कर्नाटक में मंत्री नागेंद्र का इस्तीफा: ऐलान करते ही रोने लगे, 2 साल में दूसरी बार पद से हटे, वाल्मीकि स्कैम को लेकर दबाव

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CENTRAL NEWS DESK: कर्नाटक में कांग्रेस नेता बी. नागेंद्र ने शुक्रवार को मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार की कैबिनेट से इस्तीफा दे दिया। इस्तीफे का ऐलान करते वक्त नागेंद्र भावुक हो गए और रोने लगे। वाल्मीकि निगम से जुड़े कथित 89 करोड़ रुपए के घोटाले को लेकर उन पर लगातार राजनीतिक दबाव बनाया जा रहा था।

नागेंद्र दो साल में दूसरी बार मंत्री पद से हटे हैं। इससे पहले जून 2024 में उन्होंने सिद्धारमैया सरकार में मंत्री पद से इस्तीफा दिया था। हालांकि, डीके शिवकुमार के मुख्यमंत्री बनने के बाद उन्हें 3 अगस्त 2026 को दोबारा कैबिनेट में शामिल किया गया था।

इस्तीफे का ऐलान करते हुए भावुक हुए नागेंद्र

नागेंद्र ने खुद को बेगुनाह बताते हुए कहा कि वाल्मीकि निगम मामले में उनकी कोई भूमिका नहीं है। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि उन्होंने न तो किसी दस्तावेज पर हस्ताक्षर किए और न ही किसी तरह का निर्देश या नोटशीट जारी की। उन्होंने कहा कि वह राजनीति में सांप्रदायिक और विभाजनकारी ताकतों को हावी नहीं होने देना चाहते। BJP पर निशाना साधते हुए नागेंद्र ने आरोप लगाया कि कुछ लोग नहीं चाहते कि कोई आदिवासी नेता आगे बढ़े।

नागेंद्र ने यह भी कहा कि अगर जरूरत पड़ी तो वह विधायक पद से भी इस्तीफा देने के लिए तैयार हैं और जनता की अदालत में जाने से पीछे नहीं हटेंगे।

क्या है 89 करोड़ रुपए का वाल्मीकि निगम मामला?

यह मामला कर्नाटक महर्षि वाल्मीकि अनुसूचित जनजाति विकास निगम में कथित वित्तीय अनियमितताओं से जुड़ा है। मई 2024 में निगम के अकाउंट्स ऑफिसर पी. चंद्रशेखरन ने आत्महत्या कर ली थी। उन्होंने एक नोट में निगम के फंड के कथित अनधिकृत ट्रांसफर का जिक्र किया था। इसके बाद हुई जांच में निगम के बैंक खातों से बड़ी रकम दूसरे खातों में ट्रांसफर किए जाने की बात सामने आई। मामला सामने आने के समय बी. नागेंद्र सिद्धारमैया सरकार में जनजातीय कल्याण मंत्री थे। विवाद बढ़ने के बाद नागेंद्र ने जून 2024 में मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था।

दो साल बाद फिर कैबिनेट में वापसी

मंत्री पद से हटने के करीब दो साल बाद नागेंद्र की दोबारा कैबिनेट में एंट्री हुई। डीके शिवकुमार के मुख्यमंत्री बनने के बाद 3 अगस्त 2026 को उन्हें फिर मंत्री बनाया गया। हालांकि, वाल्मीकि निगम मामले को लेकर विपक्ष लगातार उनकी वापसी का विरोध करता रहा। BJP और JDS ने नागेंद्र के इस्तीफे की मांग तेज कर दी थी।

विधानसभा सत्र में भी हुआ था हंगामा

वाल्मीकि निगम मामले को लेकर कर्नाटक विधानसभा के मानसून सत्र में भी जमकर हंगामा हुआ। BJP और JDS ने सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किए और नागेंद्र के इस्तीफे की मांग की। हंगामे के चलते विधानसभा का मानसून सत्र तय समय से तीन दिन पहले ही खत्म हो गया। 24 अगस्त को सदन को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया।

BJP-JDS की पदयात्रा का ऐलान

विपक्ष ने सरकार पर दबाव बढ़ाने के लिए सड़क पर उतरने का भी ऐलान किया है। BJP और JDS ने 1 से 10 सितंबर तक रायचूर से बल्लारी तक पदयात्रा निकालने की घोषणा की है। विपक्ष का आरोप है कि वाल्मीकि निगम के फंड के कथित डायवर्जन मामले में नागेंद्र की भूमिका की जांच होनी चाहिए। वहीं नागेंद्र लगातार इन आरोपों को खारिज करते रहे हैं।

दो साल में दूसरी बार इस्तीफा

बी. नागेंद्र के राजनीतिक सफर में यह दो साल के भीतर दूसरी बार है जब उन्हें मंत्री पद छोड़ना पड़ा है। 2024 में वाल्मीकि निगम मामले के बाद इस्तीफा देने वाले नागेंद्र को 2026 में दोबारा मंत्री बनाया गया था। अब एक बार फिर उसी मामले को लेकर बने दबाव के बीच उनका इस्तीफा कर्नाटक की राजनीति में चर्चा का विषय बन गया है।

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