उज्बेकिस्तान ने पीएम मोदी को दिया अपना सर्वोच्च सम्मान, यूरेनियम डील से परमाणु ऊर्जा को मिलेगी नई ताकत

0
modi-ani-1788084673796

CENTRAL NEWS DESK: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दो दिवसीय उज्बेकिस्तान यात्रा रविवार को कई अहम उपलब्धियों और समझौतों के साथ संपन्न हुई। यात्रा के दौरान भारत और उज्बेकिस्तान के बीच यूरेनियम की दीर्घकालिक आपूर्ति को लेकर सहमति बनी। यह समझौता भारत की बढ़ती परमाणु ऊर्जा जरूरतों के लिहाज से रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

यात्रा की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक प्रधानमंत्री मोदी को उज्बेकिस्तान के सर्वोच्च राज्य सम्मान से सम्मानित किया जाना रहा। राष्ट्रपति शावकत मिर्जियोयेव ने उन्हें ‘ऑली दाराजली डस्टलिक’ सम्मान प्रदान किया। यह प्रधानमंत्री मोदी को मिलने वाला 36वां अंतरराष्ट्रीय सम्मान बताया गया है।

यूरेनियम सप्लाई पर बनी सहमति

प्रधानमंत्री मोदी ने दोनों देशों के बीच यूरेनियम की आपूर्ति को लेकर दीर्घकालिक व्यवस्था बनाने की पुष्टि की। उन्होंने कहा कि भारत इस दिशा में रणनीति के साथ आगे बढ़ेगा और एक ऐसी व्यवस्था तैयार की जाएगी, जिससे भविष्य में यूरेनियम की आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके।

भारत अपनी परमाणु ऊर्जा क्षमता बढ़ाने की दिशा में लगातार काम कर रहा है। ऐसे में यूरेनियम जैसे परमाणु ईंधन की स्थिर और दीर्घकालिक उपलब्धता बेहद महत्वपूर्ण है। उज्बेकिस्तान के साथ समझौता इसी जरूरत को पूरा करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।

पीएम मोदी को मिला उज्बेकिस्तान का सर्वोच्च सम्मान

राष्ट्रपति शावकत मिर्जियोयेव ने पीएम मोदी को अपने देश के सर्वोच्च राज्य सम्मान ‘ऑली दाराजली डस्टलिक’ से सम्मानित किया। यह सम्मान दोनों देशों के बीच मजबूत होते रणनीतिक और मैत्रीपूर्ण संबंधों का प्रतीक माना जा रहा है।सम्मान मिलने के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने उज्बेकिस्तान के नेतृत्व और वहां की जनता का आभार जताया।

व्यापार पहली बार 1 अरब डॉलर के पार

भारत और उज्बेकिस्तान के बीच आर्थिक संबंध भी तेजी से मजबूत हुए हैं। राष्ट्रपति मिर्जियोयेव के मुताबिक दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार पहली बार 1 अरब डॉलर से अधिक पहुंच गया है। उन्होंने यह भी बताया कि पिछले कुछ वर्षों में दोनों देशों के बीच संयुक्त उपक्रमों की संख्या में करीब सात गुना वृद्धि हुई है। इससे साफ है कि भारत-उज्बेकिस्तान संबंध अब केवल कूटनीति तक सीमित नहीं हैं, बल्कि कारोबार और निवेश के क्षेत्र में भी विस्तार कर रहे हैं।

‘सिस्टर सिटी’ और ‘सिस्टर स्टेट’ समझौतों पर भी काम

दोनों देशों ने ‘सिस्टर-सिटी’ और ‘सिस्टर-स्टेट’ साझेदारी से जुड़े तीन समझौतों को अंतिम रूप देने की दिशा में भी कदम बढ़ाए हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने जोर दिया कि इन समझौतों को केवल औपचारिक दस्तावेज बनाकर न छोड़ा जाए, बल्कि इनके लिए स्पष्ट रोडमैप तैयार किया जाए। इसका उद्देश्य दोनों देशों के शहरों और राज्यों के बीच सीधे सहयोग को बढ़ाना है, जिससे शिक्षा, संस्कृति, व्यापार, तकनीक और शहरी विकास जैसे क्षेत्रों में व्यावहारिक साझेदारी बढ़ सके।

‘नया ताशकंद’ के लिए भारत की GIFT City बनी मिसाल

बैठक के दौरान उज्बेकिस्तान में विकसित किए जा रहे ‘नया ताशकंद’ शहर का मुद्दा भी उठा। प्रधानमंत्री मोदी ने गुजरात की GIFT City को शहरी विकास और आधुनिक शहर निर्माण के क्षेत्र में अध्ययन के लिए एक उपयोगी मॉडल बताया। उन्होंने उज्बेकिस्तान के प्रतिनिधिमंडल को भारत आने का निमंत्रण दिया, ताकि वह GIFT City की योजना, तकनीक और विकास मॉडल को करीब से समझ सके।

दोनों देशों के बीच हर सप्ताह 14 सीधी उड़ानें

भारत और उज्बेकिस्तान के बीच लोगों की आवाजाही को बढ़ावा देने के लिए सीधी हवाई कनेक्टिविटी भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। राष्ट्रपति मिर्जियोयेव ने बताया कि दोनों देशों के बीच फिलहाल हर सप्ताह 14 सीधी उड़ानें संचालित हो रही हैं। इससे कारोबार, पर्यटन, शिक्षा और दोनों देशों के नागरिकों के बीच संपर्क को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

उज्बेकिस्तान ने भारत को बताया ‘विश्वसनीय रणनीतिक साझेदार’

राष्ट्रपति शावकत मिर्जियोयेव ने भारत को ‘विश्वसनीय रणनीतिक साझेदार’ बताया। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत की प्रगति की सराहना की और कहा कि एक करीबी मित्र के तौर पर उज्बेकिस्तान भारत की उपलब्धियों को देखकर खुश है। प्रधानमंत्री मोदी की इस यात्रा में परमाणु ऊर्जा, व्यापार, निवेश, शहरी विकास, हवाई संपर्क और स्थानीय स्तर पर साझेदारी जैसे कई मुद्दों पर चर्चा हुई।

भारत के लिए अहम है यह यात्रा

पीएम मोदी की उज्बेकिस्तान यात्रा को केवल एक राजनयिक दौरे के तौर पर नहीं देखा जा रहा है। यूरेनियम की दीर्घकालिक आपूर्ति, 1 अरब डॉलर से अधिक का द्विपक्षीय व्यापार, संयुक्त उपक्रमों में सात गुना वृद्धि और आधुनिक शहर निर्माण में सहयोग दोनों देशों के रिश्तों के बढ़ते दायरे को दिखाते हैं। खास तौर पर यूरेनियम सप्लाई को लेकर बनी सहमति भारत के परमाणु ऊर्जा क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण हो सकती है। आने वाले समय में इस समझौते की शर्तें और इसकी औपचारिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद इसके वास्तविक प्रभाव की तस्वीर और स्पष्ट होगी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *