राष्ट्रीय अंडर-23 कुश्ती प्रतियोगिता में अलका तोमर बनीं आकर्षण का केंद्र, बेटियों को दी प्रेरणा

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Sport News Desk: रांची के खेलगांव में चल रही राष्ट्रीय अंडर-23 सीनियर पुरुष फ्रीस्टाइल, ग्रीको-रोमन शैली और महिला कुश्ती प्रतियोगिता 2025 का माहौल उस समय और खास हो गया, जब देश की पहली महिला अंतरराष्ट्रीय स्तर की नामचीन पहलवान और अर्जुन अवार्ड से सम्मानित अलका तोमर विशेष अतिथि के रूप में शामिल हुईं। मेरठ की यह बेटी न केवल अपने खेल से देश का नाम रोशन कर चुकी हैं बल्कि आज हजारों बेटियों के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं।

अलका तोमर का संघर्ष और सफर

मेरठ जिले के सिसौली गांव के किसान परिवार में जन्मी अलका ने उस समय कुश्ती की दुनिया में कदम रखा, जब ग्रामीण समाज में बेटियों का खेलों में उतरना आसान नहीं था। साल 1998 में उन्होंने चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय में कोच जबर सिंह सोम के मार्गदर्शन में अभ्यास शुरू किया। शुरूआती दिनों में समाज और रिश्तेदारों का विरोध झेलना पड़ा, लेकिन पिता और परिवार के सहयोग से उन्होंने हार नहीं मानी और अपनी मेहनत से अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचीं।

अंतरराष्ट्रीय उपलब्धियां

अलका ने जिला और राज्य स्तर से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक कई स्वर्ण और रजत पदक जीते। वर्ष 2006 में चीन में आयोजित विश्व कुश्ती चैंपियनशिप में उन्होंने भारत के लिए पहला अंतरराष्ट्रीय पदक जीतकर इतिहास रच दिया। इसके बाद कॉमनवेल्थ गेम्स, एशियन चैंपियनशिप और अन्य प्रतियोगिताओं में भी उन्होंने देश का गौरव बढ़ाया। ओलंपिक को छोड़कर लगभग हर बड़े टूर्नामेंट में उन्होंने मेडल अपने नाम किए। उनकी उपलब्धियों को देखते हुए 2010 में राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल ने उन्हें अर्जुन अवार्ड से सम्मानित किया।

बेटियों के लिए प्रेरणा

रांची में खास बातचीत के दौरान अलका ने कहा—
“आज सरकार और खेल संस्थाओं से भरपूर सहयोग मिल रहा है। बेटियों को चाहिए कि वे घर की दहलीज से निकलकर खेलों में भी अपनी पहचान बनाएं। लक्ष्य तय करें और मेहनत करें, कामयाबी जरूर मिलेगी।”

उन्होंने हरियाणा, पंजाब, यूपी और अब झारखंड से महिला पहलवानों के उभरने पर खुशी जताई और राज्य की प्रतिभाओं की सराहना की।

नई पीढ़ी के लिए कुश्ती अकादमी

हालांकि अलका को ओलंपिक खेलने का अवसर नहीं मिला, लेकिन अब उनका सपना है कि अगली पीढ़ी की बेटियां यह कमी पूरी करें। इसके लिए वह जल्द ही अपनी कुश्ती अकादमी खोलने जा रही हैं, जहां वह लड़कियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर के लिए तैयार करेंगी।

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