बुलेटप्रूफ ग्लास हटाओ, वरना भाषण नहीं दूंगा: 2014 में पीएम मोदी ने सुरक्षा घेरे पर क्यों जताई थी आपत्ति?

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CENTRAL NEWS DESK: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2014 में अपने पहले स्वतंत्रता दिवस संबोधन से पहले लाल किले पर लगाए गए बुलेटप्रूफ ग्लास बैरियर को हटाने की मांग की थी। पूर्व रक्षा सचिव आर.के. माथुर ने इस घटना को याद करते हुए बताया कि सुरक्षा अधिकारियों ने प्रधानमंत्री को इस बैरियर की जरूरत के बारे में जानकारी दी थी, लेकिन मोदी ने इसके सामने रहते हुए जनता को संबोधित करने में असहजता जताई।

आर.के. माथुर के मुताबिक, 15 अगस्त से पहले उन्होंने और तत्कालीन इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) निदेशक ने प्रधानमंत्री को सुरक्षा व्यवस्था की जानकारी दी थी। इसी दौरान लाल किले की प्राचीर पर प्रधानमंत्री के सामने लगाए जाने वाले बुलेटप्रूफ ग्लास का मुद्दा उठा।

माथुर के अनुसार, प्रधानमंत्री ने कहा था कि अगर उनके सामने बुलेटप्रूफ ग्लास रहा तो वह नागरिकों को संबोधित नहीं कर पाएंगे। सुरक्षा अधिकारियों ने उन्हें समझाया कि लाल किले से चांदनी चौक का बड़ा इलाका दिखाई देता है और आसपास कई ऊंची इमारतें हैं, इसलिए सुरक्षा के लिहाज से यह व्यवस्था जरूरी थी।

इसके बावजूद प्रधानमंत्री अपने फैसले पर कायम रहे। माथुर ने बताया कि मोदी ने साफ कहा था कि अगर बुलेटप्रूफ शील्ड नहीं हटाई गई तो वह भाषण नहीं देंगे। इसके बाद सुरक्षा अधिकारियों ने अपना रुख बदला और 14-15 अगस्त की दरमियानी रात करीब 2 बजे बुलेटप्रूफ ग्लास शील्ड हटा दी गई।

यह घटना उस समय प्रधानमंत्री मोदी की सुरक्षा को लेकर एक अहम फैसला मानी गई, क्योंकि उन्होंने सुरक्षा व्यवस्था के बीच जनता से सीधे संवाद को प्राथमिकता दी थी।

माथुर के मुताबिक, यह फैसला बाद के वर्षों में भी उनके स्वतंत्रता दिवस संबोधन की शैली में दिखाई देता रहा। 15 अगस्त 2026 को भी प्रधानमंत्री ने लाल किले से भाषण के बाद स्कूली बच्चों, NCC कैडेट्स और ‘माई भारत’ के स्वयंसेवकों से मुलाकात की।

इसी दौरान एक छोटी बच्ची प्रधानमंत्री के पैर छूने के लिए झुकी तो उसके सिर से टोपी नीचे गिर गई। प्रधानमंत्री तुरंत झुके, टोपी उठाई और बच्ची के सिर पर वापस रख दी। इस दृश्य पर आसपास मौजूद बच्चों और लोगों के चेहरे पर मुस्कान आ गई और तालियां बजने लगीं।

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