मिजोरम को मिला रेल संपर्क का बड़ा तोहफा

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Mijoram

—बैराबी-सैरांग ब्रॉड गेज लाइन जुलाई 2025 से होगी शुरू…..

—87 पुल ,32 सुरंगों और 42000 टन स्टील से तैयार हुआ मील का पत्थर…

—म्यांमार सीमा तक विस्तार की योजना…..

Central News Desk : पूर्वोत्तर भारत के पहाड़ी राज्य मिजोरम को जल्द ही देश के रेलवे नेटवर्क से सीधा जोड़ा जाने वाला है। मिजोरम की राजधानी आइजोल को ब्रॉड गेज रेलवे लाइन से जोड़ने वाली बैराबी-सैरांग रेलवे परियोजना जुलाई 2025 तक चालू कर दी जाएगी।

इस महत्त्वपूर्ण परियोजना से राज्य के आर्थिक विकास, पर्यटन और अन्य राज्यों से संपर्क को बल मिलेगा।करीब 10 साल में पूरा हुआ निर्माण कार्यकरीब 51.38 किलोमीटर लंबी इस परियोजना की शुरुआत वर्ष 2015 में हुई थी और अब इसका निर्माण कार्य पूर्ण हो चुका है। ₹8,213.72 करोड़ की लागत से बनी इस लाइन पर हाल ही में सफलतापूर्वक ट्रायल रन भी किया गया है।

नॉर्थ ईस्ट फ्रंटियर रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी किशोर शर्मा के अनुसार, फिलहाल रेलवे सुरक्षा निरीक्षण का कार्य चल रहा है और जुलाई 2025 में इसके यात्री सेवा के लिए शुरू होने की उम्मीद है।

भूगोलिक चुनौतियों से जूझती ऐतिहासिक परियोजना

यह रेलवे लाइन एक बेहद चुनौतीपूर्ण इलाके से होकर गुजरती है। पहाड़ी इलाका, लगातार बारिश और सीमित संसाधनों के बावजूद रेलवे ने इसे पूरा किया है। इस ट्रैक पर 87 छोटे-बड़े पुल, 32 सुरंगें (कुल लंबाई 12 किलोमीटर) और चार नए रेलवे स्टेशन – होर्टोकी, काउनपुई, मुअलखांग और सैरांग बनाए गए हैं। इस निर्माण में 42,000 मीट्रिक टन स्टील का उपयोग किया गया।

बैराबी से सैरांग तक, और आगे म्यांमार तक

गौरतलब है कि मिजोरम में वर्तमान में केवल एकमात्र रेलवे स्टेशन बैराबी है, जो आइजोल से करीब 90 किलोमीटर दूर है। अब यह नई रेलवे लाइन सैरांग तक पहुंचेगी, जो राजधानी से महज 21 किलोमीटर की दूरी पर है।

रेल मंत्रालय की योजना इस लाइन को और आगे भारत-म्यांमार सीमा पर स्थित ज़ोचाछुआ गांव तक बढ़ाने की है। राज्यसभा सदस्य के. वनलालवेना के अनुसार, इसके लिए प्रारंभिक सर्वेक्षण भी पूरा हो चुका है। म्यांमार तक यह विस्तार भारत-म्यांमार व्यापार और संपर्क को नई दिशा देगा।

परिवहन लागत में कमी और पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा

इस रेल लाइन के शुरू होने से न केवल मिजोरम और असम के बीच यात्रा का समय घटेगा, बल्कि परिवहन लागत में भी भारी कमी आएगी। साथ ही मिजोरम के दुर्गम क्षेत्रों को देश के मुख्यधारा से जोड़कर पर्यटन और आर्थिक गतिविधियों को गति मिलेगी।

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