैं, तो उन्हें बिहार में मतदान से क्यों रोका जा रहा है, और अगर उनका परिवार बिहार में है, तो उन्हें तमिलनाडु में वोट देने का हक कैसे मिल रहा है?


चुनाव आयोग ने क्या जवाब दिया?

ECI ने चिदंबरम के दावों पर तत्काल प्रतिक्रिया देते हुए उनके पोस्ट को झूठा, भ्रामक और तथ्यहीन करार दिया।
आयोग ने स्पष्ट किया: तमिलनाडु में SIR की प्रक्रिया अभी शुरू ही नहीं हुई है। बिहार में जो भी संशोधन प्रक्रिया चल रही है, उसे तमिलनाडु से जोड़ना पूरी तरह अनुचित है। 6.5 लाख नए मतदाताओं को जोड़ने का कोई तथ्यात्मक आधार नहीं है। SIR की प्रक्रिया राष्ट्रीय स्तर पर एक नियमित और पारदर्शी प्रक्रिया है, इसका कोई राजनीतिक मकसद नहीं होता।


प्रवासी मजदूरों पर आयोग की सफाई

चिदंबरम द्वारा प्रवासी मजदूरों को “स्थायी रूप से स्थानांतरित” बताए जाने पर आपत्ति के जवाब में आयोग ने कहा कि यह परिभाषा कानून में निर्धारित ‘सामान्य निवासी’ की व्याख्या के अनुसार दी गई है। आयोग ने कहा कि अगर कोई व्यक्ति किसी अन्य राज्य में काम, जीवन और भविष्य की योजना के लिए स्थायी रूप से स्थानांतरित होता है, तो वह उस राज्य में मतदाता बनने का अधिकारी है।


फेक न्यूज को लेकर चिंता

चुनाव आयोग ने कहा कि राजनीतिक नेताओं और मीडिया संस्थानों को जिम्मेदारी से व्यवहार करना चाहिए। ECI ने मीडिया से गैर-प्रमाणिक तथ्यों पर आधारित रिपोर्टिंग से बचने की अपील की है और कहा कि इससे चुनावी प्रक्रिया पर अविश्वास फैलता है।

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