IRCTC होटल भ्रष्टाचार मामला: लालू प्रसाद यादव को बड़ा झटका
अदालत ने दैनिक सुनवाई के खिलाफ याचिका खारिज की
Bihar News Desk: IRCTC होटल भ्रष्टाचार मामले में पूर्व रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव और उनकी पत्नी राबड़ी देवी को राउज एवेन्यू कोर्ट से बड़ा झटका लगा है. मंगलवार को अदालत ने दैनिक सुनवाई के खिलाफ उनकी याचिका खारिज कर दी। अदालत ने कहा कि यह याचिका “सुनवाई योग्य, व्यावहारिक या न्यायोचित नहीं है.”
अदालत ने कहा – “मामले में तेजी जरूरी”
विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने ने आदेश देते हुए कहा कि सांसदों और विधायकों से जुड़े मामलों की सुनवाई को लेकर सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के निर्देश साफ हैं ऐसे मामलों की सुनवाई दिन-प्रतिदिन होनी चाहिए ताकि न्याय प्रक्रिया में अनावश्यक देरी न हो।
बचाव पक्ष ने मांगा समय, अदालत ने किया इंकार
लालू यादव के वकीलों ने दलील दी कि मामले से जुड़े 18,000 दस्तावेज और 250 पन्नों का आरोप-पत्र आदेश है, जिन्हें पढ़ने और अध्ययन करने के लिए समय चाहिए।
हालांकि, अदालत ने कहा कि “गवाहों की जांच और जिरह पूरी होने तक सुनवाई प्रतिदिन जारी रहेगी।”
सीबीआई का तर्क – “तेजी से सुनवाई जरूरी”
सीबीआई के वरिष्ठ अधिवक्ता डी.पी. सिंह ने अदालत में कहा कि सत्र न्यायालयों के लिए प्रतिदिन सुनवाई अनिवार्य है, विशेषकर जब मामला सांसदों और विधायकों से जुड़ा हो। उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय के 9 नवंबर 2023 के आदेश का हवाला देते हुए कहा कि अदालत को स्वप्रेरणा से मामले को तेजी से निपटाना चाहिए।
यह मामला 2004 से 2009 के बीच लालू प्रसाद यादव के रेल मंत्री रहते हुए आईआरसीटीसी (IRCTC) के दो होटलों बीएनआर रांची और बीएनआर पुरी के रखरखाव टेंडर से जुड़ा है।
आरोप है कि इन होटलों का ठेका विजय और विनय कोचर की कंपनी ‘सुजाता होटल’ को दिया गया और इसके बदले में लालू यादव को बेनामी कंपनी के जरिए तीन एकड़ जमीन दी गई।
सीबीआई की कार्रवाई
सीबीआई ने इस मामले में 7 जुलाई 2017 को प्राथमिकी दर्ज की थी और पटना, रांची, नई दिल्ली व गुरुग्राम में लालू परिवार के 12 ठिकानों पर छापे मारे थे।एजेंसी ने अप्रैल 2018 में आरोप पत्र दाखिल किया। 13 अक्टूबर 2025 को अदालत ने लालू, राबड़ी, तेजस्वी यादव और अन्य के खिलाफ आपराधिक षड्यंत्र सहित कई धाराओं में आरोप तय किए थे।
अदालत का सख्त रुख
27 अक्टूबर के आदेश में अदालत ने कहा था कि आरोप तय करने और साक्ष्य प्रस्तुत करने के बीच कम समय होने पर भी अभियोजन पक्ष के गवाहों की जिरह शीघ्र पूरी की जानी चाहिए।
न्यायालय ने दोहराया “इस मामले को सप्ताह में एक बार नहीं, बल्कि प्रतिदिन सूचीबद्ध किया जाएगा।” अब अदालत में अभियोजन पक्ष के साक्ष्य और गवाहों की जिरह जारी रहेगी। इस केस के फैसले पर देशभर की निगाहें टिकी हैं, क्योंकि यह लालू परिवार से जुड़े सबसे चर्चित भ्रष्टाचार मामलों में से एक है।
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