बिहार चुनाव 2025 : मगध का किला क्यों है NDA के लिए अहम?
Bihar News Desk: बिहार विधानसभा चुनाव का माहौल तेज हो गया है और सभी राजनीतिक दल अपनी-अपनी रणनीतियां बनाने में जुटे हैं। इस बार भी मगध क्षेत्र चुनावी राजनीति का केंद्र बना हुआ है। ऐतिहासिक और सांस्कृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण यह इलाका राजनीतिक समीकरणों में भी निर्णायक भूमिका निभाता है।
मगध में कुल 47 विधानसभा सीटें हैं। 2020 के चुनाव में यहां महागठबंधन को 30 सीटों पर जीत मिली थी, जबकि NDA केवल 17 सीटों पर सिमट गया था। यही कारण है कि इस बार NDA के लिए मगध को जीतना बेहद जरूरी हो गया है।
प्रशासनिक दृष्टि से मगध प्रमंडल में गया, नवादा, औरंगाबाद, जहानाबाद और अरवल जिले आते हैं। राजनीतिक मानचित्र में पटना और नालंदा को भी मगध में गिना जाता है। पिछले विधानसभा चुनाव में पटना, जहानाबाद, औरंगाबाद और अरवल जिले महागठबंधन के कब्जे में चले गए थे। गया में दोनों गठबंधन बराबरी पर रहे, जबकि नालंदा में NDA को बढ़त मिली थी।
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लोकसभा चुनाव 2024 में भी NDA को इस इलाके में करारा झटका लगा था। पाटलिपुत्र, जहानाबाद और औरंगाबाद की सीटें महागठबंधन ने जीत ली थीं।
चुनाव विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार भी जातीय समीकरण ही सबसे बड़ा फैक्टर रहेंगे। अनुसूचित जाति और कुशवाहा मतदाताओं की भूमिका निर्णायक होगी। महागठबंधन को माले और कांग्रेस के जरिए दलित वोटों में बढ़त मिलती है। दूसरी ओर, NDA मांझी और नीतीश कुमार की महादलित राजनीति पर भरोसा कर रहा है।
इसके साथ ही प्रशांत किशोर (PK) फैक्टर भी इस क्षेत्र में अहम साबित हो सकता है। PK किस तरह से उम्मीदवार उतारते हैं, इसका सीधा असर नतीजों पर पड़ेगा।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि “बिहार की सत्ता का रास्ता मगध से होकर ही गुजरता है।” यही वजह है कि NDA और महागठबंधन दोनों ही इस इलाके में जीत सुनिश्चित करने के लिए पूरी ताकत झोंक रहे हैं।
Avneesh Mishra is a young and energetic journalist. He keeps a keen eye on sports, politics and foreign affairs. Avneesh has done Post Graduate Diploma in TV Journalism.
