बिहार चुनाव में घुसपैठ का मुद्दा बनेगा ‘हथियार’? पीएम मोदी के ऐलान से सीमांचल में सियासत गरमाई

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Central News Desk: बिहार विधानसभा चुनाव से पहले सीमांचल का इलाका एक बार फिर राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में आ गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूर्णिया की जनसभा से अवैध घुसपैठ पर बड़ा बयान देते हुए साफ कहा – “जो भी घुसपैठिया है, उसे बाहर जाना ही होगा। घुसपैठ पर ताला लगाना एनडीए सरकार की प्राथमिकताओं में है।”

पीएम ने यह भी जोड़ा कि घुसपैठ के कारण सीमांचल और पूर्वी भारत की डेमोग्राफी पर संकट खड़ा हो गया है। उन्होंने कांग्रेस और राजद पर हमला करते हुए कहा कि ये पार्टियां घुसपैठियों को बचाने और संरक्षण देने का काम कर रही हैं। मोदी ने कहा कि यह न केवल संसाधनों पर बोझ है बल्कि बेटियों और बहनों की सुरक्षा पर भी सीधा खतरा है।

सीमांचल: चुनावी गणित और घुसपैठ का सवाल

सीमांचल का इलाका—पूर्णिया, किशनगंज, कटिहार और अररिया—बिहार की राजनीति में हमेशा से अहम रहा है। 2011 की जनगणना के अनुसार यहां मुस्लिम आबादी लगभग 47% है। किशनगंज में यह 68%, कटिहार में 44.5%, अररिया में 43% और पूर्णिया में 38.5% तक पहुंचती है। यही वजह है कि घुसपैठ का मुद्दा यहां चुनावी हवा को तेजी से बदल सकता है।

बीजेपी लंबे समय से सीमांचल में बांग्लादेशी घुसपैठ का मुद्दा उठाती रही है। पार्टी के कई स्थानीय नेता शेरशाहबादी मुसलमानों को बांग्लादेशी बताते हैं, जबकि यह समुदाय खुद को भारतीय मानता है और उन्हें ईबीसी आरक्षण भी मिला है। इस विवादित विमर्श ने कई बार चुनावी माहौल को प्रभावित किया है।

बीजेपी की रणनीति और चुनावी गणित

सीमांचल मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्र जरूर है, लेकिन यहां बीजेपी और एनडीए का अच्छा-खासा दबदबा रहा है। 2020 विधानसभा चुनाव में इस इलाके की 24 में से 12 सीटें एनडीए ने जीती थीं। महागठबंधन को 7 और ओवैसी की पार्टी AIMIM को 5 सीटें मिली थीं। बीजेपी इस बार उसी प्रदर्शन को दोहराने की कोशिश कर रही है।

पूर्णिया एयरपोर्ट से पीएम की सभा आयोजित कर बीजेपी ने साफ संकेत दे दिया है कि सीमांचल अब उसकी चुनावी रणनीति का केंद्र है। साथ ही, पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष दिलीप जायसवाल का सीमांचल से आना भी संगठनात्मक तौर पर एक संदेश माना जा रहा है।

विशेषज्ञों की राय

वरिष्ठ पत्रकार रवि उपाध्याय के अनुसार, “घुसपैठ का मुद्दा उठाकर बीजेपी सिर्फ सीमांचल ही नहीं बल्कि पूरे बिहार के मतदाताओं को मैसेज देती है। पार्टी लगातार यह प्रचार करती है कि घुसपैठिए आम बिहारियों की नौकरी और संसाधन छीन रहे हैं। इससे घुसपैठ के खिलाफ खड़ा होना राज्यव्यापी मुद्दा बन जाता है।”

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